बलरामपुर में 108 कुंडीय महायज्ञ: डॉ. चिन्मय पंड्या ने दिया मानवता, करुणा और सद्कर्मों का संदेश
108 Kundiya Mahayagna in Balrampur: Dr. Chinmay Pandya gave the message of humanity, compassion and good deeds
Sat, 29 Nov 2025
बलरामपुर, प्रतिनिधि। नगर के छोटा परेडग्राउंड में अखिल भारतीय गायत्री परिवार द्वारा आयोजित 108 कुंडीय महायज्ञ में शनिवार को देव संस्कृति विश्वविद्यालय (हरिद्वार) के कुलपति, डॉ. चिन्मय पंड्या ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
जिले में डॉ. पंड्या के आगमन पर, गायत्री परिवार के सदस्यों के साथ पूर्व सांसद दद्दन मिश्र ने गोंडा-बलरामपुर मार्ग पर बहादुरापुर में उनका भव्य स्वागत किया। इसके पश्चात, डॉ. पंड्या सीधे छोटा परेडग्राउंड पहुँचे और वहाँ उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित किया।
मानवता ही सच्चा धर्म: 'जिसका दिल बड़ा, वही भगवान' जनता को संबोधित करते हुए देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने अपने उद्बोधन में मानवता, संवेदनशीलता और करुणा को ही सच्चा धर्म बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि "जिसका दिल बड़ा होता है, वही भगवान होता है।
डॉ. पंड्या ने महाभारत काल की प्रेरक कथा, मुग्दल और नेवले का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने हिस्से का भोजन भी भूखों में बाँट देता है, वही वास्तव में सच्चा, महान और देवतुल्य है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कर्म ही मनुष्य को देवता या राक्षस बनाते हैं। उन्होंने लोगों से आह्वान किया, "रोटी मिल-बाँटकर खाएँ, जीवन मिल-बाँटकर जिएँ।"
उन्होंने महान लेखक लियो टॉलस्टाय की नैतिक शिक्षा की कहानी के माध्यम से भी लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने समझाया कि सच्ची सम्पत्ति दान, सेवा और सद्बुद्धि में निहित है।
पूर्व सांसद ने जताया गौरव
इस अवसर पर, पूर्व सांसद दद्दन मिश्र ने डॉ. पंड्या का स्वागत करते हुए कहा कि यह बलरामपुर जिले के लिए अत्यंत गौरव की बात है कि इतने महान व्यक्तित्व का आगमन हुआ है। उन्होंने गायत्री परिवार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह संगठन समाज को नई दिशा देने और नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाने का महती कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम के अंत में, डॉ. पंड्या ने मंच पर पूर्व सांसद दद्दन मिश्र, नगर पालिका चेयरमैन धीरेन्द्र प्रताप सिंह 'धीरू' सहित कई गणमान्य लोगों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान गायत्री परिवार के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
