मुरादाबाद में 19 महीनों में 17 अंतरधार्मिक शादियां, धर्म परिवर्तन से लेकर कानूनी प्रक्रिया तक जानिए पूरा मामला
इन मामलों ने एक बार फिर अंतरधार्मिक विवाह (Interfaith Marriage), धर्म परिवर्तन, परिवार की सहमति, बालिग व्यक्तियों की पसंद और विवाह के बाद पूरी की जाने वाली कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
कैसे सामने आए ये मामले?
मुरादाबाद में सामने आए मामलों में अलग-अलग युवक-युवतियों की परिस्थितियां अलग रही हैं। एक मामले में छजलैट की रहने वाली सहरीन खातून अंसारी की मुलाकात अकबरपुर सिहाली निवासी गौरव से हुई। बातचीत बढ़ने के बाद दोनों के बीच संबंध बने और उन्होंने विवाह का फैसला किया। अलग-अलग धर्म होने के कारण परिवार की ओर से संभावित विरोध के बीच दोनों घर से चले गए और मंदिर में विवाह किया।
विवाह के बाद दोनों पुलिस के सामने भी पहुंचे और अपनी बात रखी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों बालिग थे और उन्होंने अपनी इच्छा से विवाह करने की बात कही। इसके बाद दोनों के साथ रहने की जानकारी सामने आई है।एक अन्य मामले में भोजपुर के गौरव और ठाकुरद्वारा की नूर फातिमा के बीच बातचीत के बाद संबंध बने। दोनों ने विवाह करने का निर्णय लिया और अलग-अलग धर्म होने के बावजूद शादी की। रिपोर्टों के मुताबिक, विवाह के बाद दोनों साथ रह रहे हैं।
पुलिस ने क्या कहा?
मामले को लेकर मुरादाबाद के एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह का बयान भी सामने आया है। उनके मुताबिक पुलिस के समक्ष ऐसे कुछ मामले आए हैं, जिनमें युवक-युवतियों ने अलग-अलग धर्मों में विवाह किया। पुलिस ने संबंधित मामलों में न्यायालय के आदेश और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की।
पुलिस के अनुसार, जहां युवक-युवती बालिग हैं और अपनी इच्छा से विवाह करने की बात कहते हैं, वहां उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानूनी अधिकारों को ध्यान में रखा जाता है। हालांकि, किसी मामले में दबाव, जबरदस्ती, धोखाधड़ी या अन्य आपराधिक आरोप सामने आते हैं तो उसकी जांच कानून के अनुसार की जाती है।
देश में कितनी आम हैं अंतरधार्मिक शादियां?
मुरादाबाद के मामलों को देश के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखें तो अंतरधार्मिक विवाह अभी भी कुल विवाहों का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा हैं। विभिन्न सामाजिक सर्वेक्षणों और अध्ययनों में भारत में ऐसे विवाहों का अनुपात कम बताया गया है। कुछ अध्ययनों में यह आंकड़ा करीब 2 से 3 प्रतिशत के आसपास बताया गया है, हालांकि सर्वेक्षण की पद्धति और नमूने अलग होने के कारण आंकड़ों में अंतर हो सकता है।
उत्तर प्रदेश में भी अंतरधार्मिक विवाहों का अनुपात कुल विवाहों की तुलना में कम बताया जाता है। इसलिए मुरादाबाद में 19 महीनों के दौरान सामने आए 17 मामलों ने स्थानीय स्तर पर विशेष चर्चा जरूर पैदा की है, लेकिन इन्हें पूरे देश में अंतरधार्मिक विवाहों की सामान्य तस्वीर के रूप में नहीं देखा जा सकता।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
मुरादाबाद में इस तरह के विवाहों की खबरें पहले भी सामने आती रही हैं। जुलाई 2025 में नूर फातिमा और स्वालेहीन नाम की दो युवतियों के धर्म परिवर्तन के बाद हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किए जाने की खबरें सामने आई थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, विवाह के बाद उनके नाम क्रमशः नीलम और शालिनी रखे गए थे।हालांकि, ऐसे प्रत्येक मामले में परिस्थितियां अलग हो सकती हैं और किसी एक घटना के आधार पर सभी मामलों के बारे में एक समान निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
Consent और कानूनी प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण
अंतरधार्मिक विवाह से जुड़े मामलों में सबसे महत्वपूर्ण पहलू दोनों वयस्कों की स्वतंत्र सहमति (Consent) और कानून के तहत पूरी की गई प्रक्रिया है। यदि दोनों व्यक्ति बालिग हैं और अपनी इच्छा से विवाह करते हैं, तो उन्हें कानून द्वारा प्राप्त अधिकारों का संरक्षण मिलता है। वहीं, यदि किसी मामले में जबरदस्ती, दबाव, धमकी या धोखे का आरोप सामने आता है, तो संबंधित तथ्यों की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाती है।
मुरादाबाद के सामने आए 17 मामले इसलिए चर्चा में हैं क्योंकि इनमें धर्म परिवर्तन और अंतरधार्मिक विवाह दोनों पहलू जुड़े बताए जा रहे हैं। लेकिन प्रत्येक दंपती की कहानी, पारिवारिक परिस्थितियां और विवाह की प्रक्रिया अलग हो सकती है। ऐसे में पूरे मामले को केवल धार्मिक नजरिए से देखने के बजाय सहमति, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, पारिवारिक परिस्थितियों और कानूनी प्रक्रिया के संदर्भ में समझना अधिक उचित होगा।
