75 साल की महिला को बिना दोबारा ओपन हार्ट सर्जरी के मिला नया माइट्रल वाल्व, कैथेटर से हुआ सफल इलाज

15 साल पुराने खराब वाल्व के अंदर ही लगाया गया नया वाल्व, करीब 45 मिनट में पूरी हुई प्रक्रिया
 
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लखनऊ डेस्क, आर.एल. पाण्डेय। मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों ने 75 वर्षीय महिला के खराब हो चुके माइट्रल वाल्व का इलाज बिना दोबारा ओपन हार्ट सर्जरी किए सफलतापूर्वक किया। मरीज के पुराने वाल्व के अंदर ही कैथेटर के माध्यम से नया वाल्व प्रत्यारोपित किया गया। करीब 45 मिनट में पूरी हुई इस प्रक्रिया के बाद मरीज की सांस लेने की समस्या में तेजी से सुधार हुआ।

मरीज को डायबिटीज, छाती में संक्रमण और करीब 15 दिन तक आईसीयू में रहने का इतिहास था। ऐसे में दोबारा ओपन हार्ट सर्जरी करना उनके लिए काफी जोखिम भरा माना जा रहा था।

15 साल पहले हुआ था वाल्व रिप्लेसमेंट

डॉ. पीके गोयल, डायरेक्टर, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, मेदांता अस्पताल ने बताया कि महिला की करीब 15 वर्ष पहले माइट्रल वाल्व की सर्जरी हुई थी और उस दौरान कृत्रिम वाल्व लगाया गया था। समय बीतने के साथ यह वाल्व खराब हो गया और ठीक से काम करना बंद कर दिया।

इसके कारण मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगी थी और उनके दिल पर दबाव भी बढ़ रहा था। उम्र और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए दोबारा ओपन हार्ट सर्जरी का जोखिम काफी अधिक था।

पुराने वाल्व के अंदर ही लगाया नया वाल्व

विशेषज्ञों की टीम ने मरीज के लिए ट्रांसकैथेटर माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट (TMVR) का विकल्प चुना। इस प्रक्रिया की खासियत यह है कि पुराने खराब वाल्व को निकालने के लिए छाती खोलने की जरूरत नहीं पड़ती। नया वाल्व मौजूदा वाल्व के अंदर ही प्रत्यारोपित किया जाता है।

डॉ. गोयल के अनुसार, करीब 5 मिलीमीटर मोटे एक पतले कैथेटर को पैर की नस के रास्ते हृदय तक पहुंचाया गया। इकोकार्डियोग्राफी और एक्स-रे इमेजिंग की सहायता से नए वाल्व को पुराने वाल्व के अंदर सही स्थान पर स्थापित किया गया। पूरी प्रक्रिया लगभग 45 मिनट में पूरी हुई और मरीज को थोड़े समय के लिए एनेस्थीसिया दिया गया।

प्रक्रिया के बाद सांस लेने में हुआ सुधार

इलाज के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिला। फेफड़ों में जमा तरल पदार्थ और हृदय पर पड़ रहा दबाव कम हुआ, जिससे उनकी सांस लेने की परेशानी भी बेहतर हुई।

डॉक्टरों के मुताबिक, मरीज ऐसी स्थिति में पहुंच चुकी थीं जहां उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता पड़ सकती थी। लेकिन प्रक्रिया के बाद वह अब बिना किसी सहायता के आराम से सांस ले रही हैं और उनकी हालत स्थिर एवं अच्छी है। उन्हें जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद है।

ज्यादा जोखिम वाले मरीजों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प

डॉ. गोयल ने बताया कि TMVR उन मरीजों के लिए महत्वपूर्ण उपचार विकल्प बन सकता है, जिनके लिए दोबारा ओपन हार्ट सर्जरी का जोखिम अधिक होता है। हालांकि, इसके लिए मरीज का उचित चयन और विशेषज्ञों की टीम द्वारा विस्तृत जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि उपयुक्त मरीजों में इस तरह की कैथेटर-आधारित प्रक्रिया के जरिए बिना छाती खोले खराब माइट्रल वाल्व का उपचार किया जा सकता है।

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