आस्था और अलौकिकता का दिव्य संगम: कोटद्वार का पावन सिद्धबली हनुमान दरबार
रमाकांत पंत-विभूति फीचर्स)
उत्तराखंड के प्रवेश द्वार माने जाने वाले कोटद्वार नगर से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर, पुण्यसलिला खोह नदी के तट पर स्थित सिद्धबली हनुमान मंदिर श्रद्धा, भक्ति और प्रकृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। एक छोटी, सुरम्य पहाड़ी पर अवस्थित यह प्राचीन मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है। मंदिर के पीछे फैली हरी-भरी पर्वत श्रृंखलाएं और सामने बहती खोह नदी का कल-कल निनाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आत्मिक शांति का अनुभव कराता है।
गुरु गोरखनाथ और हनुमान जी का अद्भुत प्रसंग
सिद्धबली धाम की स्थापना से जुड़ी पौराणिक कथा अत्यंत रोचक और श्रद्धा से परिपूर्ण है। मान्यता है कि इस पावन स्थल पर श्रीराम भक्त हनुमान, नाथ संप्रदाय के महान संत गुरु गोरखनाथ के आग्रह पर एक दिव्य प्रहरी के रूप में विराजमान हैं।
किंवदंती के अनुसार, एक समय गुरु गोरखनाथ अपने गुरु मत्स्येंद्रनाथ के साथ जनकल्याण के उद्देश्य से भ्रमण करते हुए इस वन क्षेत्र में पहुंचे। उसी समय भगवान हनुमान ने वेश बदलकर उनका मार्ग रोक लिया। इसके बाद गुरु गोरखनाथ और हनुमान जी के बीच एक अद्भुत एवं भीषण युद्ध हुआ। दोनों ही अजेय रहे। अंततः हनुमान जी अपने वास्तविक विराट स्वरूप में प्रकट हुए।
गुरु गोरखनाथ ने उन्हें आदरपूर्वक प्रणाम किया। तब हनुमान जी ने उनसे पूछा कि वे क्या चाहते हैं। इस पर गुरु गोरखनाथ ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया कि वे इस सिद्ध भूमि पर सदैव प्रहरी के रूप में निवास करें और जनमानस की रक्षा एवं कल्याण करें। हनुमान जी ने यह आग्रह स्वीकार कर लिया। तभी से यह तपोभूमि ‘सिद्धबली’ के नाम से प्रसिद्ध हुई।
तपोभूमि, जहाँ सिद्धियों ने लिया आकार
लोकमान्यता है कि गुरु गोरखनाथ ने इसी पावन भूमि पर कठोर तपस्या कर अनेक दिव्य सिद्धियां प्राप्त की थीं। इसी कारण उनके अनुयायी और श्रद्धालु उन्हें ‘सिद्ध बाबा’ के रूप में स्मरण करते हैं। कहा जाता है कि प्राचीन काल में अनेक ऋषि-मुनियों ने भी इस स्थान पर तपस्या कर भगवान हनुमान का आह्वान किया था। तभी से यह भूमि आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्य अनुभूतियों का केंद्र मानी जाती है।
डाक टिकट से मिली वैश्विक पहचान
सिद्धबली मंदिर की पौराणिक महत्ता और आध्यात्मिक प्रतिष्ठा को देखते हुए भारत सरकार के डाक विभाग ने वर्ष 2008 में इस मंदिर पर एक विशेष डाक टिकट जारी किया था। इस सम्मान के बाद सिद्धबली धाम को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिली। आज यह मंदिर धार्मिक पर्यटन के प्रमुख स्थलों में गिना जाता है।
मनोकामना पूर्ति और भंडारे की परंपरा
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि जो भी भक्त सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ सिद्धबली धाम में आता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त यहां विशाल भंडारे का आयोजन कर भगवान के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हैं।
मुख्य मंदिर परिसर में भगवान शिव का मनोहारी स्फटिक शिवलिंग, मां जगदंबा की प्रतिमा और शनि महाराज का मंदिर भी स्थापित है। इन मंदिरों की उपस्थिति इस संपूर्ण परिसर को और अधिक दिव्यता एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।
हनुमान जयंती पर अद्भुत छटा
यद्यपि वर्ष भर सिद्धबली धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है, लेकिन हनुमान जयंती के अवसर पर यहां की छटा विशेष रूप से मनोहारी हो उठती है। भक्त कुछ सीढ़ियां चढ़कर जब पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचते हैं, तो उन्हें शांत वातावरण, पर्वतीय सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत अनुभव होता है।
सिद्धबली मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि वह आस्था, प्रकृति और आध्यात्मिक अनुभूति का ऐसा तीर्थ है, जहां पहुंचकर मनुष्य स्वयं को ईश्वर के अधिक निकट अनुभव करता है। वास्तव में, आत्मिक शांति और श्रद्धा की अनुभूति के लिए कोटद्वार का सिद्धबली हनुमान दरबार एक अद्वितीय और वंदनीय तीर्थस्थल है।
