Karka Sankranti 2026: तिथि, पुण्य काल और महा पुण्य काल का संपूर्ण विवरण

Karka Sankranti 2026: Complete details of the date, Punya Kaal, and Maha Punya Kaal.
 
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Karka Sankranti 2026:  सनातन धर्म में सूर्य देव के राशि परिवर्तन को संक्रांति के रूप में बेहद उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। जब प्रत्यक्ष देवता सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर चंद्रमा के स्वामित्व वाली कर्क राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे कर्क संक्रांति कहा जाता है।

कर्क संक्रांति का धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत बड़ा महत्व है क्योंकि इसी दिन से सूर्य देव की छह महीने की दक्षिणायन यात्रा शुरू होती है और उत्तरायण काल समाप्त होता है। इस विशेष दिन पर पवित्र नदियों में स्नान, दान और सूर्य देव को अर्घ्य देने से आरोग्य, तेज और सफलता की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 में कर्क संक्रांति की तिथि, सूर्य गोचर, पुण्य काल और महा पुण्य काल का विस्तृत समय नीचे दिया गया है

सूर्य का कर्क राशि में गोचर (Surya Gochar Time 2026)

  • तिथि: 16 जुलाई 2026

  • गोचर का समय: रात 11 बजकर 44 मिनट पर सूर्य देव कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही कर्क संक्रांति का प्रारंभ होगा और सूर्य देव अगले एक महीने तक इसी राशि में विराजमान रहेंगे।

पुण्य काल और महा पुण्य काल का समय (Punya & Maha Punya Kaal Timing)

संक्रांति के दिन पुण्य काल और महा पुण्य काल में की गई पूजा, जप और दान का फल कई गुना अधिक मिलता है। द्रिक पंचांग के अनुसार समय इस प्रकार है:

काल (Period) शुरू होने का समय (Start Time) समाप्त होने का समय (End Time) कुल अवधि (Total Duration)
पुण्य काल दोपहर 12:27 बजे शाम 07:21 बजे 06 घंटे 53 मिनट
महा पुण्य काल शाम 05:03 बजे शाम 07:21 बजे 02 घंटे 18 मिनट

विशेष नोट: कर्क संक्रांति के दिन महा पुण्य काल का समय शाम 05:03 बजे से शुरू होकर पुण्य काल की समाप्ति (शाम 07:21 बजे) तक ही रहेगा। दान-पुण्य और विशेष अनुष्ठानों के लिए यह 2 घंटे 18 मिनट का समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

कर्क संक्रांति का धार्मिक व वैज्ञानिक महत्व (Significance)

  • दक्षिणायन का आरंभ: कर्क संक्रांति से ही छह महीने के दक्षिणायन काल की शुरुआत होती है, जो देव दीपावली और फिर अगले साल जनवरी में आने वाली मकर संक्रांति तक चलता है। सूर्य देव के कर्क राशि से लेकर धनु राशि तक के गोचर काल को दक्षिणायन कहा जाता है।

  • पितरों का दिन: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तरायण देवताओं का दिन होता है और दक्षिणायन को पितरों का दिन माना जाता है। इसलिए इस काल में पितरों की शांति के लिए किए जाने वाले तर्पण और श्राद्ध कर्म बेहद फलदायी होते हैं।

  • आरोग्य की प्राप्ति: सूर्य देव को 'जगत की आत्मा' और 'आरोग्य का कारक' माना गया है। इस दिन तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य देने से शारीरिक रोगों (विशेषकर त्वचा और नेत्र रोगों) से मुक्ति मिलती है।

इस दिन क्या करें?

  1. पवित्र स्नान: पुण्य काल के दौरान किसी पवित्र नदी, सरोवर में स्नान करें। यदि ऐसा संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

  2. दान-पुण्य: इस दिन जरूरतमंदों को तांबे के बर्तन, लाल कपड़े, गेहूं, गुड़ और सामर्थ्य अनुसार धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

  3. मंत्र जाप: सूर्य देव के बीज मंत्र "ॐ घृणि सूर्याय नमः" या गायत्री मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।

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