भारतीय ज्योतिष - कुंडली मे धन योग कैसे बनता है ? क्या आपकी कुंडली मे है संपत्ति योग 

Kundli ka dusra bhav

कुंडली का दूसरा भाव क्या होता है ?

कुंडली के दूसरे भाव से धन और कुटुंब की स्थिति देखी जाती है । कुंडली का दूसरा भाव का कारक ग्रह देवगुरु बृहस्पति को बताया जाता है इसलिए कुंडली में बृहस्पति की स्थिति जितनी मजबूत होगी धन की स्थिति भी उतनी अच्छी होगी। 
किसी भी व्यक्ति के जीवन मे घर भवन और चल संपत्ति का निर्धारण भी दूसरे भाव से किया जाता है ।


कुंडली मे धन प्राप्ति के योग 

दूसरे भाव मे शुभ ग्रहों की स्थिति और दूसरे भाव पर शुभ ग्रहों की दृष्टि जितनी ही अच्छी होगी धन की स्थिति भी उतनी ही अच्छी होगी ।

अगर कुंडली मे बुध ग्रह दूसरे भाव मे स्थित हो और उस पर अगर चंद्रमा की दृष्टि पड़ जाए तो ऐसे लोगों को धन कमाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है और धन बड़े ही मुश्किलों से आता है ।


कुंडली मे अमीर बनने के योग 

हां अगर उसी जगह दूसरे भाव मे चंद्रमा है तो ऐसे लोग मेहनत करते हैं और धन कमाने का प्रयास करते हैं तो ऐसे लोग धन कमा लेते हैं ।

दूसरे भाव मे चंद्रमा पर बुध की दृष्टि पड़ने पर अगर नीच के बुध की दृष्टि पड़ने पर धन खत्म हो जाता है । खतरनाक स्थिति तो तब होती है जब शुभ योग न होने पर व्यक्ति गरीब बना रहता है और दरिद्रता बनी रहती है ।


कुंडली मे गरीब होने के लक्षण

कुंडली मे अगर चंद्रमा के साथ कोई ग्रह नही है दूसरे भाव में अगर कोई ग्रह नही है या 12 वे भाव मे कोई ग्रह नही हैं दरिद्रता बनी रहती है  सारे प्रयास करने के बाद भी धन नही आता है ।

दूसरे भाव मे अगर किसी पाप ग्रह की दृष्टि पड़ रही है तो धन नही रहता है । 

पैसा न टिकने का  कारण 

अगर कुंडली मे सूर्य और बुध दूसरे भाव मे हैं तो पास में पैसा टिक ही नही सकता है । इसके लोए जितनी भी कोशिश क्यों न कर ली जाए ।

 

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