मिशन कर्मयोगी शासन व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप संवेदनशील, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बना रहा : मुख्यमंत्री योगी
लखनऊ, जनवरी 2026। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को अपने सरकारी आवास पर आहूत एक उच्चस्तरीय बैठक में ‘मिशन कर्मयोगी’ के अंतर्गत राज्य में अब तक हुई प्रगति और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में मिशन के क्रियान्वयन, प्रशिक्षण ढांचे, डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्थिति तथा विभिन्न विभागों में क्षमता संवर्धन से जुड़े विषयों पर गहन चर्चा हुई।
बैठक के दौरान कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरपर्सन श्रीमती एस. राधा चौहान ने उत्तर प्रदेश में मिशन कर्मयोगी के क्रियान्वयन की स्थिति और भविष्य की रणनीति को लेकर मुख्यमंत्री के समक्ष विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘मिशन कर्मयोगी’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिवर्तनकारी पहल है, जिसका उद्देश्य वैश्विक दृष्टिकोण के साथ भारतीय संस्कृति के लोकाचार में निहित मूल्यों को आत्मसात करते हुए ऐसे सक्षम मानव संसाधन तैयार करना है, जो प्रदेश और देश के विकास की प्रेरक शक्ति बनें।उन्होंने कहा कि यह पहल शासन व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अधिक संवेदनशील, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाने में निर्णायक भूमिका निभा रही है।
बैठक में बताया गया कि मिशन कर्मयोगी के तहत केन्द्र सरकार में 30 लाख से अधिक सिविल सेवकों, राज्यों में लगभग 2.2 करोड़ कार्मिकों तथा शहरी स्थानीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े लगभग 50 लाख कार्मिकों को क्षमता संवर्धन से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत देशभर के 790 से अधिक सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक और सुदृढ़ बनाया जा रहा है।सभी सिविल सेवकों के सतत और समग्र ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए आईगॉट (Integrated Government Online Training) डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्थापना की गई है, जो आज विश्व का सबसे बड़ा सरकार-प्रेरित क्षमता निर्माण मंच बन चुका है। इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 1.45 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं।
आईगॉट पर कुल 4,179 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जिनमें 840 से अधिक पाठ्यक्रम हिन्दी और 15 अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में 540 से अधिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। अब तक 6.7 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूर्ण किए जा चुके हैं और पाठ्यक्रम पूर्णता दर 70 प्रतिशत से अधिक है। आईगॉट ऐप को 50 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।
आईगॉट कर्मयोगी के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। प्रदेश से 18.8 लाख से अधिक कार्मिक प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं, जो वर्ष 2025 में देशभर में हुई कुल ऑनबोर्डिंग का 93 प्रतिशत है।प्रदेश के 10 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं ने कम से कम एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। वहीं, 72 लाख से अधिक पाठ्यक्रम पूर्णता के साथ उत्तर प्रदेश ने वर्ष 2025 में देशभर में हुई कुल पाठ्यक्रम पूर्णताओं का 99 प्रतिशत योगदान दिया है। यह उपलब्धि प्रदेश में सुशासन, दक्ष प्रशासन और नागरिक-केंद्रित सेवा प्रणाली के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी विभाग और सरकारी संस्थाएं आवश्यकता अनुसार अपने पाठ्यक्रम तैयार कर भारत सरकार के ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म आईगॉट पोर्टल पर अपलोड करें।साथ ही, सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए सात दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम अनिवार्य किया जाए और इसे प्रमोशन एवं एसीआर से जोड़ा जाए।मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश में संचालित सभी प्रशिक्षण केंद्र समय की आवश्यकता के अनुरूप कैपेसिटी बिल्डिंग पाठ्यक्रम तैयार करें, जिससे प्रशिक्षणार्थियों की कार्यदक्षता में वृद्धि हो।उन्होंने कहा कि सभी विभागों के पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सिक्योरिटी को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आईगॉट के केस स्टडी प्लेटफॉर्म ‘अमृत ज्ञान कोश’ में विश्वस्तरीय केस स्टडीज उपलब्ध हैं। उत्तर प्रदेश में भी विभिन्न विभागों की अच्छी केस स्टडीज को अमृत ज्ञान कोश पर अपलोड किया जाना चाहिए। उन्होंने नई सोच और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर बल देते हुए कहा कि ज्ञान, कौशल और सकारात्मक दृष्टिकोण के समन्वय से ही जनसेवा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार संभव है।मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता, नियमित मूल्यांकन और व्यावहारिक उपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया जाए।इसके साथ ही अभियंताओं, एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं, पुलिस कॉन्स्टेबल, पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों से जुड़े फील्ड कर्मियों के लिए व्यावहारिक, कार्य-आधारित और जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए, ताकि जमीनी स्तर पर सेवाओं की प्रभावशीलता और संवेदनशीलता और अधिक मजबूत हो सके।
