गुरुवार पूजा के नियम: कुंडली से दूर होगा गुरु दोष और आर्थिक तंगी, वृहस्पतिदेव की कृपा के लिए जरूर अपनाएं ये 5 नियम
सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है। इसी कड़ी में गुरुवार (बृहस्पतिवार) का दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और देवताओं के गुरु, देवगुरु बृहस्पति की आराधना के लिए परम पवित्र माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह को सुख, वैभव, धन, वैवाहिक जीवन, ज्ञान और सौभाग्य का कारक माना जाता है।
माना जाता है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में गुरु मजबूत स्थिति में होते हैं, उसे जीवन में हर मोड़ पर सफलता और सुख-समृद्धि मिलती है। वहीं, गुरु के कमजोर या दोषयुक्त होने पर विवाह में अड़चनें, आर्थिक तंगी और करियर में रुकावटों का सामना करना पड़ता है। अक्सर लोग अनजाने में गुरुवार की पूजा के दौरान कुछ बड़ी गलतियाँ कर बैठते हैं, जिससे लाभ की जगह गुरु दोष लग जाता है। आइए जानते हैं गुरुवार पूजा के उन महत्वपूर्ण नियमों के बारे में जिनका पालन करना हर भक्त के लिए अनिवार्य है।
1. पीले रंग की वस्तुओं का विशेष महत्व
भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति दोनों को ही पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इसलिए गुरुवार की पूजा में पीले रंग का विशेष रूप से उपयोग करना चाहिए।
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पूजा सामग्री: अपनी पूजा में पीले गेंदे के फूल, पीला चंदन, चने की दाल और हल्दी को अनिवार्य रूप से शामिल करें।
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पहनावा व भोग: इस दिन पूजा करते समय पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए पीले बूंदी के लड्डू या केसरिया खीर का भोग लगाना उत्तम फलदायी होता है।
2. अनिवार्य रूप से करें व्रत कथा का पाठ
यदि आप गुरुवार का व्रत रख रहे हैं, तो ध्यान रखें कि बिना गुरुवार व्रत कथा के श्रवण या पाठन के आपकी पूजा अधूरी मानी जाती है।
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शाम का नियम: पूजा संपन्न होने के बाद, गुरुवार की शाम को किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को पीले वस्त्र, चने की दाल, हल्दी या पीले अनाज का दान अवश्य करें।
3. केले के पेड़ की पूजा और विशेष निषेध
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केले के वृक्ष में साक्षात भगवान विष्णु का वास होता है। इसलिए इस दिन केले के पेड़ की पूजा का विशेष विधान है।
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पूजा विधि: गुरुवार की सुबह स्नान के बाद केले के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें, हल्दी का तिलक लगाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
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वर्जित कार्य: ध्यान रहे कि गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा तो की जाती है, लेकिन इस दिन केले का सेवन करना पूरी तरह वर्जित माना गया है।
4. व्रत में नमक का सेवन है पूरी तरह वर्जित
गुरुवार का व्रत रखने वाले साधकों के लिए खान-पान के कड़े नियम बताए गए हैं।
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भोजन का नियम: गुरुवार के व्रत में नमक का सेवन कतई नहीं किया जाता है। इस दिन बिना नमक वाले पीले भोजन (जैसे चने के आटे का हलवा या बिना नमक की पीली पूड़ी) का ही सेवन करना चाहिए। पूरे दिन में केवल एक ही बार बिना नमक वाले सात्विक भोजन ग्रहण करने का नियम है।
5. गुरुवार के दिन भूलकर भी न करें ये काम
शास्त्रों के अनुसार, गुरुवार के दिन कुछ दैनिक कार्यों को करने से घर की लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं और कुंडली में गुरु दोष गहरा जाता है:
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शारीरिक स्वच्छता: इस दिन बाल धोना, बाल या नाखून काटना, और पुरुषों के लिए दाढ़ी (शेविंग) बनाना सख्त वर्जित है।
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घर की सफाई: गुरुवार के दिन घर में पोंछा नहीं लगाना चाहिए और न ही भारी कपड़े धोने चाहिए। ऐसा करने से घर की सुख-समृद्धि नष्ट होती है और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
