पंचांग: आषाढ़ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रात 10:31 बजे तक, रोहिणी नक्षत्र सुबह 8:29 बजे तक

Panchang: Trayodashi Tithi of the Ashadha Krishna Paksha until 10:31 PM; Rohini Nakshatra until 8:29 AM.
 
पंचांग: आषाढ़ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रात 10:31 बजे तक, रोहिणी नक्षत्र सुबह 8:29 बजे तक

12 जुलाई 2026, रविवार को सनातन धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए एक अत्यंत पवित्र और दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन रवि प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का व्रत एक ही दिन रखा जाएगा। एक ही दिन इन दोनों व्रतों का आना भगवान शिव की आराधना और उनकी विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार, 12 जुलाई 2026 का विस्तृत दैनिक पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय नीचे दिया गया है:

12 जुलाई 2026 का दैनिक पंचांग (Daily Panchang)

  • तिथि: आषाढ़ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि (रात 10 बजकर 31 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी)।

  • योग: वृद्धि योग (रात 8 बजकर 6 मिनट तक)।

  • नक्षत्र: रोहिणी नक्षत्र (सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक, इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र लगेगा)।

  • विशेष व्रत एवं त्योहार: रवि प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

  • सूर्योदय: सुबह 05:31 बजे

  • सूर्यास्त: शाम 07:21 बजे

12 जुलाई 2026 के शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)

धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और नए संकल्पों के लिए रविवार के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

मुहूर्त का प्रकार समय (Time)
ब्रह्म मुहूर्त 04:42 AM से 05:25 AM
अभिजित मुहूर्त 12:18 PM से 01:10 PM
विजय मुहूर्त 02:56 PM से 03:49 PM
गोधूलि मुहूर्त 07:19 PM से 07:40 PM
अमृत काल 09:55 PM से 11:19 PM

देश के प्रमुख शहरों में राहुकाल का समय (Unfavorable Timings)

स्वप्न और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहुकाल के दौरान शुभ या मांगलिक कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। रविवार को विभिन्न शहरों में राहुकाल का समय निम्नवत रहेगा:

  • दिल्ली: शाम 05:38 बजे से 07:22 PM

  • लखनऊ: शाम 05:20 बजे से 07:03 PM

  • मुंबई: शाम 05:41 बजे से 07:20 PM

  • कोलकाता: शाम 04:44 बजे से 06:24 PM

  • चंडीगढ़: शाम 05:43 बजे से 07:28 PM

  • भोपाल: शाम 05:28 बजे से 07:09 PM

  • अहमदाबाद: शाम 05:47 बजे से 07:28 PM

  • चेन्नई: शाम 05:03 बजे से 06:39 PM

प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का धार्मिक महत्व

रवि प्रदोष व्रत: प्रत्येक महीने के दोनों पक्षों (कृष्ण और शुक्ल) की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब यह व्रत रविवार को पड़ता है, तो इसे रवि प्रदोष कहते हैं। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के समस्त संकटों और बाधाओं का समाधान होता है तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

मासिक शिवरात्रि: कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत किया जाता है। चूंकि त्रयोदशी तिथि रात 10:31 बजे समाप्त हो जाएगी और शिवरात्रि की पूजा (निशिता काल) चतुर्दशी में होती है, इसलिए यह व्रत भी इसी दिन संपन्न होगा। मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से दांपत्य जीवन (Married Life) में मधुरता आती है और अविवाहित जातकों के विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं।

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