मानसून में भी क्यों जरूरी है सनस्क्रीन? जानिए इसके पीछे का कारण
बदलते मौसम और मानसून की दस्तक के साथ ही अक्सर लोग अपने स्किनकेयर रूटीन से सनस्क्रीन (Sunscreen) को हटा देते हैं। ज्यादातर लोगों की यह धारणा होती है कि आसमान में काले बादल छाए होने और धूप न निकलने के कारण त्वचा को कोई नुकसान नहीं पहुंचता, इसलिए सनस्क्रीन लगाना सिर्फ समय और पैसे की बर्बादी है।
यदि आप भी ऐसा सोचते हैं, तो आप अपनी त्वचा के साथ बड़ी लापरवाही कर रहे हैं। त्वचा विशेषज्ञों (Dermatologists) के अनुसार, सनस्क्रीन का इस्तेमाल केवल चमचमाती धूप वाले दिनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर मौसम में त्वचा की सुरक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा है। आइए विस्तार से समझते हैं इसके पीछे के मुख्य कारण
बारिश के मौसम में सनस्क्रीन न छोड़ने की मुख्य वजह
1. बादलों के पार भी पहुंचती हैं 80% UV किरणें
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (AAD) के एक शोध के अनुसार, सूरज से निकलने वाली हानिकारक अल्ट्रावायलट (UV) किरणें बादलों या कोहरे के आर-पार जाने में सक्षम होती हैं। आसमान में घने बादल होने पर भी 80% तक UV किरणें धरती तक पहुंचती हैं और आपकी त्वचा को सीधे प्रभावित करती हैं। इसलिए, धूप न दिखने का मतलब यह कतई नहीं है कि आपकी त्वचा सुरक्षित है।
2. UVA और UVB किरणों का दोहरा हमला
सूरज से दो तरह की मुख्य किरणें निकलती हैं जो त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं:
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UVB किरणें: ये किरणें सनबर्न (त्वचा का झुलसना) के लिए जिम्मेदार होती हैं, जो बादलों के दिनों में थोड़ी कम हो जाती हैं।
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UVA किरणें: ये किरणें बेहद खतरनाक होती हैं जो बादलों और यहाँ तक कि घर या कार के शीशों को भी पार कर जाती हैं। ये त्वचा की गहराई में जाकर समय से पहले झुर्रियां (Premature Aging), झाइयां, फाइन लाइन्स और लंबे समय में त्वचा के कैंसर (Skin Cancer) का खतरा बढ़ा देती हैं।
3. मानसून में बढ़ता है दाग-धब्बों का खतरा
बारिश के मौसम में हवा में नमी (Humidity) बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, जिससे त्वचा पर चिपचिपाहट और पसीना आता है। ऐसे में त्वचा अधिक संवेदनशील हो जाती है। यदि इस दौरान सनस्क्रीन न लगाई जाए, तो त्वचा पर पिगमेंटेशन (काले दाग-धब्बे) और टैनिंग की समस्या तेजी से बढ़ती है।
मानसून के लिए कैसी होनी चाहिए आपकी सनस्क्रीन? (How to Choose)
बारिश के मौसम की अनूठी चुनौतियों को देखते हुए आपको अपनी सनस्क्रीन के टेक्सचर और फॉर्मूले में थोड़ा बदलाव करना चाहिए:
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ब्रॉड-स्पेक्ट्रम (Broad-Spectrum): हमेशा ऐसी सनस्क्रीन चुनें जिस पर 'Broad-Spectrum' लिखा हो। इसका मतलब है कि वह आपको UVA और UVB दोनों तरह की किरणों से सुरक्षा देगी।
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कम से कम SPF 30: मानसून के दिनों के लिए कम से कम SPF 30 और PA+++ रेटिंग वाली सनस्क्रीन का चुनाव सबसे बेहतर और प्रभावी माना जाता है।
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वॉटर-रेजिस्टेंट (Water-Resistant): बारिश की बूंदों या अत्यधिक पसीने से सनस्क्रीन के धुलने का खतरा रहता है। इसलिए इस मौसम में वॉटर-रेजिस्टेंट या स्वेट-प्रूफ सनस्क्रीन का ही इस्तेमाल करें।
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त्वचा के प्रकार के अनुसार चयन:
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तैलीय त्वचा (Oily Skin): मानसून में चिपचिपाहट से बचने के लिए जेल-बेस्ड (Gel-based), वाटर-बेस्ड या मैट फिनिश वाली लाइटवेट सनस्क्रीन चुनें।
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रूखी त्वचा (Dry Skin): हल्की नमी बनाए रखने के लिए मॉइस्चराइज़र युक्त (Cream-based) सनस्क्रीन का उपयोग करें।
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सनस्क्रीन लगाते समय रखें इन 3 बातों का विशेष ध्यान
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20 मिनट पहले लगाएं: सनस्क्रीन को घर से बाहर निकलने या बारिश में जाने से कम से कम 15 से 20 मिनट पहले लगाएं, ताकि यह त्वचा की परतों में अच्छी तरह अवशोषित (Absorb) होकर अपनी सुरक्षा परत बना सके।
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खुले हिस्सों को न भूलें: अक्सर लोग केवल चेहरे पर सनस्क्रीन लगाते हैं। चेहरे के साथ-साथ गर्दन, कान, हाथों और पैरों की खुली त्वचा पर भी इसे समान रूप से लगाना बेहद जरूरी है।
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दोबारा लगाना (Re-apply) है जरूरी: यदि आप लंबे समय तक पानी या बारिश के संपर्क में हैं, या बार-बार पसीना पोंछ रहे हैं, तो हर 2 से 3 घंटे में सनस्क्रीन को दोबारा जरूर लगाएं।
मौसम चाहे चिलचिलाती धूप का हो, कड़कड़ाती ठंड का हो या फिर रिमझिम बारिश का—आपकी त्वचा को यूवी किरणों से सुरक्षा की जरूरत हमेशा होती है। स्वस्थ, बेदाग और जवान त्वचा के लिए सनस्क्रीन को अपने दैनिक रूटीन का हिस्सा बनाए रखें।
