Panchang 5 November 2026: गुरुवार को रमा एकादशी और गोवत्स द्वादशी का संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल
कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी सुबह 10:36 बजे तक, इसके बाद लगेगी द्वादशी तिथि; नोट करें ब्रह्म मुहूर्त से लेकर अभिजित मुहूर्त तक का समय
Panchang 5 November 2026: गुरुवार को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस दिन रमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसके साथ ही सुबह 10 बजकर 36 मिनट के बाद द्वादशी तिथि शुरू होगी, जिसे गोवत्स द्वादशी के रूप में मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दिन वैधृति योग और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का संयोग भी रहेगा।
एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं गोवत्स द्वादशी पर गाय और बछड़े की पूजा करने की परंपरा है। आइए जानते हैं 5 नवंबर का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
5 नवंबर 2026 का पंचांग
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तिथि: कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि सुबह 10 बजकर 36 मिनट तक, इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू
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योग: वैधृति योग अगले दिन सुबह 5 बजकर 10 मिनट तक
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नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र देर रात 3 बजकर 56 मिनट तक
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दिन: गुरुवार
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विशेष: रमा एकादशी व्रत और गोवत्स द्वादशी
5 नवंबर 2026 के शुभ मुहूर्त
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:52 बजे से 05:44 बजे तक
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प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:18 बजे से 06:36 बजे तक
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अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक
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विजय मुहूर्त: दोपहर 01:54 बजे से 02:38 बजे तक
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गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:33 बजे से 05:59 बजे तक
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सायाह्न सन्ध्या: शाम 05:33 बजे से 06:52 बजे तक
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अमृत काल: रात 08:36 बजे से 10:13 बजे तक
5 नवंबर 2026 को शहरों के अनुसार राहुकाल
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दिल्ली: दोपहर 01:27 बजे से 02:49 बजे तक
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मुंबई: दोपहर 01:48 बजे से 03:13 बजे तक
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चंडीगढ़: दोपहर 01:28 बजे से 02:49 बजे तक
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लखनऊ: दोपहर 01:13 बजे से 02:35 बजे तक
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भोपाल: दोपहर 01:28 बजे से 02:52 बजे तक
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कोलकाता: दोपहर 12:44 बजे से 02:09 बजे तक
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अहमदाबाद: दोपहर 01:47 बजे से 03:11 बजे तक
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चेन्नई: दोपहर 01:20 बजे से 02:47 बजे तक
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
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सूर्योदय: सुबह 06:36 बजे
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सूर्यास्त: शाम 05:33 बजे
रमा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का महत्व
कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के श्री केशव स्वरूप की पूजा करने और व्रत रखने की धार्मिक परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, यह व्रत एकाग्रता और आत्मसंयम बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है।
गोवत्स द्वादशी पर गाय और बछड़े की पूजा
कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को गोवत्स द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गाय और बछड़े की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गोवत्स द्वादशी का व्रत और पूजन परिवार की सुख-समृद्धि तथा संतान सुख की कामना से किया जाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद माता यशोदा ने कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वादशी को गौमाता के दर्शन कर उनका पूजन किया था। इसी कारण संतान की खुशहाली और परिवार के कल्याण की कामना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है।
