Diwali 2026: दीपावली पर जरूर करें भगवान श्रीराम की आरती, ‘श्री रामचंद्र कृपालु भजमन’ के साथ पढ़ें राम जी की दोनों आरतियां
दीपावली का पर्व भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की खुशी में मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के साथ प्रभु श्रीराम की आराधना का भी विशेष महत्व है। दीपावली की पूजा में श्रीराम की आरती करने से भक्त आध्यात्मिक शांति और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यहां पढ़ें भगवान राम की दो प्रसिद्ध आरतियां
दीपावली 2026। हिंदू धर्म में दीपावली का त्योहार आस्था, प्रकाश और खुशियों का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे, तब नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका भव्य स्वागत किया था। इसी परंपरा से दीपावली पर दीप जलाने का विशेष महत्व जुड़ा हुआ है।
भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उनका जीवन सत्य, धर्म, त्याग, प्रेम और कर्तव्य पालन की प्रेरणा देता है। दीपावली के पावन अवसर पर घरों और मंदिरों में श्रीराम की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान उनकी आरती और भजन गाने की परंपरा भी प्रचलित है।
विशेष रूप से गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित ‘श्री रामचंद्र कृपालु भजमन’ का पाठ भक्तिभाव से किया जाता है। आइए जानते हैं भगवान श्रीराम की दो प्रसिद्ध आरतियों के संपूर्ण बोल।
1. श्री रघुवर जी की आरती
आरती कीजै श्री रघुवर जी की, सत चित आनन्द शिव सुन्दर की॥
दशरथ तनय कौशल्या नन्दन, सुर मुनि रक्षक दैत्य निकन्दन॥
अनुगत भक्त भक्त उर चन्दन, मर्यादा पुरुषोत्तम वर की॥
निर्गुण सगुण अनूप रूप निधि, सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि॥
हरण शोक-भय दायक नव निधि, माया रहित दिव्य नर वर की॥
जानकी पति सुर अधिपति जगपति, अखिल लोक पालक त्रिलोक गति॥
विश्व वन्द्य अवन्ह अमित गति, एक मात्र गति सचराचर की॥
शरणागत वत्सल व्रतधारी, भक्त कल्प तरुवर असुरारी॥
नाम लेत जग पावनकारी, वानर सखा दीन दुख हर की॥
2. श्री रामचंद्र कृपालु भजमन आरती
श्री रामचंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्॥
कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरज सुन्दरम्।
पटपीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम्॥
भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्॥
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणम्।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणम्॥
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम हृदय कुंज निवास कुरु कामादि खल दल गंजनम्॥
छंद
मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो॥
एही भाँति गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली॥
सोरठा
जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे॥
दीपावली पर भगवान श्रीराम की आरती का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली पर भगवान श्रीराम की आराधना करने से भक्तों को धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। आरती के दौरान परिवार के सभी सदस्यों का एक साथ शामिल होना भी शुभ माना जाता है।
दीपावली की पूजा में दीप प्रज्वलित करने के बाद भगवान श्रीराम की आरती और भजन का गायन किया जा सकता है। भक्त श्रद्धा के साथ प्रभु से परिवार की सुख-शांति, खुशहाली और मंगलमय जीवन की प्रार्थना करते हैं।
इस दीपावली प्रभु श्रीराम का स्मरण करें और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें।
जय श्रीराम! शुभ दीपावली!
