Sharadiya Navratri 2025 : प्रकृति को मातृभाव से पूजने का अनुपम अवसर

Sharadiya Navratri 2025: A unique opportunity to worship nature with motherly sentiments.
 
Sharadiya Navratri 2025: A unique opportunity to worship nature with motherly sentiments.

(अंजनी सक्सेना – विभूति फीचर्स)

दुर्गा सप्तशती में देवी स्वयं कहती हैं कि “शारदीय नवरात्र में होने वाली वार्षिक महापूजा के समय जो भी भक्त देवी माहात्म्य का पाठ और श्रवण करते हैं, उन पर मेरी विशेष कृपा बनी रहती है। उनके दुःख दूर होते हैं, बाधाएं शांत होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वातावरण बनता है।”
आज जब पर्यावरण संकट दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है, तब यह संदेश और भी प्रासंगिक हो उठता है। पश्चिमी सोच के कारण हमने प्रकृति पूजा को पर्यावरण विज्ञान से जोड़कर समझना कम कर दिया है, परिणामस्वरूप प्राकृतिक आपदाएं बढ़ रही हैं। हवा, पानी, धरती और आकाश पर नियंत्रण की लालसा ने प्रदूषण को जन्म दिया है। ऐसे समय में शारदीय नवरात्र हमें यह प्रेरणा देता है कि इसे केवल धार्मिक पर्व न मानकर प्रकृति पूजन के रूप में भी मनाया जाए।

भारत ने विश्व को ‘दुर्गा सप्तशती’ और ‘देवी भागवत’ जैसे अमूल्य ग्रंथ दिए, जो प्रकृति और शक्ति पूजन का शाश्वत संदेश देते हैं।

प्रकृति का मातृभाव से पूजन

भारतीय चिंतन सदैव शक्ति पूजा को प्रकृति के रहस्यों से जोड़कर देखता आया है। नवरात्र में नौ देवियों का स्मरण वस्तुतः प्रकृति के विविध स्वरूपों की आराधना है। यही कारण है कि इन्हें “नवदुर्गा” कहा गया है।

नवदुर्गा और उनका पर्यावरणीय संदेश

1. शैलपुत्री
हिमालय की संतान शैलपुत्री पर्वतों की महिमा और महत्व को दर्शाती हैं। हिमालय न केवल मौसम नियंता है बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का भी केंद्र है।

2. ब्रह्मचारिणी
ज्ञान और तप की प्रतिमूर्ति ब्रह्मचारिणी हमें बताती हैं कि सत्य और विज्ञान का आधार संयम और साधना है। यह देवी अज्ञान का नाश कर समस्त जगत को ज्ञानमय करती हैं।

3. चंद्रघंटा
सिंहवाहिनी चंद्रघंटा का रूप हमें यह शिक्षा देता है कि प्रकृति का सौंदर्य और शक्ति साथ-साथ चलती है। यह देवी उपासकों को शांति देती हैं और दुष्ट शक्तियों का संहार करती हैं।

4. कूष्माण्डा
सृष्टि की उत्पत्ति और ऊर्जा का प्रतीक यह रूप बताता है कि प्रकृति की शक्ति सूर्य के समान जीवनदाता है। लोकमान्यता में कुम्हड़े की बलि इसी ऊर्जा का प्रतीक मानी गई।

5. स्कंदमाता
मातृत्व और करुणा की देवी स्कंदमाता प्रकृति को मां के रूप में देखने की प्रेरणा देती हैं। ‘माता भूमि पुत्रोहम पृथ्व्या:’ का वेद मंत्र इसी भावना को पुष्ट करता है।

6. कात्यायनी
कात्यायनी देवी स्वतंत्रता और साहस का प्रतीक रूप हैं। ब्रज की गोपियों ने भी श्रीकृष्ण को पाने के लिए इनकी पूजा की थी। यह रूप नारी शक्ति और पर्यावरण संतुलन दोनों का आदर्श प्रस्तुत करता है।

7. कालरात्रि
कालरात्रि का भयानक रूप हमें यह चेतावनी देता है कि जब प्रकृति का संतुलन बिगड़ता है तो वह विध्वंसक बन जाती है। यह रूप आपदाओं और प्रलय की स्मृति दिलाता है।

8. महागौरी
सौम्यता, शांति और पवित्रता का प्रतीक महागौरी प्रकृति की सृजनात्मक और कल्याणकारी शक्ति को दर्शाती हैं। यही रूप लोककल्याण और समृद्धि का आधार है।

9. सिद्धिदात्री
सभी सिद्धियों की दात्री यह देवी मनुष्य को साधना, संतुलन और मोक्ष की ओर ले जाती हैं। प्रकृति की यह शक्ति जीवन को पूर्णता प्रदान करती है।

शारदीय नवरात्र केवल देवी आराधना का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और उसके विविध रूपों के पूजन का अनुपम अवसर है। आज जब उपभोक्तावाद और अंधाधुंध विकास से पर्यावरण संकट गहराता जा रहा है, तब नवरात्र हमें स्मरण कराता है कि प्रकृति ही हमारी जननी है और उसका संरक्षण ही वास्तविक धर्म है। देवी पूजन के माध्यम से हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम प्रकृति को मातृभाव से पूजें और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखें।

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