Navratri 2026 Day 2: माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्र; जानें कैसे पाएँ देवी का आशीर्वाद

Navratri 2026 Day 2: Worship Rituals, Auspicious Timings, and Mantras for Maa Brahmacharini; Learn How to Seek the Goddess's Blessings.
 
 Maa Brahmacharini

Navratri 2026 Day 2:  नवरात्रि के पावन पर्व का दूसरा दिन आदिशक्ति के 'माँ ब्रह्मचारिणी' स्वरूप को समर्पित है। साल 2026 में 20 मार्च को माता के इस दिव्य स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाएगी। 'ब्रह्म' का अर्थ है तपस्या और 'चारिणी' का अर्थ है आचरण करने वाली। देवी का यह रूप अनंत ज्ञान, धैर्य और कठिन तप का प्रतीक है। जो भक्त पूर्ण श्रद्धा से माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना करते हैं, उनके जीवन में संयम, सिद्धियाँ और विजय का आगमन होता है। आइए जानते हैं माँ ब्रह्मचारिणी की विस्तृत पूजा विधि और शुभ मुहूर्त:

माँ ब्रह्मचारिणी की सरल पूजा विधि (Puja Vidhi)

नवरात्रि के दूसरे दिन देवी को प्रसन्न करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें

  1. शुद्धि और संकल्प: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन प्रातः काल जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त हों। इस दिन सफेद या पीले रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक है।

  2. दीप प्रज्वलन: पूजा स्थान की शुद्धि करें और माता के सम्मुख धूप-दीप जलाएं। कलश देवता और गणेश जी का ध्यान कर पूजा का संकल्प लें।

  3. अर्पण: माता ब्रह्मचारिणी को सफेद फूल (विशेषकर चमेली या कमल) अत्यंत प्रिय हैं। उन्हें चंदन, अक्षत, रोली और पुष्प अर्पित करें। माँ को शक्कर, मिश्री या पंचामृत का भोग लगाना श्रेष्ठ फलदायी होता है।

  4. मंत्र जप: पूजा के दौरान एकाग्र मन से माता के सिद्ध मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें:

    मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः

  5. कथा और आरती: माता की व्रत कथा का पाठ करें। अंत में कर्पूर से माँ की आरती उतारें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

माता ब्रह्मचारिणी पूजा: 20 मार्च 2026 के शुभ मुहूर्त

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुभ समय में की गई पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। 20 मार्च के महत्वपूर्ण मुहूर्त नीचे दिए गए हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:08 से 05:55 तक

  • प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:31 से 06:43 तक

  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:22 से 01:10 तक (किसी भी नए कार्य के लिए श्रेष्ठ)

  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:47 से 07:11 तक

  • सायाह्न सन्ध्या: शाम 06:49 से रात 08:01 तक

पूजा का आध्यात्मिक महत्व

माँ ब्रह्मचारिणी की साधना उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो मानसिक शांति, एकाग्रता और वैराग्य के पथ पर आगे बढ़ना चाहते हैं। उनकी कृपा से साधक को कठिन संघर्षों के बीच भी विचलित न होने का धैर्य प्राप्त होता है।

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