नव निर्माण के 9 वर्ष: पर्यटन का सिरमौर बना उत्तर प्रदेश, रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे पर्यटक
पर्यटन नीति-2022 से बदली तस्वीर
उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 के प्रभावी क्रियान्वयन, बेहतर कनेक्टिविटी, एयरपोर्ट, एक्सप्रेस-वे, मजबूत कानून व्यवस्था और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार ने पर्यटन को नई गति दी है। भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ ने भी अपने अध्ययन में राज्य की ‘टेंपल इकॉनमी’ मॉडल की सराहना की है।
रिकॉर्ड पर्यटक संख्या, सात गुना वृद्धि
वर्ष 2017 में जहां प्रदेश में 23.75 करोड़ पर्यटक आए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 64.91 करोड़ हो गई। COVID-19 के दौरान गिरावट के बावजूद तेजी से रिकवरी हुई। वर्ष 2025 में महाकुंभ 2025 के आयोजन के साथ यह आंकड़ा 156.18 करोड़ तक पहुंच गया। वर्तमान में राष्ट्रीय पर्यटन में यूपी की हिस्सेदारी 21.9% हो चुकी है।
5 लाख से अधिक रोजगार सृजन
पर्यटन नीति के तहत ₹36,681 करोड़ निवेश और 1,684 से अधिक पर्यटन इकाइयों के पंजीकरण से प्रदेश में 5 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। इसमें महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।
टूरिस्ट सर्किट और तीर्थ विकास
अयोध्या, वाराणसी, मथुरा और प्रयागराज जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं का व्यापक विकास हुआ है। प्रदेश में रामायण, कृष्ण, बौद्ध, जैन, सूफी और स्वतंत्रता संग्राम सहित 12 से अधिक टूरिस्ट सर्किट विकसित किए गए हैं, वहीं 83 धार्मिक मार्गों का चौड़ीकरण भी किया गया है।
सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास
लखनऊ में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, कौशांबी में संग्रहालय, मेरठ में 1857 संग्राम संग्रहालय और गोरखपुर में शहीद स्मारक जैसे प्रोजेक्ट्स ने सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ पर्यटन को बढ़ावा दिया है।
इको-टूरिज्म और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य और पीलीभीत टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में 49 इको-टूरिज्म परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इसके साथ ही 234 गांवों को ग्रामीण पर्यटन के लिए चयनित किया गया है।
‘टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनमी’ बना गेमचेंजर
अयोध्या में राम मंदिर, वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर और प्रयागराज में कुंभ- महाकुंभ जैसे आयोजनों ने पर्यटन को नई ऊंचाई दी है। दीपोत्सव अयोध्या, देव दीपावली वाराणसी और ब्रज होली महोत्सव जैसे उत्सव वैश्विक आकर्षण बन चुके हैं।
वैश्विक स्पिरिचुअल हब की ओर यूपी
पर्यटन के क्षेत्र में लगातार बढ़ते निवेश, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सांस्कृतिक आयोजनों के कारण उत्तर प्रदेश अब न केवल देश में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी आध्यात्मिक पर्यटन का केंद्र बनता जा रहा है। यही कारण है कि आज यूपी घरेलू पर्यटन में राजस्थान, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों को पीछे छोड़कर शीर्ष स्थान पर पहुंच चुका है।
