आस्था का महापर्व छठ: लोकपर्व छठ या सूर्य षष्ठी पूजा के 16 बड़े सवाल
छठ पूजा का दूसरा दिन आज
लोकपर्व छठ या सूर्य षष्ठी पूजा का विस्तार अब देश-विदेश के उन क्षेत्रों तक हो गया है, जहाँ बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग निवास करते हैं। इसके बावजूद, देश की एक बड़ी आबादी इस पूजा की मौलिक बातों से अनभिज्ञ है। यहाँ तक कि जिन घरों में यह व्रत होता है, उनके मन में भी इससे जुड़े कई सवाल उठते हैं।
1. छठ या सूर्यषष्ठी व्रत में किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है?
इस व्रत में सूर्य देवता की पूजा की जाती है, जो प्रत्यक्ष दिखाई देते हैं और सभी प्राणियों के जीवन का आधार हैं। सूर्य के साथ-साथ षष्ठी देवी या छठ मैया की भी पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, षष्ठी माता संतानों की रक्षा करती हैं और उन्हें स्वस्थ एवं दीर्घायु बनाती हैं। इस अवसर पर सूर्यदेव की पत्नी ऊषा (प्रातःकाल की देवी) और प्रत्युषा (संध्याकाल की देवी) को भी अर्घ्य देकर प्रसन्न किया जाता है। इस प्रकार, छठ व्रत में सूर्यदेव और षष्ठी देवी दोनों की पूजा साथ-साथ की जाती है।
2. सूर्य से तो सभी परिचित हैं, लेकिन छठ मैया कौन-सी देवी हैं?
सृष्टि की अधिष्ठात्री प्रकृति देवी के एक प्रमुख अंश को देवसेना कहा गया है। प्रकृति का छठा अंश होने के कारण इन देवी का एक प्रचलित नाम षष्ठी है। षष्ठी देवी को ब्रह्मा की मानसपुत्री भी कहा गया है। पुराणों में इन देवी का एक नाम कात्यायनी भी है। इनकी पूजा नवरात्र में षष्ठी तिथि को होती है। षष्ठी देवी को ही स्थानीय बोली में छठ मैया कहा गया है, जो निःसंतानों को संतान देती हैं और सभी बालकों की रक्षा करती हैं।
3. षष्ठी देवी की पूजा की शुरुआत कैसे हुई? पुराण की कथा क्या है?
प्रथम मनु स्वायंभुव के पुत्र राजा प्रियव्रत निःसंतान होने के कारण दुखी रहते थे। महर्षि कश्यप के कहने पर राजा ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया, जिसके बाद उनकी महारानी मालिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया। दुर्भाग्यवश, वह शिशु मृत पैदा हुआ था। राजा का दुख देखकर एक दिव्य देवी प्रकट हुईं। उन्होंने उस मृत बालक को जीवित कर दिया। देवी की इस कृपा से राजा बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने षष्ठी देवी की स्तुति की। तभी से यह पूजा संपन्न की जा रही है।
4. आध्यात्मिक ग्रंथों में सूर्य की पूजा का प्रसंग कहाँ-कहाँ मिलता है?
शास्त्रों में भगवान सूर्य को गुरु भी कहा गया है। पवनपुत्र हनुमान ने सूर्य से ही शिक्षा प्राप्त की थी। भगवान राम ने रावण को अंतिम बाण मारने से पहले आदित्यहृदयस्तोत्र का पाठ कर सूर्य देवता को प्रसन्न किया था और विजय पाई थी। भगवान कृष्ण के पुत्र साम्ब को कुष्ठ रोग हो गया था, तब उन्होंने सूर्य की उपासना करके ही इस रोग से मुक्ति पाई थी। सूर्य की पूजा वैदिक काल से काफी पहले से होती आई है।
5. सनातन धर्म के अनेक देवी-देवताओं के बीच सूर्य का क्या स्थान है?
सूर्य की गिनती उन 5 प्रमुख देवी-देवताओं में की जाती है, जिनकी पूजा सबसे पहले करने का विधान है। पंचदेव में सूर्य के अलावा अन्य चार हैं: गणेश, दुर्गा, शिव, और विष्णु। (संदर्भ: मत्स्य पुराण)
6. सूर्य की पूजा से क्या-क्या फल मिलते हैं? पुराण का क्या मत है?
भगवान सूर्य सभी पर उपकार करने वाले और अत्यंत दयालु हैं। वे अपने उपासक को आयु, आरोग्य (स्वास्थ्य), धन-धान्य, संतान, तेज, कांति, यश, वैभव और सौभाग्य प्रदान करते हैं। वे सभी को चेतना देते हैं। सूर्य की उपासना करने से मनुष्य को सभी तरह के रोगों से छुटकारा मिल जाता है। जो सूर्य की उपासना करते हैं, वे दरिद्र, दुखी, शोकग्रस्त और अंधे नहीं होते। सूर्य को ब्रह्म का ही तेज बताया गया है, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, इन चारों पुरुषार्थों को देने वाले हैं, और पूरे संसार की रक्षा करने वाले हैं।
7. इस पूजा में लोग पवित्र नदी और तालाबों आदि के किनारे क्यों जमा होते हैं?
सूर्य की पूजा में उन्हें जल से अर्घ्य देने का विधान है। पवित्र नदियों के जल से सूर्य को अर्घ्य देने और वहाँ स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। हालाँकि, यह पूजा किसी भी साफ-सुथरी जगह पर की जा सकती है।
