होलिका दहन से कृष्ण के रास तक: बुराई पर अच्छाई की विजय और भारतीय संस्कृति की अटूट परंपरा
(मदन गुप्ता ‘सपाटू’ – विभूति फीचर्स)
फाल्गुन मास नवजीवन, नवचेतना और वसंतागमन का संदेश देता है। यह पर्व जहां गुझिया की मिठास और रंगों की बौछार से तन-मन को प्रफुल्लित करता है, वहीं भक्तिभाव, प्रेम और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। कृष्ण के रास की स्मृति और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक होलिका दहन, भारतीय संस्कृति की गहराई और दूरदर्शिता को दर्शाता है। यह एक राष्ट्रीय, धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव है, जिसमें सामूहिक गीत, रासरंग और उन्मुक्त उल्लास समाज को एक सूत्र में बांधते हैं।
होलिका दहन का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
होलिका दहन में अग्नि प्रज्ज्वलित कर वातावरण की शुद्धि का प्रयास किया जाता है। हवन सामग्री, गूलर की लकड़ी, गोबर के उपले, नारियल, अधपका अन्न आदि का प्रयोग पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। मान्यता है कि इससे वातावरण में मौजूद संक्रामक तत्वों का नाश होता है। ऋतु परिवर्तन (सर्दी से गर्मी) के इस समय में वायरल, फ्लू, मलेरिया जैसे रोगों का खतरा बढ़ता है। सामूहिक अग्नि के माध्यम से वातावरण शुद्धि का यह सांस्कृतिक अभियान प्राचीन भारतीय दूरदृष्टि का उदाहरण माना जाता है।
प्राचीन ग्रंथों में होली
होलिका दहन की कथा भक्त प्रह्लाद और उनके पिता हिरण्यकश्यप से जुड़ी है। ईश्वरभक्ति के कारण प्रह्लाद अग्नि से सुरक्षित रहे, जबकि वरदान प्राप्त होलिका भस्म हो गईं। यह घटना आज भी बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।नारद द्वारा युधिष्ठिर को फाल्गुन पूर्णिमा पर अभयदान का उल्लेख भविष्य पुराण में मिलता है।अल्बरुनी ने भी भारत में मनाए जाने वाले होली उत्सव का अपने यात्रा-वृत्तांत में वर्णन किया है। हर्षवर्धन की रचना रत्नावली में भी होली का उल्लेख मिलता है।
होली के रंग और राशियों का संबंध
रंगों का प्रभाव मनोवृति पर पड़ता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार अपनी राशि के अनुरूप रंगों का प्रयोग शुभ फलदायक माना गया है—
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मेष व वृश्चिक – लाल, केसरिया, गुलाबी शुभ; काला-नीला वर्जित।
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वृष व तुला – सफेद, सिल्वर, भूरा अनुकूल; हरे से बचें।
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मिथुन व कन्या – हरा शुभ; लाल-संतरी से परहेज।
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कर्क – आसमानी या चंदन तिलक; काला-नीला न लगाएं।
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सिंह – पीला, नारंगी, गोल्डन; काला-ग्रे से बचें।
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धनु व मीन – पीला, लाल, नारंगी शुभ; काला वर्जित।
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मकर व कुंभ – काला, नीला, ग्रे अनुकूल; लाल-गुलाबी से बचें।
प्राकृतिक रंगों का महत्व
सिंथेटिक रंगों के बजाय प्राकृतिक रंगों का प्रयोग स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए हितकारी है।
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हरा रंग – मेंहदी, पालक, पुदीना
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लाल/गुलाबी – टेसू (पलाश), गुलमोहर, चुकंदर
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पीला – हल्दी, गेंदे के फूल
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नारंगी – केसर
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भूरा – चाय या कॉफी
सूखे गुलाल के लिए चंदन, मुल्तानी मिट्टी या मैदा उपयोगी है।
होलिका दहन पर विशेष ज्योतिषीय उपाय
होलिका दहन को तांत्रिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि इस रात्रि किए गए छोटे-छोटे उपाय भी फलदायी होते हैं।
व्यापार वृद्धि व नजर दोष
गेहूं, सरसों, काली मिर्च, नींबू आदि रखकर मंत्र—
“ॐ कपालिनी स्वाहा”
का 7 बार जप कर पोटली बनाकर होलिका में अर्पित करें।
धन वृद्धि
“ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मये नमः”
108 बार जपते हुए शक्कर की आहुति दें।
रोग निवारण
सूखा नारियल, लौंग, काले तिल, सरसों 7 बार उतारकर अग्नि में समर्पित करें।
दांपत्य सुख
108 रुई की बत्तियां घी में भिगोकर संबंध सुधार की प्रार्थना सहित अर्पित करें।
नजर दोष (बच्चों हेतु)
घी में भीगे लौंग, बताशा, पान अर्पित कर अगली सुबह राख ताबीज में भरकर पहनाएं।
विवाद निवारण
चावल, कौड़ियां या नीम पत्तियां अर्पित कर शांति की कामना करें।
तांत्रिक बाधा से मुक्ति
लौंग, बताशा, पान अर्पित कर अग्नि की राख शरीर पर मलकर स्नान करें।
