क्या दूध पीने से कैंसर होता है? जानें सच्चाई
क्या दूध कैंसर का कारण है?
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दूध किसे नहीं पीना चाहिए?
दूध और कैंसर का मिथक – क्या है वास्तविकता?
1. IGF-1 और दूध का संबंध
कई लोग मानते हैं कि दूध पीने से IGF-1 (Insulin-like Growth Factor-1) का स्तर बढ़ जाता है, जो कैंसर का कारण बन सकता है। IGF-1 किसी भी प्रोटीन से थोड़ा बढ़ता है और दूध में मौजूद कैसीन भी इसमें योगदान करता है। लेकिन दूध से IGF-1 में इतनी अधिक वृद्धि नहीं होती कि वह कैंसर का बड़ा कारण बन सके। कुछ स्टडीज़ में यह पाया गया है कि अगर कोई व्यक्ति रोजाना लगभग 1 लीटर दूध का सेवन करता है, तो उससे प्रोस्टेट कैंसर का खतरा थोड़ा बढ़ सकता है। इसके अलावा भारत में ऐसी कोई ठोस रिसर्च नहीं है जो दूध और कैंसर के बीच सीधा संबंध साबित करती हो।
2. क्या दूध से शरीर में सूजन बढ़ती है?
एक और दावा यह किया जाता है कि दूध पीने से शरीर में इंफ्लेमेशन (सूजन) बढ़ती है। अगर किसी व्यक्ति को दूध पीने से पेट खराब, गैस या एसिडिटी जैसी समस्या नहीं होती है, तो इसका मतलब है कि दूध से उसके शरीर में सूजन नहीं हो रही।
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जो लोग लैक्टोज इनटॉलरेंट हैं, उन्हें दूध से परेशानी हो सकती है।
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लेकिन आमतौर पर लोगों में दूध और उससे बने फर्मेंटेड फूड जैसे दही, छाछ, पनीर और चीज़ सूजन कम करने में मददगार साबित होते हैं।
3. दूध और हार्मोन का कनेक्शन
कुछ लोग कहते हैं कि दूध में मौजूद हार्मोन कैंसर का कारण बनते हैं, खासकर ब्रेस्ट कैंसर में। लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि दूध के जरिए जो हार्मोन शरीर में जाते हैं, वे हमारी बॉडी द्वारा स्वाभाविक रूप से बनने वाले हार्मोन्स की तुलना में बहुत कम होते हैं। इसलिए उनका कोई खतरनाक असर नहीं होता। इसके उलट, दही और छाछ जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स से कोलन कैंसर का खतरा कम होने के प्रमाण मिले हैं।
