International Thalassaemia Day 2026: शादी से पहले थैलेसीमिया टेस्ट क्यों बनता जा रहा है जरूरी?

International Thalassemia Day 2026: Why Is Thalassemia Testing Becoming Increasingly Essential Before Marriage?
 
International Thalassaemia Day 2026: शादी से पहले थैलेसीमिया टेस्ट क्यों बनता जा रहा है जरूरी?
International Thalassemia Day 2026:  हर साल 8 मई को International Thalassaemia Day मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को थैलेसीमिया जैसी आनुवंशिक बीमारी के प्रति जागरूक करना और समय रहते जांच के महत्व को समझाना है। भारत में जहां पारंपरिक तौर पर शादी तय करते समय कुंडली, जाति, परिवार और आर्थिक स्थिति को प्राथमिकता दी जाती रही है, वहीं अब स्वास्थ्य जांच को भी गंभीरता से लिया जाने लगा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय के साथ युवाओं और परिवारों में जागरूकता बढ़ रही है। अब बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी डॉक्टर शादी से पहले थैलेसीमिया स्क्रीनिंग कराने की सलाह दे रहे हैं, ताकि भविष्य में होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सके।

क्या है थैलेसीमिया?

Thalassemia एक आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारी है, जो माता-पिता से बच्चों में पहुंचती है। इसका सबसे चुनौतीपूर्ण पहलू यह है कि इसका “कैरियर” व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ दिखाई देता है और सामान्य जीवन जीता है। उसे खुद किसी बीमारी का एहसास नहीं होता।

समस्या तब पैदा होती है जब दो थैलेसीमिया कैरियर आपस में विवाह करते हैं। ऐसे में उनके बच्चे को थैलेसीमिया मेजर होने का खतरा लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। इस स्थिति में बच्चे को जीवनभर नियमित रूप से खून चढ़ाने और लगातार इलाज की जरूरत पड़ सकती है।

शादी से पहले बढ़ रहा है हेल्थ स्क्रीनिंग का ट्रेंड

अब कई परिवार रिश्ते तय करते समय शैक्षणिक योग्यता और पारिवारिक जानकारी के साथ-साथ प्री-मैरिटल हेल्थ स्क्रीनिंग रिपोर्ट भी देख रहे हैं। खासतौर पर उन समुदायों में, जहां थैलेसीमिया के मामले अधिक पाए जाते हैं, यह जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।

युवा पीढ़ी इसे केवल मेडिकल टेस्ट नहीं, बल्कि जिम्मेदार निर्णय के रूप में देख रही है। स्वास्थ्य संस्थाएं भी शादी के सीजन में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को थैलेसीमिया जांच के लिए प्रेरित कर रही हैं। यह टेस्ट सरल, सुरक्षित और अपेक्षाकृत कम खर्च वाला माना जाता है।

समाज में अब भी मौजूद हैं गलतफहमियां

हालांकि जागरूकता बढ़ने के बावजूद समाज में कई भ्रांतियां आज भी मौजूद हैं। बहुत से लोग “कैरियर” होने को बीमारी समझ लेते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि कैरियर व्यक्ति पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है।

इसी डर के कारण कई लोग अपनी मेडिकल रिपोर्ट छिपाने की कोशिश करते हैं ताकि रिश्ता टूटने की स्थिति न बने। कई मामलों में महिलाओं को ज्यादा सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ता है और उनकी मातृत्व क्षमता पर सवाल उठाए जाते हैं। वहीं कुछ पारंपरिक सोच रखने वाले लोग अब भी इन जांचों को अनावश्यक मानते हैं।

छोटी-सी सावधानी, बड़े संकट से बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि शादी से पहले जागरूकता और जेनेटिक काउंसलिंग से थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है। कई देशों ने प्री-मैरिटल टेस्टिंग को बढ़ावा देकर इस बीमारी के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई है। भारत में भी धीरे-धीरे लोग अपनी स्वास्थ्य जानकारी को खुलेपन और जिम्मेदारी के साथ साझा करने लगे हैं। अब यह केवल एक मेडिकल टेस्ट नहीं, बल्कि रिश्तों में पारदर्शिता, विश्वास और भविष्य की सुरक्षा का प्रतीक बनता जा रहा है।

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