25 महीने से वेतन का इंतजार कर रहे रांची विश्वविद्यालय के 96 अतिथि शिक्षक, दिवाली पर बच्चों की खुशियों पर भी संकट
बेटी के पटाखे खरीदने की जिद के सामने बेबस पिता की कहानी ने उठाए कई सवाल, राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन से शिक्षकों के अधिकारों पर आवाज उठाने की मांग
रांची। गरीबों के अधिकार, सामाजिक न्याय और संविधान की बात करने वाले राजनीतिक दलों के सामने झारखंड के रांची विश्वविद्यालय के 96 अतिथि शिक्षकों का मामला एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। दावा है कि इन शिक्षकों को पिछले 25 महीनों से वेतन नहीं मिला है। वे दूसरों के बच्चों का भविष्य संवारने में जुटे हैं, लेकिन उनके अपने परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
दिवाली जैसे खुशियों के त्योहार पर इन परिवारों की परेशानी और भी गहरी हो जाती है। जब बाजार रोशनी से जगमगा रहे हैं, घरों में दीप जल रहे हैं और बच्चे पटाखों के साथ त्योहार मनाने की तैयारी कर रहे हैं, तब इन शिक्षकों के घरों में आर्थिक मजबूरी का अंधेरा छाया हुआ है।
'पापा, सबके पापा पटाखे लाए हैं, आप कब लाओगे?'
इन शिक्षकों की आर्थिक स्थिति को बयां करने वाला एक भावुक प्रसंग सामने आया है। एक छोटी बच्ची अपने पिता से बार-बार पूछती है कि जब दूसरे बच्चों के पिता उनके लिए पटाखे लेकर आए हैं, तो उसके पापा पटाखे कब लाएंगे?
बेटी के इस मासूम सवाल का जवाब देना पिता के लिए बेहद मुश्किल हो रहा है। वह हर बार उसे कल पटाखे लाने का भरोसा देते हैं, लेकिन खुद नहीं जानते कि वह कल कब आएगा। वजह यह है कि पिछले 25 महीनों से उन्हें वेतन नहीं मिला है।यह केवल एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि उन 96 अतिथि शिक्षकों और उनके परिवारों की आर्थिक चुनौतियों की ओर इशारा करता है, जो लंबे समय से अपने मेहनताने का इंतजार कर रहे हैं।
राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन से उठे सवाल
इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनके सहयोगी विपक्षी दलों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सवाल है कि संविधान, सामाजिक न्याय और गरीबों के अधिकारों की बात करने वाले राजनीतिक नेताओं का ध्यान इन शिक्षकों की समस्याओं की ओर कब जाएगा? यदि 96 शिक्षक वास्तव में 25 महीनों से वेतन से वंचित हैं, तो यह उनके साथ-साथ उनके परिवारों की आजीविका और बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
शिक्षकों को कब मिलेगा उनका हक?
शिक्षक समाज के निर्माण और नई पीढ़ी का भविष्य संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में लंबे समय तक वेतन नहीं मिलना उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। अब सवाल यह है कि रांची विश्वविद्यालय के इन 96 अतिथि शिक्षकों को उनका बकाया वेतन कब मिलेगा? विश्वविद्यालय प्रशासन और झारखंड सरकार इस दिशा में क्या कदम उठाएंगे?
गरीब परिवार के बच्चे की दिवाली की खुशियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितनी किसी संपन्न परिवार के बच्चे की। शिक्षकों को सम्मान देने के साथ उनके श्रम का उचित भुगतान सुनिश्चित करना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
