Simha Sankranti 2026 Date & Surya Puja Upay: 17 अगस्त को अपनी स्वराशि में आएंगे सूर्य देव, करियर में सफलता और मान-सम्मान पाने के लिए जरूर करें ये 4 अचूक उपाय
Simha Sankranti 2026 Date & Surya Puja Upay: हिंदू पंचांग और वैदिक ज्योतिष में सूर्य का राशि परिवर्तन 'संक्रांति' कहलाता है। इस वर्ष 17 अगस्त 2026 को ग्रहों के राजा भगवान सूर्य अपनी स्वराशि सिंह (Leo) में प्रवेश करने जा रहे हैं, जिसे 'सिंह संक्रांति' के नाम से जाना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, पिता, सम्मान, सरकारी पद और करियर में सफलता का कारक माना जाता है। अपनी ही राशि में सूर्य का प्रवेश अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। इस पावन अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान, दान और सूर्योपासना से कुंडली में कमजोर सूर्य को मजबूती मिलती है और भाग्य के द्वार खुलते हैं। आइए जानते हैं सिंह संक्रांति के दिन किए जाने वाले 4 सरल एवं प्रभावी उपाय:
1. सूर्य देव को अर्घ्य दें
सिंह संक्रांति के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद तांबे के पात्र में जल लेकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार जल में रोली, अक्षत या लाल पुष्प डालकर अर्घ्य देना भी शुभ माना जाता है।
सूर्य को अर्घ्य देते समय मन में सकारात्मक भाव रखें और सूर्य देव से स्वास्थ्य, ऊर्जा तथा सफलता की प्रार्थना करें।
2. सूर्य मंत्र का जाप करें
इस दिन सूर्य देव के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी एक मंत्र का जाप कर सकते हैं—
ॐ सूर्याय नमः।
या
ॐ घृणि सूर्याय नमः।
मान्यता के अनुसार 108 बार मंत्र जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है। नियमित मंत्र जाप मन को एकाग्र करने और सकारात्मकता बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है।
3. जरूरतमंदों को करें दान
सिंह संक्रांति के अवसर पर दान-पुण्य की भी परंपरा है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को गेहूं, गुड़, अन्न, जल तथा लाल या नारंगी रंग के वस्त्र दान किए जा सकते हैं।
दान करते समय अपनी सामर्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निःस्वार्थ भाव से किया गया दान व्यक्ति को मानसिक संतोष प्रदान करता है और सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है।
4. करें आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ
सूर्य उपासना के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का विशेष महत्व माना जाता है। सिंह संक्रांति के दिन स्नान के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके इसका पाठ किया जा सकता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ आत्मबल, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला माना जाता है। इसे श्रद्धा और नियमितता के साथ करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
सूर्य उपासना से जुड़ी है सकारात्मक ऊर्जा की मान्यता
सिंह संक्रांति सूर्य उपासना और दान-पुण्य का अवसर मानी जाती है। हालांकि ज्योतिषीय उपायों के परिणाम व्यक्ति की मान्यताओं और कुंडली की स्थिति पर निर्भर माने जाते हैं। इन्हें निश्चित रूप से करियर या आर्थिक सफलता की गारंटी के रूप में नहीं लेना चाहिए।
