Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का त्योहार क्यों मनाया जाता है? जानिए माता लक्ष्मी-बलि और श्रीकृष्ण-द्रौपदी से जुड़ी पौराणिक कथाएं

Raksha Bandhan 2026: Why is the festival of Raksha Bandhan celebrated? Learn about the mythological tales associated with Goddess Lakshmi and King Bali, as well as Lord Krishna and Draupadi.
 
Raksha Bandhan Significance and Mythology: भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक पावन पर्व रक्षाबंधन हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनकी दीर्घायु, सुख-समृद्धि की कामना करती हैं और भाई अपनी बहनों की आजीवन रक्षा का संकल्प लेते हैं। प्राचीन ग्रंथों में रक्षाबंधन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पौराणिक कथाओं का उल्लेख मिलता है, जो इस पर्व की महत्ता को दर्शाती हैं।

Raksha Bandhan Significance and Mythology: भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक पावन पर्व रक्षाबंधन हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनकी दीर्घायु, सुख-समृद्धि की कामना करती हैं और भाई अपनी बहनों की आजीवन रक्षा का संकल्प लेते हैं। प्राचीन ग्रंथों में रक्षाबंधन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पौराणिक कथाओं का उल्लेख मिलता है, जो इस पर्व की महत्ता को दर्शाती हैं।

माता लक्ष्मी और राजा बलि की कथा

रक्षाबंधन से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा माता लक्ष्मी और राजा बलि की है। मान्यता के अनुसार, राजा बलि ने भगवान विष्णु को पाताल लोक का द्वारपाल बना लिया था। भगवान विष्णु के पाताल लोक में रहने से माता लक्ष्मी चिंतित हो गईं।भगवान विष्णु को वापस बैकुंठ लाने के लिए माता लक्ष्मी गरीब स्त्री का रूप धारण कर पाताल लोक पहुंचीं। उन्होंने राजा बलि की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा। राजा बलि ने उन्हें उपहार मांगने के लिए कहा। तब माता लक्ष्मी ने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट करते हुए भगवान विष्णु को अपने साथ ले जाने की इच्छा व्यक्त की। वचन से बंधे राजा बलि ने भगवान विष्णु को बैकुंठ लौटने की अनुमति दे दी। इसी कथा के आधार पर रक्षासूत्र को प्रेम, विश्वास और रक्षा के पवित्र बंधन का प्रतीक माना जाता है।

श्रीकृष्ण और द्रौपदी का संबंध

रक्षाबंधन से जुड़ी एक अन्य लोकप्रिय कथा महाभारत काल की है। मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा शिशुपाल का वध किए जाने के दौरान उनकी उंगली में चोट लग गई और रक्त बहने लगा। यह देखकर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांध दिया। द्रौपदी के इस स्नेह और सेवा भाव से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा करने का वचन दिया। महाभारत में जब कौरव सभा में द्रौपदी का चीरहरण करने का प्रयास किया गया, तब श्रीकृष्ण ने उनकी लाज की रक्षा की। इस कथा को भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और रक्षा के भाव से जोड़कर देखा जाता है।

यमराज और यमुना की कथा

रक्षाबंधन से जुड़ी एक अन्य मान्यता यमराज और उनकी बहन यमुना से संबंधित है। कथा के अनुसार, लंबे समय तक भाई-बहन की मुलाकात नहीं हुई थी। एक दिन यमुना ने यमराज को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित किया। यमराज बहन के घर पहुंचे। यमुना ने उनका स्वागत किया, तिलक लगाया और उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा। यमुना के स्नेह और सत्कार से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वर मांगने को कहा। यमुना ने इच्छा व्यक्त की कि यमराज प्रत्येक वर्ष उनसे मिलने आएं और जो बहन अपने भाई को रक्षासूत्र बांधे, उसे यमराज के भय से मुक्ति मिले। यमराज ने उनकी इच्छा पूरी करने का वर दिया। यह कथा मुख्य रूप से भाई दूज से जुड़ी मानी जाती है, हालांकि कुछ परंपराओं में इसका संबंध रक्षाबंधन से भी जोड़ा जाता है।

प्रेम और रक्षा का प्रतीक है रक्षासूत्र

रक्षाबंधन की इन कथाओं में अलग-अलग पात्र और प्रसंग हैं, लेकिन इनके केंद्र में स्नेह, विश्वास, कर्तव्य और रक्षा का संकल्प है। यही कारण है कि समय के साथ यह पर्व केवल भाई-बहन तक सीमित न रहकर सामाजिक एकता और पारस्परिक जिम्मेदारी का संदेश देने वाला पर्व भी बन गया है। रक्षाबंधन पर कलाई में बांधा जाने वाला छोटा-सा धागा रिश्तों की मजबूती, प्रेम और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी की याद दिलाता है।

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