वाराणसी की नारी, विरासत की थाली: पारंपरिक शाकाहारी व्यंजनों को पहचान दिलाने के लिए महिला शेफ प्रतियोगिता

पीढ़ियों से चली आ रही पुरानी रेसिपीज़ को सहेजने का मौका, 31 अक्टूबर 2026 तक करें पंजीकरण

 
तीन मिनट के वीडियो से साझा करें अपनी खास रेसिपी  प्रतिभागियों को अपनी खास रेसिपी बनाते हुए तीन मिनट का वीडियो अपलोड करना होगा। इसके माध्यम से वे न केवल अपने पारंपरिक व्यंजन को पहचान दिला सकती हैं, बल्कि काशी की अनमोल पाक-विरासत को संरक्षित करने में भी योगदान दे सकती हैं।  पंजीकरण की अंतिम तिथि: 31 अक्टूबर 2026  इच्छुक प्रतिभागी अधिक जानकारी प्राप्त करने और पंजीकरण के लिए नीचे दिए गए लिंक का उपयोग कर सकती हैं:  पंजीकरण लिंक: https://forms.gle/5GxR53oU23d4RCoT8  यह प्रतियोगिता वाराणसी की पारंपरिक रसोई, घरेलू नुस्खों और पीढ़ियों से संजोकर रखे गए व्यंजनों को व्यापक पहचान दिलाने का एक अवसर है। अपनी खास रेसिपी के साथ भाग लें और काशी के पारंपरिक स्वाद को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में सहभागी बनें।

वाराणसी। काशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में यहां के पारंपरिक खान-पान की भी खास पहचान है। इसी पाक-विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘वाराणसी की नारी, विरासत की थाली’ महिला शेफ प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इसमें वाराणसी की पारंपरिक और प्राचीन शाकाहारी रेसिपीज़ को सामने लाने का अवसर मिलेगा।

प्रतियोगिता में ऐसी महिलाएं भाग ले सकती हैं, जिनके पास वाराणसी के खान-पान से जुड़ी कोई पारंपरिक शाकाहारी रेसिपी है। इसमें वे व्यंजन भी शामिल हो सकते हैं, जो पीढ़ियों से घरों में बनाए जा रहे हैं, कभी बेहद लोकप्रिय रहे हैं या आज भी स्थानीय खान-पान की परंपरा का हिस्सा हैं, लेकिन जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

तीन मिनट के वीडियो से साझा करें अपनी खास रेसिपी

प्रतिभागियों को अपनी खास रेसिपी बनाते हुए तीन मिनट का वीडियो अपलोड करना होगा। इसके माध्यम से वे न केवल अपने पारंपरिक व्यंजन को पहचान दिला सकती हैं, बल्कि काशी की अनमोल पाक-विरासत को संरक्षित करने में भी योगदान दे सकती हैं।

पंजीकरण की अंतिम तिथि: 31 अक्टूबर 2026

इच्छुक प्रतिभागी अधिक जानकारी प्राप्त करने और पंजीकरण के लिए नीचे दिए गए लिंक का उपयोग कर सकती हैं:

पंजीकरण लिंक: https://forms.gle/5GxR53oU23d4RCoT8

यह प्रतियोगिता वाराणसी की पारंपरिक रसोई, घरेलू नुस्खों और पीढ़ियों से संजोकर रखे गए व्यंजनों को व्यापक पहचान दिलाने का एक अवसर है। अपनी खास रेसिपी के साथ भाग लें और काशी के पारंपरिक स्वाद को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में सहभागी बनें।

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