मंगलवार के दिन भरणी नक्षत्र में करें ये 12 उपाय, करियर से वैवाहिक जीवन तक मिलेंगे शुभ संकेत
धर्म डेस्क। मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है। इस दिन बजरंगबली की पूजा-अर्चना और हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। इस बार 27 अक्टूबर 2026, मंगलवार को भरणी नक्षत्र दोपहर 3 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, भरणी 27 नक्षत्रों में दूसरा नक्षत्र है। इसका अर्थ भरण-पोषण करना बताया जाता है।
भरणी नक्षत्र के स्वामी शुक्राचार्य माने जाते हैं और इसकी राशि मेष है। इसका प्रतीक त्रिकोण आकृति है। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं में इस नक्षत्र का संबंध आंवले के पेड़ से भी बताया गया है। इसी आधार पर इस नक्षत्र में जन्मे लोगों को आंवले के पेड़ की पूजा करने और संभव हो तो पौधा लगाने की सलाह दी जाती है। , मंगलवार को करियर, पारिवारिक रिश्तों, वैवाहिक जीवन और सुख-समृद्धि से जुड़े ये उपाय किए जा सकते हैं।
1. करियर में आ रही बाधाओं के लिए
यदि आपका करियर से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण काम लंबे समय से रुका हुआ है, तो मंगलवार को आंवले के पेड़ को प्रणाम करके उसकी जड़ में जल अर्पित करें। इसके बाद अपने काम को पूरा करने के लिए दोबारा प्रयास करें। यदि आसपास आंवले का पेड़ उपलब्ध न हो, तो उसकी तस्वीर देखकर या मन में स्मरण करके प्रणाम कर सकते हैं।
2. सांसारिक सुख की कामना के लिए
मान्यता के अनुसार, भरणी नक्षत्र के दौरान स्नान करने के बाद माता-पिता का आशीर्वाद लें। इसके साथ ही किसी मंदिर में रूई से बनी 51 बत्तियों का दान करें।
3. अपने व्यवहार को प्रभावशाली बनाने के लिए
यदि आप चाहते हैं कि लोग आपके व्यवहार से प्रभावित हों, तो मंगलवार को स्नान के पानी में थोड़ा-सा दही मिलाकर स्नान करने का उपाय बताया गया है। इसके साथ मंदिर में कपूर का दान करें।
4. रिश्तों में मधुरता लाने के लिए
यदि पारिवारिक या निजी रिश्तों में तनाव बना हुआ है, तो घर की दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण में घी का दीपक जलाएं। इसके बाद शुक्र के मंत्र “ॐ वस्त्रं मे देहि स्वाहा” का 11 बार जाप करें।
5. शुक्र के अशुभ प्रभावों से राहत के लिए
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, यदि जन्मपत्रिका में शुक्र की स्थिति प्रतिकूल हो, तो मंगलवार को किसी जरूरतमंद को सम्मानपूर्वक भोजन कराएं और उसका आशीर्वाद लें।
6. बच्चों के विवाह में आ रही बाधाओं के लिए
संतान के विवाह में परेशानी आ रही हो, तो भरणी नक्षत्र के दौरान कुम्हार के घर से थोड़ी मिट्टी लाकर सफेद कपड़े में बांध लें। इस पोटली को मंदिर में रखकर शुक्र मंत्र “ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः” का 11 बार जाप करें। इसके बाद पोटली संतान को अपने पास रखने के लिए दे दें।
7. प्रेम संबंध मजबूत करने के लिए
अपने प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ाने की कामना से घर के आंगन के बीच में सफेद चॉक या आटे से त्रिकोण आकृति बनाएं। उसमें एक आंवले का फल रखकर विधिपूर्वक पूजा करें। आंवला उपलब्ध न होने पर आलू रखने का विकल्प भी बताया गया है। पूजा के बाद सामग्री को वहीं रहने दें और अगले दिन किसी एकांत स्थान पर रख आएं।
8. वैवाहिक जीवन में मिठास के लिए
यदि पति-पत्नी के बीच कड़वाहट बनी हुई है, तो मंगलवार को मंदिर में आंवले का फल या आंवले का मुरब्बा दान करें। इसके साथ ही वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बनाए रखने की प्रार्थना करें।
9. यात्रा में सुरक्षा की कामना के लिए
यदि किसी जरूरी काम से घर से बाहर जा रहे हैं, तो निकलने से पहले अपने इष्ट देव को प्रणाम करें और सुरक्षित यात्रा की प्रार्थना करें।
10. जीवनसाथी के स्वास्थ्य के लिए
यदि जीवनसाथी का स्वास्थ्य कुछ दिनों से ठीक नहीं चल रहा है, तो भरणी नक्षत्र के दौरान उनके वजन के बराबर या वजन के दसवें हिस्से के बराबर ज्वार का दान करने का ज्योतिषीय उपाय बताया गया है। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर डॉक्टर की सलाह और उपचार को प्राथमिकता दें।
11. तरक्की के लिए लगाएं आंवले का पौधा
उन्नति और समृद्धि की कामना से मंगलवार को किसी मंदिर के प्रांगण या बगीचे में आंवले का पौधा लगाएं और उसकी नियमित देखभाल करें। यदि उस दिन पौधा लगाना संभव न हो, तो उचित अवसर पर पौधा लगाने का संकल्प ले सकते हैं।
12. बच्चों का पढ़ाई में मन लगाने के लिए
यदि बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा है, तो पारंपरिक मान्यता के अनुसार गोबर के उपले पर दो कपूर जलाकर उसकी धूप पढ़ाई वाले कमरे में दिखाने का उपाय बताया गया है। इसके बाद उपले को घर के मुख्य द्वार के बाहर रख आने की सलाह दी जाती है। आग और कपूर का उपयोग करते समय बच्चों को दूर रखें तथा अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें।
मंगलवार को करें हनुमान जी की पूजा
मंगलवार को भगवान हनुमान की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ और जरूरतमंदों की सहायता करना धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। भरणी नक्षत्र से जुड़े उपरोक्त उपाय पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें आस्था के अनुसार किया जा सकता है; इनके परिणाम की गारंटी नहीं है।
