उपनिषदों के ये 5 अनमोल वचन बदल देगी आपकी जिंदगी, आज ही अपना बना लें

उपनिषदों के ये 5 अनमोल वचन बदल देगी आपकी जिंदगी, आज ही अपना बना लें
upnishad quotes in hindi: उपनिषद वेदों का सार है।

Upnishadas five previous quotes in hindi: हर इंसान की जिंदगी अनमोल है। इस अनमोल जिंदगी को किस प्रकार और बेहतर बनाया जाए, ऐसा अमूमन हर कोई चाहता है। इसके लिए मनुष्य ऐसा हरेक काम करना चाहता है जो शास्त्र सम्मत है। उपनिषद भी एक ऐसा शास्त्र  है जिसमें मनुष्य जीवन की हरेक पहलुओं के बारे में बताया गया है। परंतु, यह संस्कृत में होने के कारण आम इंसान के समझ से परे है। ऐसे में हम आपको उपनिषदों की ऐसी पांच अनमोल वचन (Upnishadas five previous quotes in hindi) को भावार्थ सहित बता रहे हैं जो निश्चित रूप से आपके काम आ सकती है। आगे जानते हैं इस बारे में...

(Upnishadas five previous quotes in hindi)
पहला अनमोल वचन- "शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्" संस्कृत का यह पद्य उपनिषद से लिया गया है। जिसका भावार्थ है- इंसान अपने शरीर से ही सारे धर्म (कर्तव्य) को पूरा कर सकता है। दूसरे अर्थ में कहें तो मनुष्य का सबसे पहला धर्म ये है कि वह सबसे पहले अपने शरीर की रक्षा करे। 

दूसरा अनमोल वचन- "प्रथमेनार्जिता विद्या द्वितीयेनार्जितं धनं। तृतीयेनार्जितः कीर्तिः चतुर्थे किं करिष्यति" संस्कृत का यह पद्य भी उपनिषद का है। मनुष्य को पहले अर्थात ब्रह्मचर्य आश्रम में विद्या अर्जित करना चाहिए। दूसरे यानि गृहस्थ आश्रम में धन अर्जित करना चाहिए। तीसरे अर्थात वानप्रस्थ आश्रम में कीर्ति (यश) अर्जित करना चाहिए। अगर इन तीनों में मनुष्य कुछ न कर सका तो वानप्रस्थ आश्रम में कुछ नहीं कर सकता। इसलिए मनुष्य को अपने अनमोल जीवन का उद्देश्य समझना चाहिए।

तीसरा अनमोल वचन- "ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते" संस्कृत का यह पद्य वृहदारण्यक उपनिषद का है। इस मंत्र सदृश पद्य का भावार्थ ये है कि परमब्रम्ह परमात्मा सभी प्रकार से सदा-सर्वदा परिपूर्ण है। पूरा संसार उसी ब्रह्मा से पूर्ण है, अर्थात उसकी मौजूदगी सभी जगह है। यह पूर्ण भी उसी पूर्ण पुरुषोत्तम से ही उत्पन्न हुआ है। पूर्ण में से पूर्ण को निकाल देने पर भी पूर्ण ही शेष रहता है।

चौथा अनमोल वचन- "ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै" संस्कृत का यह पद्य कठोपनिषद का है। इस पद्य को भोजन मंत्र के तौर पर उपयोग किया जाता है। इस मंत्र का भावार्थ है - परमेश्वर हम सबकी साथ-साथ रक्षा करें। हम सबको ज्ञान की प्राप्ति हो, ज्ञान की प्राप्ति कर हम तेजस्वी बने। हम सब आपस में विद्वेष न करें। इस प्रकार की भावना रखने वाले का मन पवित्र और निश्चल रहता है। निर्मल मन से उज्जवल भविष्य की कामना की जा सकती है।

पांचवां अनमोल वचन - "येषां न विद्या न तपो न दानं, ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्म:। ते मृत्युलोके भुवि भारभूता, मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति"  संस्कृत इस पद्य का मूल भी उपनिषद ही है। सनातन धर्म के अनुरूप चलने वाले परिवार का बच्चा-बच्चा इस श्लोक के वाकिफ होगा। इस श्लोक का अर्थ है- जिसके पास न विद्या है, जिसने तप न किया, जो इंसान धन रहते हुए भी दान न किया, जिसके पास न कोई गुण है और न ही शालीनता है, वह मनुष्य होते हुए भी जानवर के समान भ्रमणशील रहते हैं।

उपनिषद क्या है/upnishad kya hai /what is upnishadas

उपनिषद मुख्य रूप से वेद (ऋग, यजु, साम और अथर्व) का ही अंश है। साधारण शब्दों में कहें तो चारों वेद के अंतिम भाग को वेदांग या उपनिषद कहते हैं। 


उपनिषद का अर्थ/upnishad meaning/meaning of upnishadas 

सामान्य अर्थ में उपनिषद का अर्थ ये है कि यह वेदों का सार संग्रह है।


उपनिषद की संख्या कितनी है? Upanishad ki sankhya kitni hai/number of upnishad

उपनिषदों की संख्या 1000 है, ऐसा विद्वानों का कहना है। इसमें भी महत्वपूर्ण उपनिषद 108 हैं। इन उपनिषदों का सार 'गीता' है। 

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