होली विशेष :इंद्रधनुषी रंगों का उत्सव है होली, जो मिटा देता है मन के सारे भे : राजेश पाण्डेय

यह होली के पावन पर्व पर एक बहुत ही सुंदर और दार्शनिक विचार है। राजेश पाण्डेय जी ने जिस तरह होली को "समरसता का संगीत" और "सामाजिक दीवारों को नरम करने वाला उत्सव" बताया है, वह आज के समय में बहुत प्रासंगिक है।
 
होली विशेष :इंद्रधनुषी रंगों का उत्सव है होली, जो मिटा देता है मन के सारे भे : राजेश पाण्डेय
गड़वार (बलिया): भारत की सांस्कृतिक विरासत और उत्सवों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए प्रवक्ता व पूर्व प्रधान राजेश पाण्डेय ने होली के पर्व को मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक एकता का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे उत्सवधर्मी देश में त्योहार केवल परंपरा नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक खुशहाली और सांस्कृतिक समृद्धि का आधार हैं।

प्रकृति और उल्लास का अद्भुत संगम

राजेश पाण्डेय ने वसंत ऋतु और होली के गहरे संबंध का वर्णन करते हुए कहा कि जब प्रकृति नव-पुष्पों और सुगंधित बयारों से सुशोभित होती है, तभी इंद्रधनुषी रंगों का यह उत्सव हमारे जीवन में दस्तक देता है। होली का आगमन केवल वातावरण को ही नहीं, बल्कि मनुष्य के अंतर्मन को भी पुलकित कर देता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन के हर रंग—चाहे वह सुख हो या संघर्ष—को आत्मसात करना ही सच्ची जीवंतता है।

सामाजिक समरसता का संदेश

होली की सबसे बड़ी विशेषता इसकी एकीकरण की शक्ति है। इस पर जोर देते हुए उन्होंने कहाहोली सामाजिक दीवारों को ढहाने वाला पर्व है। यह हमें याद दिलाता है कि यदि हम एक दिन के लिए आपसी मतभेद भुलाकर एक-दूसरे के रंग में रंग सकते हैं, तो यह प्रेम और सौहार्द पूरे वर्ष क्यों नहीं बना रह सकता?"

मतभेद छोड़ें, मनभेद नहीं

आज के दौर में जब समाज विभिन्न विचारधाराओं और पहचानों के आधार पर बंट रहा है, राजेश पाण्डेय ने होली को एक 'पुनर्मिलन का संस्कार' बताया। उनके अनुसार:

  • क्षमा और प्रेम: होली हमें सिखाती है कि पुराने गिले-शिकवे भुलाकर गले मिलना ही मानवता है।

  • मनभेद का अंत: यह त्योहार संदेश देता है कि विचारों में अंतर (मतभेद) होना स्वाभाविक है, लेकिन दिलों में कड़वाहट (मनभेद) नहीं होनी चाहिए।

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