चार साल बाद फिर स्कूल पहुंची 11 वर्षीय नाजिया, ‘एजुकेट गर्ल्स’ की पहल से मिला दाखिला

प्रयागराज के शंकरगढ़ ब्लॉक की बच्ची ने मुश्किलों को पीछे छोड़कर दोबारा शुरू की पढ़ाई, अब शिक्षिका बनने का है सपना

 
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प्रयागराज, 20 अक्टूबर 2026। आर्थिक तंगी और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण चार साल तक स्कूल से दूर रही 11 वर्षीय नाजिया अब फिर से शिक्षा की राह पर लौट आई है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के शंकरगढ़ ब्लॉक की रहने वाली नाजिया का मई 2026 में नजदीकी पीएम श्री विद्यालय की चौथी कक्षा में दाखिला कराया गया। गैर-सरकारी संस्था ‘एजुकेट गर्ल्स’ की पहल और परिवार की काउंसलिंग से संभव हुई इस वापसी ने बालिका शिक्षा की अहमियत को एक बार फिर सामने रखा है।

आर्थिक तंगी के कारण छूट गई थी पढ़ाई

नाजिया के पिता नूर मोहम्मद और मां रहमतून निशा दिहाड़ी मजदूरी करके आठ सदस्यों के परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कक्षा एक में दाखिले के बाद ही नाजिया की पढ़ाई छूट गई थी।

माता-पिता के काम पर चले जाने के बाद घर की जिम्मेदारियां नाजिया के कंधों पर आ गईं। उसे दूर पहाड़ियों से पानी लाना, घर के काम करना और छोटे भाई-बहनों की देखभाल करनी पड़ती थी। इन परिस्थितियों के चलते वर्ष 2022 से 2026 तक वह नियमित शिक्षा से दूर रही।

सोशल मैपिंग अभियान से मिली जानकारी

वर्ष 2026 में ‘एजुकेट गर्ल्स’ की ओर से चलाए गए सोशल मैपिंग अभियान के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से नाजिया के स्कूल नहीं जाने की जानकारी मिली। इसके बाद संस्था के फील्ड कोऑर्डिनेटर ने उसके घर पहुंचकर माता-पिता से बातचीत की।

शुरुआत में परिवार को बच्ची की पढ़ाई दोबारा शुरू कराने को लेकर हिचकिचाहट थी। संस्था की ओर से कई दौर की काउंसलिंग की गई और परिजनों को शिक्षा के महत्व के बारे में समझाया गया। लगातार प्रयासों के बाद परिवार नाजिया को स्कूल भेजने के लिए तैयार हो गया।

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18 दिन के समर कैंप से बढ़ा आत्मविश्वास

स्कूल में दाखिले से पहले नाजिया ने संस्था की ओर से आयोजित 18 दिवसीय समर कैंप में हिस्सा लिया। इस दौरान उसने शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराई। कैंप में खेल-कूद और गतिविधियों के माध्यम से हिंदी, अंग्रेजी तथा गणित की बुनियादी शिक्षा दी गई।

रोचक गतिविधियों से नाजिया की झिझक कम हुई और पढ़ाई के प्रति उसकी रुचि बढ़ी। घर लौटने के बाद जब उसने अपने माता-पिता को कैंप में सीखी हुई बातें बतानी और सिखानी शुरू कीं, तो परिवार का शिक्षा के प्रति भरोसा भी मजबूत हुआ।

अब छोटे भाई-बहनों को भी पढ़ाती है नाजिया

मई 2026 में पीएम श्री विद्यालय की चौथी कक्षा में दाखिला मिलने के बाद नाजिया नियमित रूप से स्कूल जा रही है। अब वह अपने छोटे भाई-बहनों को भी साथ लेकर स्कूल जाती है और घर पर उन्हें पढ़ाने में मदद करती है।

नाजिया का सपना भविष्य में शिक्षिका बनने का है। वह पढ़-लिखकर अपने परिवार की स्थिति बेहतर करना चाहती है। चार साल तक शिक्षा से दूर रहने के बाद उसकी यह वापसी दिखाती है कि सही मार्गदर्शन, परिवार के सहयोग और समुदाय की भागीदारी से बच्चों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।

‘विद्या’ कार्यक्रम से मजबूत हो रही बुनियादी शिक्षा

‘एजुकेट गर्ल्स’ का ‘विद्या’ कार्यक्रम सरकारी स्कूलों में 7 से 14 वर्ष तक के बच्चों की बुनियादी शिक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से संचालित समुदाय-आधारित पहल है। इसके तहत गांवों के प्रशिक्षित युवा स्वयंसेवक, जिन्हें ‘टीम बालिका’ कहा जाता है, विद्यालयों के साथ मिलकर बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करते हैं।

कार्यक्रम में संस्था की विशेष शिक्षण सामग्री ‘ज्ञान का पिटारा’ के माध्यम से हिंदी, अंग्रेजी और गणित के बुनियादी कौशल विकसित करने पर जोर दिया जाता है। खेल और गतिविधियों के जरिए बच्चों को सीखने के अवसर दिए जाते हैं, ताकि पढ़ाई में कमजोर या लंबे समय तक स्कूल से दूर रहे बच्चे भी अपनी गति से आगे बढ़ सकें।

इस पहल का उद्देश्य बच्चों में सीखने के प्रति रुचि और आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ समुदाय को भी शिक्षा से जोड़ना है। नाजिया की कहानी इसी प्रयास की एक प्रेरक मिसाल है, जहां समय पर मिली मदद ने एक बच्ची को दोबारा स्कूल पहुंचने और अपने सपनों की ओर कदम बढ़ाने का अवसर दिया।

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