Gudiya Peetne Ki Parampara on Nag Panchami 2026: नाग पंचमी पर डंडों से क्यों पीटी जाती है गुड़िया? जानिए इस अनोखी लोक परंपरा और भाई-बहन से जुड़ी पौराणिक कथा

Nag Panchami 2026: Why are dolls beaten with sticks on Nag Panchami? Learn about this unique folk tradition and the mythological legend associated with the bond between siblings.
 
Gudiya Peetne Ki Parampara on Nag Panchami 2026:

Gudiya Peetne Ki Parampara on Nag Panchami: हिंदू धर्म में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पावन पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। इस दिन जहाँ एक ओर भगवान शिव के प्रिय आभूषण नाग देवता की विधि-विधान से पूजा की जाती है, वहीं उत्तर भारत—विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में 'गुड़िया पीटने' की एक अनोखी और रोचक लोक परंपरा भी निभाई जाती है।

इस परंपरा के तहत बहनें (लड़कियां) पुराने व रंग-बिरंगे कपड़ों से प्रतीकात्मक गुड़िया बनाकर चौराहे, नदी या तालाब किनारे रखती हैं और भाई (लड़के) उन्हें डंडों से पीटते हैं। आइए जानते हैं इस अनूठी परंपरा के पीछे की पौराणिक कथा और इसका धार्मिक महत्व।

 गुड़िया पीटने के पीछे की पौराणिक कथा

पौराणिक व लोक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में एक युवक भगवान शिव और नाग देवता का परम भक्त था। वह नित्य नियम से शिवालय जाकर पूजा-अर्चना करता था। मंदिर में रहने वाले सर्प उसके भक्तिभाव से इतने परिचित थे कि जब भी वह मंदिर जाता, सांप बिना कोई नुकसान पहुंचाए उसके पैरों से लिपटकर स्नेह प्रकट करते थे।

  • बहन की गलतफहमी: एक दिन युवक के साथ उसकी बहन भी मंदिर गई। उसने देखा कि एक विषैला सांप उसके भाई के पैरों से लिपटा हुआ है। भाई की जान को खतरे में समझकर बहन घबरा गई और उसने बिना सोचे-समझे डंडे से पीट-पीटकर उस सर्प को मार डाला।

  • सच्चाई और पश्चाताप: जब भाई ने पूरी बात बताई कि वह सांप उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा रहा था बल्कि उसका मित्रवत संबंध था, तो बहन को अपनी भूल का गहरा पश्चाताप हुआ और वह फूट-फूटकर रोने लगी।

  • सजा का प्रतीकात्मक स्वरूप: मंदिर में उपस्थित लोगों और पंडितों ने कहा कि अनजाने में ही सही, भगवान शिव के प्रिय नाग देवता की हत्या का पाप हुआ है और इसका दंड मिलना अनिवार्य है। चूँकि यह कृत्य भाई के प्राण बचाने के स्नेह और अज्ञानता में हुआ था, इसलिए लड़की को दंडित करने के बजाय यह व्यवस्था की गई कि प्रतीकात्मक रूप से कपड़े की गुड़िया बनाकर पीटी जाएगी।

तभी से नाग पंचमी के दिन 'गुड़िया पीटने' और भाई-बहन के प्रेम व सुरक्षा से जुड़ी यह परंपरा शुरू हो गई।

 नाग पंचमी पर कैसे करें नाग देवता का पूजन?

  1. अभिषेक: तांबे के लोटे में शुद्ध जल, गंगाजल और कच्चा गाय का दूध मिलाकर शिवलिंग व नाग देवता की प्रतिमा पर अर्पित करें।

  2. पूजा सामग्री: नाग देवता को सफेद पुष्प, धूप, दीप, रोली, अक्षत और विशेष रूप से धान का लावा (खील) व दूध अर्पित करें।

  3. मंत्र जप: कालसर्प दोष और सर्पदोष की शांति के लिए इस दिन विशेष नाग गायत्री मंत्र का जप करें:

    "ॐ वकुल नागाय विद्महे विषदंताय धीमहि, तन्नो सर्पः प्रचोदयात्॥"

  4. नाग-नागिन का जोड़ा: मंदिर में मिट्टी, चांदी या तांबे से बने नाग-नागिन के जोड़े की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करें। ऐसा करने से भगवान भोलेनाथ और नाग देवता दोनों की असीम कृपा प्राप्त होती है।

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