धनतेरस पर इस विधि से करें भगवान कुबेर की पूजा, घर में सुख-समृद्धि के लिए जानें पूजन का पूरा विधान
उत्तर दिशा में स्थापित करें पूजा स्थल, गणेश पूजन से करें शुरुआत; जानें कुबेर मंत्र, पूजन सामग्री और 13 दीपक जलाने का महत्व
Dhanteras 2026 : धनतेरस का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। दीपावली से दो दिन पहले आने वाले इस त्योहार पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष और धन-संपदा के अधिपति हैं। इस वर्ष धनतेरस 6 नवंबर को मनाई जाएगी। ऐसे में आइए जानते हैं धनतेरस पर भगवान कुबेर की पूजा की आसान और पारंपरिक विधि।
1. उत्तर दिशा में तैयार करें पूजा स्थल
धनतेरस के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद घर की उत्तर दिशा में पूजा स्थल तैयार करें। एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान कुबेर की प्रतिमा, तस्वीर अथवा कुबेर यंत्र स्थापित करें। यदि इनमें से कोई सामग्री उपलब्ध न हो, तो तिजोरी या गहनों के बक्से को प्रतीक मानकर भी पूजा कर सकते हैं। तिजोरी पर सिंदूर से स्वस्तिक बनाएं और मौली बांधें।
2. भगवान गणेश के पूजन से करें शुरुआत
किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से करने की परंपरा है। इसलिए सबसे पहले गणेश जी का ध्यान और पूजन करें। इसके बाद हाथ में पुष्प लेकर भगवान कुबेर का ध्यान करें।
कुबेर ध्यान मंत्र:
मनुज-बाह्य-विमान-स्थितम्,
गरुड-रत्न-निभं निधि-नायकम्।
शिव-सखं मुकुटादि-विभूषितम्,
वर-गदे दधतं भजे तुन्दिलम्॥
3. कुबेर देव को अर्पित करें पूजन सामग्री
भगवान कुबेर की प्रतिमा, तस्वीर, चांदी के सिक्कों या तिजोरी पर जल, चंदन, कुमकुम, सिंदूर, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद इस मंत्र का 11 या 108 बार जाप करें।
कुबेर मंत्र: ॐ श्रीं कुबेराय नमः।
मंत्र जाप के बाद भगवान को फल, मिठाई और पंचामृत का भोग लगाएं। साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि का भी पूजन करें। अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें। मान्यता के अनुसार, पूजा के बाद तिजोरी में एक सिक्का या कुबेर यंत्र स्थापित करना शुभ माना जाता है।
4. प्रदोष काल में जलाएं 13 दीपक
धनतेरस पर प्रदोष काल में भगवान कुबेर की पूजा का विशेष विधान बताया गया है। इस समय धन रखने के स्थान पर 13 दीपक जलाकर भगवान कुबेर का ध्यान करें। धार्मिक मान्यताओं में दीप प्रज्ज्वलन को शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
5. सात प्रकार के अनाज और मिठाई करें अर्पित
भगवान कुबेर की पूजा में सात प्रकार के अनाज अर्पित करने की परंपरा भी बताई गई है। इनमें गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर शामिल हैं। इसके बाद पुष्प, अक्षत और धूप से भगवान का पूजन करें। भोग के लिए सफेद रंग की मिठाई अर्पित करना शुभ माना जाता है।
6. जानें भगवान कुबेर की पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं। उन्हें धन, वैभव, रत्न और समृद्धि का अधिपति माना जाता है। धनतेरस पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की आराधना करने की परंपरा है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता बनी रहती है।
