Parama Ekadashi 2026: 3 साल में एक बार आता है यह शुभ संयोग! परमा एकादशी की सुबह घर में चलाएं विष्णु जी के ये 5 दिव्य भजन, खिंची चली आएंगी मां लक्ष्मी

Parama Ekadashi 2026: This auspicious occasion arrives only once every three years! Play these 5 divine hymns dedicated to Lord Vishnu at home on the morning of Parama Ekadashi, and Goddess Lakshmi will be drawn to your abode.
 
Parama Ekadashi 2026

हिंदू सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष और परम महत्व माना जाता है, लेकिन आज यानी 11 जून 2026 को मनाई जा रही 'परमा एकादशी' अपने आप में बेहद खास है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस एकादशी का शुभ संयोग पूरे तीन साल में सिर्फ एक बार (अधिकमास/लौंद मास में) बनता है। शास्त्रों में मान्यता है कि इस पावन दिन पर भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के सभी आर्थिक संकट, पाप और दरिद्रता का नाश होता है।

शास्त्रों के अनुसार, परमा एकादशी के दिन सुबह और शाम के समय केवल व्रत रखना ही काफी नहीं है, बल्कि घर में नारायण के भजनों का गान करने या उन्हें सुनने का भी विशेष महत्व है। इससे न केवल अद्भुत मानसिक शांति मिलती है, बल्कि घर का कोना-कोना सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है, जिससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर घर में स्थायी वास करती हैं। आइए जानते हैं भगवान विष्णु के उन 5 सबसे लोकप्रिय और जादुई भजनों के बारे में, जिन्हें आज आपको अपने घर में जरूर बजाना चाहिए:

1. अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम (Achyutam Keshvam)

यह भगवान विष्णु और उनके कृष्ण अवतार के सबसे मधुर और लोकप्रिय भजनों में से एक है। सुबह-सुबह इस शांत और मनभावन भजन को सुनने से मन एकाग्र होता है और घर का माहौल खुशनुमा बन जाता है।

"अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम।

कौन कहता हे भगवान आते नहीं, तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं..."

यह भजन हमें सिखाता है कि यदि सच्ची श्रद्धा हो, तो ईश्वर शबरी के बेर की तरह हमारे प्रेम को भी स्वीकार करते हैं।

2. विष्णु सहस्रनाम (Vishnu Sahasranamam)

यदि आप जीवन में गंभीर आर्थिक तंगी, कर्ज या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं, तो आज के दिन भगवान विष्णु के 1000 नामों का शक्तिशाली संग्रह 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करना या सुनना सर्वोत्तम माना जाता है। परमा एकादशी पर इसका सस्वर पाठ घर की सभी नकारात्मक शक्तियों और वास्तु दोषों को जड़ से खत्म कर देता है।

3. श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि (Shriman Narayan Dhun)

नारायण की यह दिव्य धुन इतनी जादुई है कि इसे सुनते ही मन की सारी चिंताएं और तनाव दूर हो जाते हैं।

"श्रीमन नारायण नारायण हरी हरी, तेरी लीला सबसे न्यारी न्यारी हरी हरी...

लक्ष्मी नारायण नारायण हरी हरी, बोलो नारायण नारायण हरी हरी..."

यह महामंत्र न केवल विष्णु जी को बल्कि उनके साथ जगत जननी माता लक्ष्मी को भी साक्षात घर की ओर आकर्षित करता है।

4. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (Om Namo Bhagavate Vasudevaya)

यह भगवान विष्णु का साक्षात् 'द्वादशाक्षर मंत्र' (12 अक्षरों का महामंत्र) है। भजन और कीर्तन के रूप में इस मंत्र का निरंतर जाप करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। परमा एकादशी की सुबह यदि इस मंत्र की ध्वनि पूरे घर में गूंजती है, तो उस घर पर पूरे वर्ष श्रीहरि की विशेष कृपा बनी रहती है।

5. अधरं मधुरं वदनं मधुरं — मधुराष्टकम (Madhurashtakam)

वल्लभाचार्य जी द्वारा रचित 'मधुराष्टकम' भगवान श्रीहरि के कृष्ण स्वरूप के सौंदर्य और उनके मधुर स्वभाव का अद्भुत वर्णन है।

"अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरं।

हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ॥"

इस भजन का एक-एक शब्द भगवान के प्रति प्रेम और मिठास को जगाता है। इसे सुनने मात्र से ही साधक का हृदय आनंद से सराबोर हो जाता है।

एकादशी विशेष टिप:

आज परमा एकादशी के दिन पूजा के समय भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले फल और तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अवश्य अर्पित करें। साथ ही, भजनों के श्रवण के समय घर के मुख्य द्वार पर घी का एक दीपक जलाना न भूलें, इससे सुख-समृद्धि का आगमन तेजी से होता है।

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