Gut Health Guide: केवल 'पेट' का ठीक होना नहीं है 'गट हेल्थ'; जानिए एक्सपर्ट से इससे जुड़े 4 बड़े मिथक और सच
What is Gut Health and Myths: आज के दौर में सेहत और फिटनेस की चर्चाओं में 'गट हेल्थ' (Gut Health) शब्द बहुत तेजी से सुनने को मिलता है। हालांकि, जितने लोग इसके बारे में बात करते हैं, उतनी ही इसे लेकर गलतफहमियां और मिथक भी समाज में फैले हुए हैं। अधिकांश लोगों को लगता है कि अगर उनका पेट साफ है या उन्हें गैस-कब्ज नहीं है, तो उनकी गट हेल्थ बिल्कुल दुरुस्त है, जबकि हकीकत इससे काफी अलग है।
इस विषय पर अपलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. साद अनवर ने विस्तार से जानकारी दी है कि असल में गट हेल्थ क्या होती है और इसे लेकर किन भ्रांतियों से बचना बेहद जरूरी है।
क्या होती है 'गट हेल्थ' (Gut Health)?
आसान शब्दों में कहें तो गट हेल्थ का मतलब सिर्फ पेट (Stomach) का ठीक रहना नहीं है। हमारे पाचन तंत्र (Digestive System) में पेट के साथ-साथ भोजन नली (Esophagus), छोटी आंत, बड़ी आंत, लिवर, पैंक्रियाज और आंतों में मौजूद अरबों 'गुड बैक्टीरिया' (Microbiome) शामिल होते हैं।
डॉक्टर के अनुसार, यदि आपका भोजन सही तरीके से पच रहा है, शरीर खाए गए भोजन से पोषक तत्वों (Nutrients) को पूरी तरह अवशोषित कर रहा है, आपका पेट नियमित साफ होता है और आंतों में अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बना हुआ है, तो आपकी गट हेल्थ को अच्छा माना जाएगा।
आंतों को क्यों कहा जाता है शरीर का 'दूसरा दिमाग'?
गट हेल्थ का हमारे पूरे शरीर की कार्यप्रणाली पर गहरा असर पड़ता है:
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70% इम्यूनिटी आंतों में: हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर आंतों से जुड़ा होता है। एक स्वस्थ आंत हमें हानिकारक बैक्टीरिया और संक्रमण (Infections) से बचाती है।
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मेंटल हेल्थ से कनेक्शन: आंतों का सीधा संबंध हमारे मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क से भी होता है, इसलिए इसे शरीर का 'दूसरा दिमाग' (Second Brain) भी कहा जाता है।
गट हेल्थ से जुड़े 4 बड़े मिथक और उनकी सच्चाई
मिथक 1: केवल डिटॉक्स ड्रिंक्स या प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स से गट ठीक हो जाएगा
सच्चाई: डॉ. साद अनवर के मुताबिक, लोग सोचते हैं कि रोज महंगे प्रोबायोटिक सप्लीमेंट या डिटॉक्स वाटर पीने से आंतें स्वस्थ हो जाएंगी। लेकिन सच यह है कि हर व्यक्ति की आंतों की जरूरतें अलग होती हैं। बिना डॉक्टरी सलाह के सप्लीमेंट्स लेने से फायदा होने के बजाय नुकसान भी हो सकता है।
मिथक 2: पेट में दर्द, गैस या कब्ज नहीं है तो गट पूरी तरह स्वस्थ है
सच्चाई: यह एक बहुत बड़ा भ्रम है। कई बार आंतों से जुड़ी गंभीर समस्याएं और बैक्टीरिया का असंतुलन बिना किसी स्पष्ट बाहरी लक्षण (जैसे दर्द या गैस) के भी शरीर के अंदर पनप सकता है।
मिथक 3: सिर्फ दही खाने से गट हेल्थ हमेशा परफेक्ट रहेगी
सच्चाई: दही निश्चित रूप से प्राकृतिक प्रोबायोटिक का एक बेहतरीन और सुलभ स्रोत है, लेकिन केवल दही के भरोसे रहकर आंतों को पूरी तरह स्वस्थ नहीं रखा जा सकता। इसके लिए एक समग्र संतुलित आहार की आवश्यकता होती है।
मिथक 4: एंटीबायोटिक्स का आंतों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता
सच्चाई: बिना जरूरत या डॉक्टर की पर्ची के छोटी-मोटी दिक्कतों में एंटीबायोटिक (Antibiotics) दवाएं खाने की आदत आंतों के लिए बेहद नुकसानदेह है। ये दवाएं संक्रमण फैलाने वाले बुरे बैक्टीरिया के साथ-साथ आंतों के मित्र यानी 'गुड बैक्टीरिया' को भी पूरी तरह नष्ट कर देती हैं।
गट हेल्थ को प्राकृतिक रूप से दुरुस्त रखने के आसान उपाय
यदि आप अपनी आंतों को हमेशा स्वस्थ और मजबूत रखना चाहते हैं, तो इन बुनियादी बातों का पालन करें:
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फाइबर युक्त आहार: भोजन में पर्याप्त मात्रा में फाइबर, हरी सब्जियां और फल शामिल करें।
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हाइड्रेशन: दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि पाचन क्रिया सुचारू रूप से चले।
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हेल्दी लाइफस्टाइल: नियमित रूप से व्यायाम (Exercise) करें और रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद लें।
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डॉक्टरी परामर्श: यदि पाचन से जुड़ी कोई समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो उसे घरेलू नुस्खों से दबाने के बजाय तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें।
