लखनऊ में 22वां राष्ट्रीय पुस्तक मेला: 4 सितंबर से होगी शुरुआत
मेले की थीम और उद्देश्य
मेले के निदेशक आकर्ष चंदेल के अनुसार “विजन 2047” थीम युवाओं को एक नए भारत और विकसित प्रदेश की ओर प्रेरित करने का संदेश देती है। यह आयोजन केवल पुस्तक मेला ही नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा में चिंतन और संवाद का मंच भी है।
भव्य आयोजन की झलक
करीब 75 हजार वर्ग फीट में फैले इस विशाल मेले में 50 से अधिक प्रतिष्ठित प्रकाशक भाग ले रहे हैं।
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120 से ज्यादा स्टॉल लगाए जाएंगे।
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हजारों पुस्तकें – हिंदी, अंग्रेज़ी और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध रहेंगी।
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साहित्य, शैक्षणिक सामग्री, बाल साहित्य और दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह आकर्षण का केंद्र होगा।
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प्रवेश निशुल्क रहेगा, ताकि अधिक से अधिक लोग साहित्य की इस यात्रा में शामिल हो सकें।
आयोजकों की सोच
मेला संयोजक मनोज सिंह चंदेल का कहना है –
“यह केवल पुस्तक मेला नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कृति का उत्सव है। हर आयु वर्ग और हर रुचि के पाठकों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न प्रकाशन और गतिविधियाँ तैयार की गई हैं।”
साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम
मेले में पाठकों और लेखकों को जोड़ने वाले अनेक कार्यक्रम होंगे –
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लेखक सत्र और पैनल चर्चाएँ – नामी और नए लेखकों के साथ विचार-विमर्श।
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कवि सम्मेलन और मुशायरा – साहित्यिक परंपराओं का आनंद।
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पुस्तक विमोचन – नई पुस्तकों की शुरुआत का उत्सव।
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बच्चों का कोना – कहानी सत्र, प्रतियोगिताएँ और गतिविधियाँ।
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युवाओं के लिए विशेष कोना – प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक आयोजन।
पाठकों के लिए विशेष आकर्षण
मेले में खरीदी गई हर पुस्तक पर कम से कम 10% छूट दी जाएगी। यही वजह है कि यह मेला हर साल हजारों पुस्तक प्रेमियों को आकर्षित करता है और साहित्य की दुनिया में डूबने का अवसर देता है।
