सेवलाइफ फाउंडेशन ने प्रयागराज में स्कूल ज़ोन सेफ्टी ट्रीटमेंट का शुभारंभ किया

टाटा एआईजी के सहयोग से ‘ज़ीरो फैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट’ कार्यक्रम के तहत पहल
 
डेटा-आधारित सुरक्षा मॉडल  एसएलएफ का ज़ीरो फैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को रोकने के लिए डेटा-आधारित और सिस्टम-आधारित दृष्टिकोण पर काम करता है। यह कार्यक्रम Ministry of Road Transport and Highways (MoRTH), भारत सरकार के सहयोग से विकसित किया गया है और देश के 100 उच्च जोखिम वाले जिलों में लागू किया जा रहा है।  कार्यक्रम चार प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित है:  इंजीनियरिंग सुधार द्वारा जोखिम कम करना  यातायात नियमों का प्रभावी प्रवर्तन  दुर्घटना के बाद आपातकालीन प्रतिक्रिया को सशक्त बनाना  संस्थागत एवं सामुदायिक क्षमता का विकास  रीवा रोड (NH-30) पर सुरक्षा सुधार  जेबीएस पब्लिक स्कूल के समीप रीवा रोड (एनएच-30) पर सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को दूर करने के लिए जमीनी आकलन और सामुदायिक परामर्श किया गया। निरीक्षण में कई खतरों की पहचान हुई, जैसे:  स्कूल ज़ोन साइनेज का अभाव  अनियंत्रित तेज रफ्तार यातायात  अपर्याप्त रोशनी  असुरक्षित क्रॉसिंग  पैदल पथ और साइकिल लेन की कमी  मीडियन क्रैश बैरियर का अभाव  सड़क किनारे कचरे के ढेर  इन जोखिमों को कम करने के लिए साक्ष्य-आधारित इंजीनियरिंग ट्रीटमेंट लागू किए गए, जिनमें शामिल हैं:  हॉरिज़ॉन्टल रोड मार्किंग और रंबल स्ट्रिप्स  स्पष्ट स्कूल ज़ोन साइनेज और ब्लिंकर्स  पैदल पथ और साइकिल लेन  मेन कैरिजवे से पृथक्करण हेतु बोलार्ड्स  सुरक्षित पिक-अप एवं ड्रॉप-ऑफ ज़ोन  डायरेक्शनल एरो  व्हीकल एक्टिवेटेड स्पीड साइन (VASS) – जो तेज गति पर रियल-टाइम अलर्ट देकर चालकों को गति कम करने के लिए प्रेरित करता है।  अधिकारियों की प्रतिक्रिया  प्रयागराज के ट्रैफिक डीसीपी नीरज कुमार पांडे ने कहा कि स्कूल क्षेत्र बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से सर्वोच्च प्राथमिकता के पात्र हैं। उन्होंने इस पहल को डेटा-आधारित और संगठित प्रयास बताते हुए प्रयागराज को मॉडल डिस्ट्रिक्ट बनाने का संकल्प दोहराया।  क्षमता निर्माण और क्रैश इन्वेस्टिगेशन प्रशिक्षण  इसी दिन एक क्रैश इन्वेस्टिगेशन ट्रेनिंग सेशन का आयोजन किया गया, जिसमें 60 पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य दुर्घटना स्थल के वैज्ञानिक आकलन, साक्ष्यों के दस्तावेजीकरण और वाहन, मानव तथा पर्यावरणीय कारकों के विश्लेषण की क्षमता को मजबूत करना था।  स्वास्थ्य अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण  दिसंबर 2025 में एसएलएफ और टाटा एआईजी ने जसरा और चाका के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को जीवनरक्षक उपकरण प्रदान कर उन्हें ट्रॉमा स्टेबिलाइज़ेशन फैसिलिटी में अपग्रेड किया था। यह पहल दुर्घटना के बाद शीघ्र और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  साझेदारों के विचार  टाटा एआईजी के वाइस प्रेसिडेंट (सीएसआर एवं सस्टेनेबिलिटी) देवांग पंड्या ने कहा कि सड़क सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है और सार्वजनिक-निजी सहयोग से ही स्थायी परिवर्तन संभव है।  सेवलाइफ फाउंडेशन के संस्थापक एवं सीईओ पीयूष तिवारी ने कहा कि स्कूल जाने वाला प्रत्येक बच्चा सुरक्षित सड़क का अधिकार रखता है। उन्होंने कहा कि डेटा-आधारित इंजीनियरिंग सुधार और प्रशासनिक जवाबदेही के साथ मिलकर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को काफी हद तक रोका जा सकता है।

प्रयागराज। SaveLIFE Foundation (एसएलएफ) ने Tata AIG General Insurance Company Limited के सहयोग से एक महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहल के तहत JBS Public School Prayagraj में व्यापक स्कूल ज़ोन सेफ्टी ट्रीटमेंट का शुभारंभ किया। यह पहल प्रयागराज में एसएलएफ के ज़ीरो फैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD) प्रोग्राम के अंतर्गत की गई है।

इस अवसर पर विभिन्न सरकारी भागीदारों, कार्यान्वयन एजेंसियों, कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों, स्कूल प्रशासन और स्थानीय समुदाय के सदस्यों ने स्कूल क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण कर किए गए कार्यों की समीक्षा की।

डेटा-आधारित सुरक्षा मॉडल

एसएलएफ का ज़ीरो फैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को रोकने के लिए डेटा-आधारित और सिस्टम-आधारित दृष्टिकोण पर काम करता है। यह कार्यक्रम Ministry of Road Transport and Highways (MoRTH), भारत सरकार के सहयोग से विकसित किया गया है और देश के 100 उच्च जोखिम वाले जिलों में लागू किया जा रहा है।

कार्यक्रम चार प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित है:

  • इंजीनियरिंग सुधार द्वारा जोखिम कम करना

  • यातायात नियमों का प्रभावी प्रवर्तन

  • दुर्घटना के बाद आपातकालीन प्रतिक्रिया को सशक्त बनाना

  • संस्थागत एवं सामुदायिक क्षमता का विकास

रीवा रोड (NH-30) पर सुरक्षा सुधार

जेबीएस पब्लिक स्कूल के समीप रीवा रोड (एनएच-30) पर सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को दूर करने के लिए जमीनी आकलन और सामुदायिक परामर्श किया गया। निरीक्षण में कई खतरों की पहचान हुई, जैसे:

  • स्कूल ज़ोन साइनेज का अभाव

  • अनियंत्रित तेज रफ्तार यातायात

  • अपर्याप्त रोशनी

  • असुरक्षित क्रॉसिंग

  • पैदल पथ और साइकिल लेन की कमी

  • मीडियन क्रैश बैरियर का अभाव

  • सड़क किनारे कचरे के ढेर

इन जोखिमों को कम करने के लिए साक्ष्य-आधारित इंजीनियरिंग ट्रीटमेंट लागू किए गए, जिनमें शामिल हैं:

  • हॉरिज़ॉन्टल रोड मार्किंग और रंबल स्ट्रिप्स

  • स्पष्ट स्कूल ज़ोन साइनेज और ब्लिंकर्स

  • पैदल पथ और साइकिल लेन

  • मेन कैरिजवे से पृथक्करण हेतु बोलार्ड्स

  • सुरक्षित पिक-अप एवं ड्रॉप-ऑफ ज़ोन

  • डायरेक्शनल एरो

  • व्हीकल एक्टिवेटेड स्पीड साइन (VASS) – जो तेज गति पर रियल-टाइम अलर्ट देकर चालकों को गति कम करने के लिए प्रेरित करता है।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

प्रयागराज के ट्रैफिक डीसीपी नीरज कुमार पांडे ने कहा कि स्कूल क्षेत्र बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से सर्वोच्च प्राथमिकता के पात्र हैं। उन्होंने इस पहल को डेटा-आधारित और संगठित प्रयास बताते हुए प्रयागराज को मॉडल डिस्ट्रिक्ट बनाने का संकल्प दोहराया।

क्षमता निर्माण और क्रैश इन्वेस्टिगेशन प्रशिक्षण

इसी दिन एक क्रैश इन्वेस्टिगेशन ट्रेनिंग सेशन का आयोजन किया गया, जिसमें 60 पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य दुर्घटना स्थल के वैज्ञानिक आकलन, साक्ष्यों के दस्तावेजीकरण और वाहन, मानव तथा पर्यावरणीय कारकों के विश्लेषण की क्षमता को मजबूत करना था।

स्वास्थ्य अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण

दिसंबर 2025 में एसएलएफ और टाटा एआईजी ने जसरा और चाका के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को जीवनरक्षक उपकरण प्रदान कर उन्हें ट्रॉमा स्टेबिलाइज़ेशन फैसिलिटी में अपग्रेड किया था। यह पहल दुर्घटना के बाद शीघ्र और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

साझेदारों के विचार

टाटा एआईजी के वाइस प्रेसिडेंट (सीएसआर एवं सस्टेनेबिलिटी) देवांग पंड्या ने कहा कि सड़क सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है और सार्वजनिक-निजी सहयोग से ही स्थायी परिवर्तन संभव है।

सेवलाइफ फाउंडेशन के संस्थापक एवं सीईओ पीयूष तिवारी ने कहा कि स्कूल जाने वाला प्रत्येक बच्चा सुरक्षित सड़क का अधिकार रखता है। उन्होंने कहा कि डेटा-आधारित इंजीनियरिंग सुधार और प्रशासनिक जवाबदेही के साथ मिलकर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को काफी हद तक रोका जा सकता है।

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