सकट चौथ 2026: संतान की सुख-समृद्धि और विघ्नहर्ता की कृपा का महापर्व
पर्व का महत्व और मातृत्व की शक्ति
सकट चौथ का सीधा संबंध भगवान श्री गणेश से है, जिन्हें हम विघ्नहर्ता कहते हैं। यह व्रत विशेष रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, बेहतर स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना के लिए रखती हैं। लोक मान्यता है कि जो मां सच्चे मन से इस दिन गणेश जी की आराधना करती है, उसके बच्चों के जीवन से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है।
पौराणिक आधार: क्यों कहते हैं इसे 'सकट'?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार देवताओं पर बहुत बड़ा संकट आ पड़ा था। तब भगवान गणेश ने अपनी बुद्धि और शक्ति से उस संकट का निवारण किया था। इसी स्मृति में माघ चतुर्थी को 'सकट' (संकट) हरने वाली चतुर्थी कहा जाने लगा। यह दिन हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन समय में भी धैर्य और ईश्वर पर विश्वास रखने से राह आसान हो जाती है।
'तिलकुट' का महत्व: आस्था और आयुर्वेद का संगम
इस पर्व में 'तिल' का विशेष महत्व है, इसीलिए इसे तिलकुटा चौथ भी कहते हैं।
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धार्मिक कारण: गणेश जी को तिल से बने मिष्ठान और तिलकुट का भोग अत्यंत प्रिय है।
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वैज्ञानिक कारण: माघ की कड़ाके की ठंड में तिल का सेवन शरीर को ऊर्जा और ऊष्मा प्रदान करता है। यह पर्व हमारी ऋतुचर्या (Seasonal Lifestyle) का एक अहम हिस्सा है।
पूजन विधि: चंद्र दर्शन के बिना अधूरा है व्रत
सकट चौथ का व्रत निर्जला या फलाहारी रखा जाता है, जिसकी पूर्णता चंद्रमा के दर्शन के बाद ही होती है।
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प्रातः काल: स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें।
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पूजा: गणेश जी की प्रतिमा को दूर्वा, पुष्प, मोदक और तिल का भोग लगाएं।
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कथा: सकट चौथ की व्रत कथा का पाठ करें या श्रवण करें।
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चंद्र दर्शन: रात्रि में चंद्रमा के उदय होने पर दूध और जल से अर्घ्य दें। इसके बाद ही व्रत का पारण (भोजन) करें।
साल 2026 में विशेष महत्व
2026 की शुरुआत में ही इस पर्व का आना एक शुभ संकेत माना जा रहा है। लोगों का विश्वास है कि साल के पहले बड़े पर्व पर यदि प्रथम पूज्य श्री गणेश की वंदना की जाए, तो पूरा वर्ष निर्विघ्न और सुखमय व्यतीत होता है।
आधुनिकता और परंपरा का तालमेल
आज के भागदौड़ भरे जीवन में भी इस व्रत की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है। डिजिटल दौर में भी महिलाएं ऑनलाइन कथाएं सुनकर और सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे को शुभकामनाएं देकर इस परंपरा को जीवंत बनाए हुए हैं। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखता है और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति का बोध कराता है।सकट चौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि विश्वास की वह लौ है जो हर मां अपनी संतान के लिए जलाती है। यह पर्व सिखाता है कि श्रद्धा में ही शक्ति है और गणेश जी की कृपा से हर बाधा का अंत संभव है।

