Gauri Vrat (Morkat Vrat) 2026: 25 जुलाई से शुरुआत जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और धार्मिक महत्व

Gauri Vrat (Morkat Vrat) 2026: Begins on July 25; learn about the auspicious timing, rituals, and religious significance.
 
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अविवाहित कन्याओं के लिए विशेष फलदायी माना जाने वाला 'गौरी व्रत' (जिसे मोरकट व्रत भी कहा जाता है) इस वर्ष 25 जुलाई से शुरू होकर 29 जुलाई 2026 तक चलेगा। 5 दिनों तक चलने वाला यह पावन उपवास हर साल देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर गुरु पूर्णिमा के दिन संपन्न होता है। मुख्य रूप से गुजरात में लोकप्रिय यह व्रत माता पार्वती (गौरी) और भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि इस व्रत का पालन करने से कुंवारी लड़कियों को मनचाहा और सुयोग्य जीवनसाथी मिलता है, जबकि सुहागिन महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह उपवास रखती हैं।

गौरी व्रत 2026: पूजा के शुभ मुहूर्त (25 जुलाई)

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:16 बजे से 04:57 बजे तक

  • प्रातः सन्ध्या: सुबह 04:36 बजे से 05:38 बजे तक

  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:55 बजे तक

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:44 बजे से 03:38 बजे तक

  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:17 बजे से 07:37 बजे तक

  • सायाह्न सन्ध्या: शाम 07:17 बजे से रात 08:19 बजे तक

  • अमृत काल: रात 09:41 बजे से 11:29 बजे तक

गौरी व्रत की सरल पूजा विधि

  1. स्नान व संकल्प: व्रती सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें।

  2. चौकी स्थापना: पूजा स्थल पर एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर शिव परिवार या माता गौरी की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें।

  3. कलश स्थापना: प्रतिमा के पास जल से भरा कलश स्थापित करें, जिसमें आम के पत्ते और नारियल रखें।

  4. प्रथम पूज्य गणेश जी: सबसे पहले भगवान श्री गणेश का पूजन व आह्वान करें।

  5. श्रृंगार अर्पित करें: माता गौरी को रोली, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, बिंदी, सिंदूर, लाल चुनरी और हरी चूड़ियां अर्पित करें।

  6. कथा व आरती: इसके बाद भक्तिभाव से गौरी व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। अंत में धूप-दीप जलाकर आरती करें और सात्विक भोग लगाएं।

  7. फलाहार नियम: पूरे दिन नियमपूर्वक व्रत रखें और रात्रि में पूजा के पश्चात फलाहार या सात्विक आहार ग्रहण करें।

गौरी व्रत का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उसी परंपरा का पालन करते हुए कन्याएं यह व्रत रखती हैं। इस व्रत के प्रभाव से वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है तथा परिवार में सुख-शांति का वास होता है।

मां गौरी की विशेष कृपा पाने के उपाय

  • सुहाग सामग्री अर्पित करें: इन 5 दिनों के दौरान माता पार्वती को सुहाग की वस्तुएं (सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, काजल) चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है।

  • मंत्र जाप: पूजा के दौरान 'ॐ गौरी त्रिपुरसुंदरी नमः' मंत्र का पूरी निष्ठा से जाप करें।

  • कन्या पूजन: व्रत के दौरान छोटी कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें उपहार या मिठाई देकर उनका आशीर्वाद लें।

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