लोकपर्व होली की अनूठी परम्पराएं

Unique traditions of the folk festival Holi
 
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(मनोज कुमार अग्रवाल – विभूति फीचर्स)
समूचे देश, विशेषकर उत्तर भारत में मनाया जाने वाला होली पर्व आस्था, विश्वास, ऋतु परिवर्तन और सामाजिक एकता का प्रतीक लोकपर्व है। इस दिन समाज के सभी वर्ग—गरीब-अमीर, ऊँच-नीच, राजा-प्रजा—सभी भेदभाव भुलाकर एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाते हैं और सामाजिक समरसता का संदेश देते हैं।
होली से जुड़ी सबसे प्रचलित कथा Prahlada और Holika की है। असुर राजा Hiranyakashipu अपने पुत्र प्रह्लाद की विष्णु भक्ति से क्रोधित था। अनेक प्रयासों के बाद भी वह प्रह्लाद का अहित न कर सका। अंततः होलिका अग्नि में बैठी, पर भगवान विष्णु की कृपा से वह स्वयं जल गई और प्रह्लाद सुरक्षित रहे। तभी से होलिका दहन अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक बन गया।

🔸 गाली देने की रीति

होली के गीतों में हास्य-व्यंग्य और चुटीली गालियों की अनूठी परंपरा है। Varanasi, मिथिलांचल, कुमाऊं, राजस्थान और हरियाणा में फाग गीतों में गालियाँ भी लोक-संस्कृति का हिस्सा हैं। काशी में तो होली पर गाली भी स्नेह का प्रतीक मानी जाती है—जो सामान्य दिनों में अनुचित लगे, वही होली में अपनत्व का रंग भर देती है।

🔸 लट्ठमार होली

Barsana और Nandgaon की लट्ठमार होली विश्वप्रसिद्ध है। मान्यता है कि Krishna बरसाना जाकर Radha और गोपियों संग होली खेलते थे। आज भी महिलाएँ पुरुषों को लट्ठ से मारती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं। देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसे देखने आते हैं।

🔸 फूलों की होली

Mathura और Vrindavan के मंदिरों में फूलों की होली का विशेष महत्व है। विशेषकर Banke Bihari Temple में खेली जाने वाली फूलों की होली अलौकिक आनंद प्रदान करती है।

🔸 मसाने की होली

Varanasi के Manikarnika Ghat पर खेली जाने वाली मसाने की होली अद्वितीय है। यहाँ चिता भस्म से होली खेली जाती है। मान्यता है कि भगवान शिव ने अपने गणों के साथ यहाँ भस्म से होली खेली थी।

🔸 फालैन गांव की होली

मथुरा के निकट स्थित Phalen गांव में जलती होली की अग्नि के बीच से पंडा नंगे पांव निकलता है और उसे आंच तक नहीं आती। इसे देखने देश-विदेश से लोग पहुँचते हैं।

🔸 कर्नाटक की होली

Hampi की होली भी विश्वप्रसिद्ध है। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल होने के कारण यहाँ का उत्सव ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है।

🔸 राजस्थान की शाही होली

Udaipur और Pushkar में शाही अंदाज में होली मनाई जाती है, जहाँ राजस्थानी परंपरा और शौर्य की झलक दिखाई देती है।
भारतीय होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक वैज्ञानिक आधार पर टिका लोकपर्व है, जो समाज को एक सूत्र में पिरोकर उमंग, उत्साह और भाईचारे का संचार करता है। यह पर्व आज भी अपनी अनूठी मस्ती और समरसता के संदेश के कारण सदैव प्रासंगिक बना हुआ है।

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