5G नेटवर्क स्लाइसिंग विवाद: एयरटेल ने DoT के सामने किया 'प्रायोरिटी पोस्टपेड' का बचाव, कहा— नियमों के तहत है सर्विस

5G Network Slicing Controversy: Airtel Defends 'Priority Postpaid' Before DoT, States—Service Complies with Regulations
 
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Airtel Net Neutrality Clarification: दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारती एयरटेल (Bharti Airtel) ने डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) के समक्ष अपनी नई "प्रायोरिटी पोस्टपेड" सेवा को लेकर उठ रहे सवालों पर स्थिति साफ की है। डूटी (DoT) के एक पैनल के सामने अपना पक्ष रखते हुए एयरटेल ने स्पष्ट किया कि 5G नेटवर्क स्लाइसिंग (Network Slicing) तकनीक पर आधारित यह सर्विस किसी भी तरह से नेट न्यूट्रैलिटी (Net Neutrality) के सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं करती है। इसके साथ ही कंपनी ने प्रीपेड उपयोगकर्ताओं (Prepaid Users) की इंटरनेट क्वालिटी पर किसी भी तरह का नकारात्मक असर पड़ने के दावों को सिरे से खारिज कर दिया।

संसदीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी समिति द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण पर एयरटेल ने तर्क दिया कि यदि टेलीकॉम कंपनियों को 5G की कोर तकनीकों और मुख्य फीचर्स का व्यावसायिक इस्तेमाल करने से रोका गया, तो इसका सीधा असर भविष्य में देश के भीतर 6G तकनीकों के विकास और उसकी अपार संभावनाओं पर पड़ेगा।

"हमारी सर्विस पूरी तरह कंटेंट-न्यूट्रल है" — एयरटेल

नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों को लेकर रेगुलेटर की चिंताओं को दूर करते हुए भारती एयरटेल ने अपने लिखित जवाब में कहा प्रायोरिटी पोस्टपेड योजना को पूरी तरह से 'कंटेंट-न्यूट्रल' (सामग्री के प्रति तटस्थ) ढांचे के तहत तैयार किया गया है। यह सर्विस भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) और डूटी (DoT) के मौजूदा नियमों और दिशा-निर्देशों के शत-प्रतिशत अनुकूल है। इस व्यवस्था में किसी भी विशेष मोबाइल एप्लीकेशन को ब्लॉक करना, डेटा स्पीड को थ्रॉटल (कम) करना, कंटेंट के आधार पर पक्षपात करना या जीरो-रेटिंग जैसा कोई भी तरजीही लाभ देना शामिल नहीं है।"

आंकड़ों से समझिए: प्रीपेड ग्राहकों को क्यों नहीं होगी दिक्कत?

एयरटेल ने पिछले सप्ताह 19 मई को अपने पोस्टपेड सेगमेंट के लिए इस खास सर्विस की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य भीड़भाड़ वाले और व्यस्त बाजारों में भी ग्राहकों को एक समान और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करना है। इस सर्विस से आम प्रीपेड ग्राहकों को कोई नुकसान नहीं होने के पीछे कंपनी ने नेटवर्क क्षमता (Capacity) का पूरा गणित सामने रखा है:

  • करंट नेटवर्क लोड: वर्तमान में पीक आवर्स (सबसे व्यस्त समय) के दौरान एयरटेल की कुल 5G क्षमता का केवल 38 प्रतिशत हिस्सा ही इस्तेमाल में आता है।

  • पोस्टपेड का मामूली ट्रैफिक: इस कुल उपयोग में पोस्टपेड ग्राहकों का ट्रैफिक महज 4 प्रतिशत है। 'प्रायोरिटी पोस्टपेड' के लिए एक वर्चुअल "टनल" (स्लाइस) रिजर्व करने के बाद भी यह ट्रैफिक बढ़कर अधिकतम 6 प्रतिशत तक ही पहुंचेगा।

  • प्रीपेड के लिए भारी स्पेस: कंपनी ने साफ किया कि इस पूरी प्रक्रिया के बाद भी प्रीपेड और अन्य सामान्य (नॉन-प्रायोरिटी) ट्रैफिक के लिए कुल नेटवर्क क्षमता का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा हमेशा खाली और सुरक्षित (Headroom) रहेगा। इसलिए आम यूजर्स की इंटरनेट स्पीड या सर्विस क्वालिटी घटने का कोई व्यावहारिक कारण नहीं है।

 एयरटेल ने रेगुलेटरी पैनल को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि नेटवर्क स्लाइसिंग केवल एक एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट है, न कि ग्राहकों के बीच कोई भेदभाव। अब इस मामले पर डूटी (DoT) और ट्राई (TRAI) की अगली प्रतिक्रिया पर पूरे टेलीकॉम सेक्टर की नजरें टिकी हुई हैं।

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