Shukra Pradosh Vrat 2026: आज है साल का सबसे बड़ा 'शुक्र प्रदोष व्रत'; सुख-समृद्धि के लिए पूजा की थाली में जरूर रखें ये चीजें, जानें शिवलिंग पर सामग्री चढ़ाने का सही क्रम
आज 12 जून 2026, शुक्रवार को ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष का शुक्र प्रदोष व्रत है। भगवान शिव की असीम कृपा और आशीर्वाद पाने के लिए प्रदोष व्रत का दिन सर्वश्रेष्ठ माना गया है। अध्यात्म व धार्मिक मामलों की विशेषज्ञ विनीता मंडल की रिपोर्ट और शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में की गई भोलेनाथ की पूजा व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार के कष्टों, दुखों और आर्थिक तंगियों को दूर कर देती है।
यदि आप भी आज प्रदोष व्रत की पूजा करने जा रहे हैं, तो आपके लिए पूजा सामग्री की सही लिस्ट और शिवलिंग पर चीजें चढ़ाने का सही क्रम (पूजा विधि) जानना बेहद जरूरी है, ताकि आपकी पूजा संपूर्ण और फलदायी हो सके
प्रदोष व्रत पूजा सामग्री की संपूर्ण लिस्ट (Puja Samagri List)
शिव जी की पूजा शुरू करने से पहले अपनी थाली में निम्नलिखित सामग्रियां अवश्य रख लें, क्योंकि इनके बिना महादेव की आराधना अधूरी मानी जाती है:
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अभिषेक के लिए: शुद्ध जल या गंगाजल, गाय का कच्चा दूध, दही, शहद और चीनी (पंचामृत के लिए)।
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पूजा और श्रृंगार के लिए: सफेद चंदन, अक्षत (बिना टूटे हुए साबुत चावल), मौली या कलावा।
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प्रिय वस्तुएं: बेलपत्र (कम से कम 3 या 5), धतूरा, भांग, शमी के पत्ते और आंकड़े (मदार) के फूल।
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भोग और आरती के लिए: धूप, कपूर, गाय के घी का दीपक, ताजे फल और सफेद रंग की मिठाई।
शिवलिंग पर सबसे पहले क्या चढ़ाएं? जानिए सही क्रम (Shivling Puja Vidhi)
शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पर जल या अन्य सामग्रियां अर्पित करने का एक निश्चित नियम और क्रम होता है। आज शाम को पूजा के समय इस विधि का पालन करें:
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सबसे पहले चढ़ाएं जल: शिवलिंग पर सबसे पहले तांबे या पीतल के लोटे से शुद्ध जल या गंगाजल अर्पित करें। ध्यान रहे कि जल हमेशा बिल्कुल धीरे-धीरे (एक पतली धार बनाकर) चढ़ाना चाहिए।
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कच्चा दूध: जल चढ़ाने के बाद भगवान शिव को गाय का शुद्ध कच्चा दूध अर्पित करें।
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पुनः जलाभिषेक: दूध चढ़ाने के बाद शिवलिंग को शुद्ध करने के लिए एक बार फिर से साफ जल या गंगाजल से अभिषेक करें।
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चंदन और अक्षत: अभिषेक पूरा होने के बाद शिवलिंग पर सफेद चंदन का त्रिपुंड लगाएं और उसके ऊपर अक्षत (चावल) चढ़ाएं। ध्यान रखें कि चावल का एक भी दाना टूटा हुआ न हो।
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बेलपत्र और फूल: इसके बाद महादेव को बेलपत्र अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय हमेशा उसका चिकना हिस्सा नीचे (शिवलिंग की तरफ) होना चाहिए। फिर धतूरा, शमी पत्र और आंकड़े के फूल चढ़ाएं।
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धूप-दीप और आरती: अंत में धूप और घी का दीपक जलाएं, शिव चालीसा का पाठ करें और कपूर से भोलेनाथ की भावपूर्ण आरती करें।
आज का शुक्र प्रदोष व्रत 2026: शुभ मुहूर्त (Pradosh Vrat Shubh Muhurat)
आज शुक्रवार, 12 जून 2026 को प्रदोष पूजा का सटीक समय इस प्रकार है:
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त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ: आज 12 जून 2026 को शाम 07:36 बजे से।
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त्रयोदशी तिथि की समाप्ति: कल 13 जून 2026 को दोपहर 04:07 बजे।
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प्रदोष पूजा का विशेष मुहूर्त: शाम 07:36 बजे से रात 09:25 बजे तक।
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कुल अवधि: 1 घंटा 49 मिनट।
