सेवा, सुशासन और संकल्प के 12 वर्ष; कैसे पीएम मोदी के नेतृत्व में रचा गया नए भारत का स्वर्णिम अध्याय?
(विशेष आलेख — मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव)
डिजिटल डेस्क, 10 जून 2026:
भारत के राजनीतिक इतिहास में श्री नरेन्द्र मोदी का लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनना देश के लोकतांत्रिक सफर की एक युगांतकारी और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लगातार तीसरी बार देश की सत्ता की बागडोर संभालना प्रधानमंत्री मोदी की अद्वितीय कार्यप्रणाली, सर्वसमावेशी सोच ('सबका साथ, सबका विकास'), आंतरिक व बाहरी सुरक्षा के मजबूत तंत्र और देश को आर्थिक महाशक्ति बनाने की उनकी अटूट प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है। यशस्वी प्रधानमंत्री जी की इन्हीं विशेष खूबियों ने आधुनिक भारत के निर्माण का एक स्वर्णिम अध्याय लिखा है।
वर्ष 2014 में जब श्री नरेन्द्र मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब देश की जनता ने केवल एक नई सरकार का चुनाव नहीं किया था, बल्कि शासन की एक नई कार्यशैली और राजनीतिक संस्कृति की महती अपेक्षा भी व्यक्त की थी। आज इस ऐतिहासिक यात्रा को केवल सरकारी योजनाओं, बजट और आंकड़ों के सीमित चश्मे से नहीं, बल्कि उस व्यापक दूरदर्शी दृष्टिकोण (Vision) के आधार पर समझना होगा, जिसने भारतीय शासन व्यवस्था की सोच को पूरी तरह बदल दिया है। यदि मोदी सरकार के इन सफल वर्षों को तीन शब्दों में समेटना हो, तो वे शब्द होंगे— सेवा, सुशासन और संकल्प।
1. सेवा: अंत्योदय का दर्शन और अंतिम व्यक्ति का कल्याण
प्रधानमंत्री मोदी के विजन में 'सेवा' का अर्थ केवल लोक-कल्याणकारी योजनाएं चलाना मात्र नहीं है, बल्कि शासन को स्वयं जनता के 'संरक्षक और प्रधान सेवक' के रूप में स्थापित करना है। इस सेवा-भाव का सबसे बड़ा सुफल यह रहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार की प्राथमिकताएं सदैव समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुँची हैं।
गरीब, किसान, आधी आबादी (महिलाएं), युवा और वंचित वर्ग को महज 'वोट बैंक' मानने की पुरानी राजनीतिक रूढ़िवादिता को तोड़कर, उन्हें देश की विकास प्रक्रिया के केंद्र बिंदु (Focal Point) में रखा गया। यही पावन सोच पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के 'एकात्म मानववाद' और 'अंत्योदय' के दर्शन में भी दिखाई देती है, जिसका संदेश स्पष्ट है कि विकास का वास्तविक मूल्य तब है जब उसका लाभ समाज के सबसे कमजोर और पिछड़े व्यक्ति तक सहजता से पहुँचे।
2. सुशासन: डिजिटल तकनीक से पारदर्शिता और निर्णायक नेतृत्व
मोदी सरकार की नीतियों के केंद्र में 'सुशासन' (Good Governance) हमेशा से एक प्रमुख स्तंभ रहा है। सुशासन का अर्थ सरकार को जनता के प्रति अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और प्रभावी बनाना है। देश में हुआ डिजिटल क्रांति का शंखनाद इसी सुशासन दर्शन का हिस्सा है, जहाँ तकनीक को केवल आधुनिकता का प्रतीक नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकार सुरक्षित करने का माध्यम माना गया।
प्रक्रियाओं को सरल बनाकर शासन और नागरिक के बीच की दूरी को न्यूनतम किया गया है। इसके अलावा, बड़े और ऐतिहासिक निर्णयों से बचने के बजाय उन्हें निर्भीकता से समाधान तक पहुँचाना इस शासनकाल की सबसे बड़ी पहचान रही है। इसी को वास्तविक अर्थों में 'निर्णायक नेतृत्व' कहा जाता है।
3. संकल्प: विकसित भारत और सांस्कृतिक पुनर्जागरण
21वीं सदी के इस दौर में मोदी सरकार ने 'विकसित भारत' को एक सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प के रूप में प्रस्तुत किया है। यह संकल्प केवल आर्थिक या ढांचागत प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके भीतर देश का खोया हुआ आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय गौरव की भावना भी गहराई से जुड़ी हुई है।
इस कालखंड की एक और सबसे महत्वपूर्ण विशेषता सांस्कृतिक चेतना का पुनरुत्थान है। स्वतंत्रता के बाद भारत ने आधुनिकता को तो अपनाया, लेकिन अपनी मूल सांस्कृतिक पहचान को लेकर एक संकोच की स्थिति बनी रही। पिछले 12 वर्षों में भारतीयता, अपनी विरासत और सनातन सभ्यता पर गर्व करने का भाव पूरी प्रखरता के साथ वैश्विक मंच पर सामने आया है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्विकास, और विश्व पटल पर योग व भारतीय परंपराओं का डंका बजना— इसी सांस्कृतिक आत्मविश्वास और राष्ट्रीय पुनर्जागरण का प्रतीक है।
मोदी जी का मार्गदर्शन और मध्य प्रदेश का 'विकास मॉडल'
यशस्वी प्रधानमंत्री श्री मोदी जी से निरंतर प्रेरणा प्राप्त कर हमने 'विकसित मध्य प्रदेश' का रोडमैप तैयार किया है। यह बताते हुए मन अत्यंत भाव-विभोर है कि मध्य प्रदेश के हर बड़े निर्णय और विकास यात्रा में प्रधानमंत्री जी का सदैव स्नेह, आशीर्वाद और दुर्लभ मार्गदर्शन मिला है।
-
परियोजनाओं को गति: वर्षों से लंबित पड़ी केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं हों या 'पीएम मित्र पार्क' (PM Mitra Park), उन्होंने आगे बढ़कर हर प्रशासनिक अड़चन को दूर किया। यह मध्य प्रदेश के गौरव का विषय है कि धार में देश के पहले पीएम मित्र पार्क के भूमिपूजन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जी स्वयं शामिल हुए।
-
कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर: भोपाल और इंदौर में तेजी से दौड़ती मेट्रो रेल का सपना हो, प्रदेश में 'साइबर तहसील' का सफल क्रियान्वयन हो, या आज राज्य में 9 क्रियाशील एयरपोर्ट्स और चमचमाते नेशनल हाईवेज का जाल हो— यह सब प्रधानमंत्री जी के राज्य के प्रति विशेष लगाव का प्रतिफल है।
-
नक्सलवाद से मुक्ति (लाल सलाम को आखिरी सलाम): आज हमारा मध्य प्रदेश पूरी तरह से नक्सल मुक्त हो चुका है। प्रधानमंत्री जी के उस दिशा-निर्देश ने हमारा मार्गदर्शन किया, जिसमें उन्होंने चेताया था कि "गोली का जवाब गोली से दो, लेकिन जो लोग बंदूक छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए बेहतर से बेहतर पुनर्वास की व्यवस्था भी करो।" इसी नीति का सुफल है कि आज मध्य प्रदेश नक्सलवाद के दंश से मुक्त है।
-
औद्योगिक क्रांति और संवेदना की सीख: प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से ही प्रदेश में उद्योगों का जाल बिछ रहा है और लाखों करोड़ का निवेश आ रहा है। फरवरी 2025 में भोपाल में आयोजित 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट' में उनकी सहभागिता इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। उन्होंने हमें संवेदना की जो सीख दी, उसी के आधार पर हमने अपने शुरुआती निर्णयों में इंदौर के हुकुमचंद मिल के हजारों कामगारों को उनका दशकों पुराना बकाया अधिकार (चेक वितरण) दिलवाया, जिसे प्रधानमंत्री जी ने वर्चुअली संबोधित भी किया था।इसके साथ ही, प्रदेश के सभी 55 जिलों में अग्रणी सरकारी कॉलेजों को 'प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित करना शिक्षा के क्षेत्र में हमारी बड़ी उपलब्धि है।
नए भारत की मजबूत आधारशिला
यदि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के इस गौरवशाली कार्यकाल को केवल योजनाओं, बजट के आबंटन और आर्थिक आंकड़ों की कसौटी पर परखने का प्रयास किया जाएगा, तो वह तस्वीर हमेशा अधूरी रह जाएगी। इन वर्षों का वास्तविक और ऐतिहासिक महत्व उस वैचारिक क्रांति में है, जिसने देश के शासन को सेवा से, प्रशासन को सुशासन से और राजनीति को राष्ट्र निर्माण के सर्वोच्च संकल्प से जोड़ने का अभूतपूर्व व सफल प्रयास किया है।
यह कालखंड भारत के खोए हुए आत्मविश्वास की बहाली, जन-आकांक्षाओं की पूर्ति और राष्ट्रीय चेतना के पुनर्जागरण का कालखंड रहा है, जो आने वाली सदियों के लिए 'भव्य और विकसित भारत' की सबसे मजबूत आधारशिला है।
