shree krishna story in hindi : श्रीकृष्ण और सच्चे भक्त की कथा

shriee  Krishna  aur sachche  bhagt ki katha 
 
विपत्ति का समय  एक दिन गाँव पर भीषण आपदा आ पड़ी। लगातार बारिश से नदी उफान पर आ गई और लोग अपने घरों में कैद हो गए। मगर माधव के मन में केवल एक ही चिंता थी – “आज ठाकुर जी को भोग कौन लगाएगा?”  उसने बिना देर किए एक टोकरी में रोटियाँ, दूध और मक्खन रखा और तेज़ बहाव की परवाह किए बिना मंदिर की ओर निकल पड़ा।  चमत्कार का दर्शन  रास्ते में पानी इतना बढ़ चुका था कि उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नदी में गिरकर बहने लगा। डूबते-डूबते उसके मुख से पुकार निकली – “गोविंदा! रक्षामाम्!”  तभी उसे महसूस हुआ कि किसी ने उसका हाथ मजबूती से थाम लिया है। आँखें खोलते ही उसने देखा – एक सुंदर नीलेवर्ण बालक, सिर पर मोर मुकुट सजाए, मुस्कुराते हुए उसे बाहर खींच रहा है।  बालक ने कहा – “माधव! इतनी चिंता क्यों कर रहे हो? मैं तो तुम्हारे भोग का इंतज़ार कर रहा था।”  माधव समझ गया कि यह कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं श्रीकृष्ण हैं। उसकी आँखों से आँसू बह निकले और वह भाव-विभोर होकर उनके चरणों में गिर पड़ा।  भगवान का संदेश  कृष्ण ने मुस्कुराते हुए कहा – “भक्ति का आधार नियम नहीं, बल्कि सच्चा प्रेम है। तूने मेरे लिए जो भाव और त्याग दिखाया, वह ही मेरे लिए सबसे बड़ा उपहार है।”  उस दिन से गाँव में यह शिक्षा फैल गई – भगवान उसी के समीप आते हैं, जो उन्हें सच्चे प्रेम और भक्ति से पुकारता है, चाहे वह साधारण ग्वाला ही क्यों न हो।

shree krishna story in hindi :  दावन की पावन धरती पर एक ग्वाला रहता था, जिसका नाम था माधव। वह साधारण जीवन जीने वाला व्यक्ति था, पर उसके हृदय में श्रीकृष्ण के प्रति अटूट प्रेम और भक्ति भरी हुई थी। हर सुबह जागते ही माधव सबसे पहले मुरलीधर का स्मरण करता और कहता – “हे गोपाल! पूरे दिन मेरा साथ देना।” उसे विधिपूर्वक पूजा-पाठ करना नहीं आता था, न ही शास्त्रों के नियमों का ज्ञान था, लेकिन अपने काम के बीच भी वह बार-बार कृष्ण नाम जपना नहीं भूलता।

विपत्ति का समय

एक दिन गाँव पर भीषण आपदा आ पड़ी। लगातार बारिश से नदी उफान पर आ गई और लोग अपने घरों में कैद हो गए। मगर माधव के मन में केवल एक ही चिंता थी  आज ठाकुर जी को भोग कौन लगाएगा? उसने बिना देर किए एक टोकरी में रोटियाँ, दूध और मक्खन रखा और तेज़ बहाव की परवाह किए बिना मंदिर की ओर निकल पड़ा।

चमत्कार का दर्शन

रास्ते में पानी इतना बढ़ चुका था कि उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नदी में गिरकर बहने लगा। डूबते-डूबते उसके मुख से पुकार निकली –“गोविंदा! रक्षामाम्!”तभी उसे महसूस हुआ कि किसी ने उसका हाथ मजबूती से थाम लिया है। आँखें खोलते ही उसने देखा एक सुंदर नीलेवर्ण बालक, सिर पर मोर मुकुट सजाए, मुस्कुराते हुए उसे बाहर खींच रहा है।बालक ने कहा – “माधव! इतनी चिंता क्यों कर रहे हो? मैं तो तुम्हारे भोग का इंतज़ार कर रहा था।” माधव समझ गया कि यह कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं श्रीकृष्ण हैं। उसकी आँखों से आँसू बह निकले और वह भाव-विभोर होकर उनके चरणों में गिर पड़ा।

भगवान का संदेश

कृष्ण ने मुस्कुराते हुए कहा  भक्ति का आधार नियम नहीं, बल्कि सच्चा प्रेम है। तूने मेरे लिए जो भाव और त्याग दिखाया, वह ही मेरे लिए सबसे बड़ा उपहार है।” उस दिन से गाँव में यह शिक्षा फैल गई  भगवान उसी के समीप आते हैं, जो उन्हें सच्चे प्रेम और भक्ति से पुकारता है, चाहे वह साधारण ग्वाला ही क्यों न हो।

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