18% से 10% टैरिफ राहत या राजनीतिक बहस?

18% to 10% Tariff: Relief or Political Debate?
 
18% से 10% टैरिफ राहत या राजनीतिक बहस?
18% to 10% Tariff  :  भारत-अमेरिका व्यापार को लेकर हालिया घटनाक्रम ने नई चर्चा छेड़ दी है। एक तरफ टैरिफ दर में संभावित कटौती को बड़ी राहत माना जा रहा है, तो दूसरी ओर इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

अमेरिका में क्या हुआ?

अमेरिका में नीतिगत बदलावों के बाद पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने नए टैरिफ ढांचे की घोषणा की। इससे पहले भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर लगभग 18% टैरिफ लगने की आशंका जताई जा रही थी, जो अंतरिम व्यापार समझौते से जुड़ी चर्चाओं का हिस्सा था।

हालांकि ताजा स्थिति में भारत के लिए राहत की खबर आई है। नए संशोधित ढांचे के तहत भारत पर लागू टैरिफ दर घटकर करीब 10% रह गई है।इससे भारतीय निर्यातकों—खासकर टेक्सटाइल, फार्मा और इंजीनियरिंग उत्पादों—को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है।

 राहुल गांधी का हमला

इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला बोला है।राहुल गांधी ने सरकार की व्यापार रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत के हितों की बेहतर सुरक्षा होनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी पूछा कि टैरिफ को लेकर इतनी अनिश्चितता क्यों पैदा हुई और क्या सरकार ने पहले से पर्याप्त तैयारी नहीं की थी? उनके बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है, जहां एक पक्ष इसे कूटनीतिक सफलता बता रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे नीति में अस्थिरता का संकेत मान रहा है।

राहत या राजनीति?

विश्लेषकों का मानना है कि 18% से 10% टैरिफ पर आना निश्चित रूप से व्यापारिक दृष्टि से राहत है। लेकिन यह भी सच है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में अनिश्चितता और राजनीतिक दबाव दोनों साथ चलते हैं।आखिरकार सवाल यही है —क्या इसे भारत की कूटनीतिक जीत माना जाए या फिर यह एक अस्थायी राहत है जिस पर आगे और बातचीत बाकी है? फिलहाल इतना तय है कि टैरिफ दर में कमी से भारतीय निर्यातकों को तत्काल लाभ मिल सकता है, जबकि राजनीतिक बहस अभी जारी रहेगी।

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