पूर्वोत्तर भारत का पहला शतरंज सम्राट: 16 वर्षीय मयंक चक्रवर्ती बने भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर
गुवाहाटी/स्टॉकहोम: भारतीय शतरंज के फलक पर एक नया सितारा उभरा है, जिसने न केवल अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत (North East) के लिए एक नया इतिहास रच दिया है। असम के 16 वर्षीय विलक्षण प्रतिभा के धनी मयंक चक्रवर्ती भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर (GM) बन गए हैं।
स्वीडन के स्टॉकहोम में आयोजित '8वें होटल स्टॉकहोम नॉर्थ जीएम टूर्नामेंट' में शानदार प्रदर्शन करते हुए मयंक ने अपना अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल किया। इस जीत के साथ ही उन्होंने 2500 फीडे (FIDE) रेटिंग का जादुई आंकड़ा भी पार कर लिया है।
बैडमिंटन के कोर्ट से शतरंज की बिसात तक का सफर
मयंक की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। मात्र 6 वर्ष की आयु में उनकी माता, डॉ. मानोमिता चक्रवर्ती ने उन्हें शतरंज से परिचित कराया। हालांकि, शुरुआत में मयंक का मन बैडमिंटन में अधिक रमता था। वे पी.वी. सिंधु की सफलता से प्रभावित होकर बैडमिंटन खिलाड़ी बनना चाहते थे, लेकिन जल्द ही उन्हें आभास हुआ कि उनकी असली ताकत शारीरिक चपलता के बजाय मानसिक रणनीतियों में है। शतरंज की ओर उनकी वापसी उनके जीवन का सबसे बड़ा 'टर्निंग पॉइंट' साबित हुई।
मयंक चक्रवर्ती: उपलब्धियों का सफरनामा
मयंक की प्रतिभा बचपन से ही दिखने लगी थी। उनके करियर के प्रमुख पड़ाव इस प्रकार हैं:
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2019: नेशनल अंडर-11 ओपन शतरंज चैंपियन।
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2019: एशियन यूथ शतरंज चैंपियनशिप (अंडर-10) में रजत पदक।
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2022-23: लगातार दो बार नेशनल अंडर-17 शतरंज चैंपियन का खिताब।
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खिताब: कैंडिडेट मास्टर (2021), इंटरनेशनल मास्टर (2024) और अब ग्रैंडमास्टर (2026)।
तीन निर्णायक कदम (GM Norms)
ग्रैंडमास्टर की कठिन डगर पर मयंक ने अपनी निरंतरता से सबको प्रभावित किया। उन्होंने अपने तीन नॉर्म्स इन प्रतियोगिताओं में हासिल किए:
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चोला जीएम नॉर्म टूर्नामेंट, चेन्नई (2025)
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यंग टैलेंट्स जीएम टूर्नामेंट, स्टॉकहोम (2026)
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होटल स्टॉकहोम नॉर्थ जीएम टूर्नामेंट, स्वीडन (2026) – यहाँ उन्होंने 9 में से 7 अंक अर्जित कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
खेल शैली और प्रेरणा
मयंक अपनी आक्रामक और रणनीतिक खेल शैली के लिए जाने जाते हैं। वे 'सिसिलियन डिफेंस' और 'रुई लोपेज' जैसी जटिल ओपनिंग्स में माहिर हैं। दबाव के क्षणों में उनकी शांति और सटीक चालें उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाती हैं। भारत के महान शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद उनके आदर्श हैं।
सफलता के पीछे का स्तंभ
मयंक की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनकी माँ का अटूट सहयोग रहा है, जो हर टूर्नामेंट में उनके साथ रहीं। इसके अलावा, अनुभवी कोच सप्तर्षि रॉय चौधरी और स्वयं मिश्रा के तकनीकी मार्गदर्शन ने उनके खेल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निखारा।
मयंक चक्रवर्ती आज केवल असम के ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। पूर्वोत्तर भारत के पहले ग्रैंडमास्टर के रूप में उनकी यह उपलब्धि उस क्षेत्र में शतरंज के प्रति एक नई क्रांति लेकर आएगी। मयंक का अगला लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप के मंच पर तिरंगा लहराना है।

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