1984 सिख नरसंहार: लखनऊ के नाका हिंडोला गुरुद्वारे में शहीदों की याद में भावुक अरदास; पीड़ितों के लिए सरकारी नौकरी और कड़े दंड की मांग

1984 Sikh Massacre: Emotional prayer service in memory of martyrs at Lucknow's Naka Hindola Gurudwara; demands raised for government jobs for victims and stringent punishment [for the perpetrators].
 
1984 Sikh Massacre: Emotional prayer service in memory of martyrs at Lucknow's Naka Hindola Gurudwara; demands raised for government jobs for victims and stringent punishment [for the perpetrators].

लखनऊ, 08 जून 2026:

वर्ष 1984 में हुए जून महीने के सैन्य ऑपरेशन (ऑपरेशन ब्लू स्टार) और उसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों में हुए सिख विरोधी दंगों व नरसंहार में शहीद हुए हजारों निर्दोष सिखों की याद में राजधानी लखनऊ में एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। शनिवार, 6 जून 2026 को श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा, नाका हिंडोला में आयोजित इस कार्यक्रम में भारी संख्या में सिख संगत ने एकत्र होकर शहीदों को नमन किया और उनके परिवारों के न्याय के लिए गुरु चरणों में अरदास की।

शबद कीर्तन और गुरमत विचारों से गूंजा दरबार हॉल

श्रद्धांजलि कार्यक्रम की शुरुआत बेहद भक्तिमय और भावुक माहौल में हुई:

  • पवित्र कीर्तन: प्रातः काल से ही गुरुद्वारा साहिब के मुख्य हॉल में रागी जत्था भाई गुरमुख सिंह जी ने श्री गुरु नानक देव जी द्वारा रचित पवित्र वाणी 'आसा दी वार' का रसभिना शबद कीर्तन गायन कर संगत को निहाल किया।

  • इतिहास की जानकारी: इसके पश्चात गुरुद्वारा साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी विनोद सिंह जी ने संगत के साथ गुरमत विचार सांझा किए। उन्होंने वर्ष 1984 के उस काले इतिहास और तत्कालीन दर्दनाक हालातों पर प्रकाश डालते हुए संगतों से भावुक अपील की। ज्ञानी जी ने कहा कि यदि हमारे आस-पास उस दौर का कोई भी पीड़ित परिवार रहता है, तो समाज के तौर पर हमें आगे बढ़कर उनकी हर संभव सामाजिक और आर्थिक मदद करनी चाहिए।

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हजारों निर्दोषों की 'चढ़दी कला' के लिए हुई अरदास

श्री गुरु सिंह सभा के महामंत्री सरदार मनमीत सिंह ने कार्यक्रम के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए बताया कि 1984 के इस भयानक नरसंहार में असमय काल के गाल में समा गए हजारों निर्दोष भाई-बहनों को याद करना और उनके परिवारों की सुख-शांति व 'चढ़दी कला' (उच्च हौसले/समृद्धि) की कामना करना ही इस श्रद्धांजलि सभा का मुख्य ध्येय है।

"दंगाइयों को अब तक फांसी न होना अफसोसजनक" — गुरुद्वारा प्रबंधन

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, गुरुद्वारा अध्यक्ष सरदार अमरजोत सिंह जी एवं कार्यालय सचिव सरदार दलजीत सिंह ने शहीदों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए न्याय प्रणाली और सरकारों पर तीखे सवाल उठाए।

प्रबंधन की मुख्य मांगें:

"इस कत्लेआम को बीते हुए दशकों गुजर चुके हैं, लेकिन यह बेहद अफसोसजनक और दुखद है कि निर्दोष सिखों के कातिलों और दंगाइयों को अब तक फांसी के फंदे तक नहीं पहुंचाया जा सका है। हमारी सरकार से पुरजोर मांग है कि इन मानवता के दुश्मनों को जल्द से जल्द कड़ा दंड दिया जाए। इसके साथ ही, प्रत्येक पीड़ित परिवार के कम से कम एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण सम्मानपूर्वक कर सकें।"

भावुक अरदास के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंतिम चरण में दरबार हॉल में उपस्थित पूरी संगत ने मुख्य ग्रंथी ज्ञानी विनोद सिंह जी की अगुवाई में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन चरणों में शीश नवाया। सभी ने दिवंगत आत्माओं की आत्मिक शांति, पीड़ित परिवारों को कानूनी व सामाजिक न्याय दिलाने और उनके बेहतर उज्ज्वल जीवन के लिए सामूहिक रूप से गुरु चरणों में अरदास की।

प्रमुख उपस्थित लोग:

इस ऐतिहासिक और भावुक श्रद्धांजलि सभा में मुख्य रूप से सरदार हरमिंदर सिंह (टीटू), सरदार सरबजीत सिंह, सरदार आज्ञा पाल सिंह, सरदार जसपाल सिंह, सरदार दविंदर पाल सिंह, सरदार राजेंद्र सिंह (पप्पू), सरदार गुरदीप सिंह भाटिया, सरदार अमनप्रीत सिंह, सरदार जसविंदर सिंह भाटिया और सरदार रनजीत सिंह सहित सिख समाज के कई गणमान्य लोग विशेष रूप से शामिल हुए।

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