रात में हल्दी वाला दूध पीने की क्यों दी जाती है सलाह? जानिए नींद और सेहत पर क्या असर पड़ता है
नींद में कैसे मदद कर सकता है दूध?
दूध में ट्रिप्टोफैन नामक अमीनो एसिड पाया जाता है, जो शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन के निर्माण से जुड़ा है। मेलाटोनिन शरीर के नींद-जागने के चक्र को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कुछ अध्ययनों में दूध और डेयरी उत्पादों के सेवन तथा बेहतर नींद के बीच संबंध देखा गया है, लेकिन सभी अध्ययनों के परिणाम एक जैसे नहीं हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि रात में दूध पीने से हर व्यक्ति की नींद निश्चित रूप से बेहतर होगी।
हल्दी और करक्यूमिन का क्या संबंध है?
हल्दी में करक्यूमिन नामक प्रमुख सक्रिय यौगिक पाया जाता है। इसे इसके संभावित एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट प्रभावों के लिए जाना जाता है। हालांकि, हल्दी या करक्यूमिन को किसी बीमारी का इलाज मानना उचित नहीं है। उपलब्ध शोध में कुछ संभावित फायदे सामने आए हैं, लेकिन कई स्वास्थ्य स्थितियों में निर्णायक प्रमाण अभी पर्याप्त नहीं हैं।
हल्दी और दूध का गर्म पेय रात में लेने से कुछ लोगों को आरामदायक महसूस हो सकता है। इसके साथ ही सोने से पहले एक शांत दिनचर्या बनाना भी नींद की गुणवत्ता के लिए उपयोगी हो सकता है।
तनाव और आराम के लिए भी लिया जाता है
दिनभर की भागदौड़ के बाद गर्म दूध का सेवन कई लोगों के लिए आराम देने वाली दिनचर्या का हिस्सा होता है। हल्दी मिलाने से इसमें करक्यूमिन भी जुड़ जाता है। हालांकि, हल्दी वाला दूध तनाव या एंग्जायटी का इलाज है, ऐसा कहने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।
यदि किसी व्यक्ति को लगातार तनाव, बेचैनी या नींद की समस्या रहती है तो केवल घरेलू पेय पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
क्या हल्दी वाला दूध पाचन और हड्डियों के लिए फायदेमंद है?
दूध कैल्शियम और प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों का स्रोत है, इसलिए संतुलित आहार का हिस्सा होने के तौर पर यह हड्डियों के स्वास्थ्य में योगदान दे सकता है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन पर जोड़ों की तकलीफ और सूजन जैसे विषयों पर शोध हुआ है, लेकिन इसके प्रभाव को लेकर उच्च गुणवत्ता वाले और अधिक व्यापक अध्ययनों की जरूरत है।
वहीं, “हल्दी वाला दूध शरीर या लिवर को डिटॉक्स करता है” कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जाना चाहिए। शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का काम मुख्य रूप से लिवर और किडनी जैसे अंग करते हैं।
कैसे और कितनी मात्रा में लें?
यदि आपको दूध और हल्दी से कोई समस्या नहीं होती है तो रात में सोने से कुछ समय पहले हल्का गर्म दूध लिया जा सकता है। सामान्य भोजन में इस्तेमाल होने वाली हल्दी की छोटी मात्रा आमतौर पर अलग बात है; इसे अत्यधिक मात्रा में लेना या हाई-बायोअवेलेबिलिटी वाले करक्यूमिन सप्लीमेंट लेना समान नहीं है।
NCCIH के अनुसार, सामान्य रूप से इस्तेमाल की जाने वाली मौखिक हल्दी सीमित अवधि में अनुशंसित मात्रा में अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन इससे कुछ लोगों को पेट खराब, एसिड रिफ्लक्स, मतली या दस्त जैसी समस्या हो सकती है। कुछ अधिक अवशोषण वाली करक्यूमिन formulations से लिवर को नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट भी सामने आई है।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
अगर आपको दूध से एलर्जी या लैक्टोज इनटॉलरेंस है, तो हल्दी वाला दूध लेने से पेट संबंधी परेशानी हो सकती है। इसी तरह जो लोग नियमित दवाएं लेते हैं या करक्यूमिन/हल्दी के सप्लीमेंट इस्तेमाल करना चाहते हैं, उन्हें डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
रात में हल्दी वाला दूध एक पौष्टिक और आरामदायक घरेलू पेय हो सकता है, लेकिन इसे नींद, तनाव, सूजन या किसी बीमारी का पक्का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। अच्छी नींद के लिए नियमित दिनचर्या, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन और सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना भी महत्वपूर्ण है।
