29 वर्षीय महिला के गर्भाशय को बचाकर निकाला 3.5 किलो का ट्यूमर, सिविल अस्पताल में जटिल सर्जरी सफल
लखनऊ। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल चिकित्सालय, लखनऊ में चिकित्सकों ने एक 29 वर्षीय महिला की जटिल सर्जरी कर करीब 3.5 किलोग्राम वजन का बड़ा ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया। इस ऑपरेशन में चिकित्सकों के सामने चुनौती केवल ट्यूमर को हटाने की नहीं, बल्कि किडनी और गर्भाशय को सुरक्षित रखते हुए महिला की भविष्य में मां बनने की संभावना को बनाए रखने की भी थी।
चिकित्सालय के अनुसार, महिला काफी समय से पेट के निचले हिस्से में दर्द और सूजन से परेशान थीं। उन्होंने कई प्रतिष्ठित चिकित्सकों से परामर्श लिया, लेकिन मामले की जटिलता और प्रजनन क्षमता को सुरक्षित रखने की चुनौती के कारण सर्जरी करना कठिन माना गया।
सीटी स्कैन में सामने आई गंभीर स्थिति
सिविल चिकित्सालय की शल्य विभाग की ओपीडी में विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद मिश्रा ने मरीज की विस्तृत जांच कराई। सीटी स्कैन में पेट के भीतर एक बहुत बड़ा और जटिल ट्यूमर पाया गया, जो आसपास के महत्वपूर्ण अंगों और रक्त वाहिकाओं पर दबाव डाल रहा था।
ट्यूमर के दबाव के कारण यूरेटर (मूत्रवाहिनी) पर भी गंभीर असर पड़ा था। पेशाब के प्रवाह में बाधा उत्पन्न होने से किडनी में सूजन बढ़ गई थी। ट्यूमर का दबाव अंडाशय तथा आसपास की अन्य संरचनाओं पर भी पड़ रहा था।
मरीज को गंभीर एनीमिया भी था और उनका हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 6.3 ग्राम/डेसीलीटर था। ऑपरेशन से पहले उनकी स्थिति को सुरक्षित बनाने के लिए उन्हें तीन यूनिट रक्त चढ़ाया गया।
गर्भाशय से कई गुना बड़ा था ट्यूमर
चिकित्सकों के मुताबिक, मरीज का गर्भाशय लगभग 7×6 सेंटीमीटर का था, जबकि ट्यूमर का आकार करीब 35×20×15 सेंटीमीटर तक पहुंच गया था। इसका वजन लगभग 3.5 किलोग्राम था।
ट्यूमर की स्थिति अत्यंत जटिल होने के कारण ऑपरेशन के दौरान आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं को नुकसान से बचाना बड़ी चुनौती थी। चिकित्सकों ने अत्यंत सावधानी के साथ ब्रॉड लिगामेंट मायोमेक्टॉमी (Broad Ligament Myomectomy) की प्रक्रिया के जरिए ट्यूमर को अलग कर सफलतापूर्वक निकाल दिया।
ऑपरेशन के दौरान गर्भाशय और महत्वपूर्ण आसपास की संरचनाओं को सुरक्षित रखा गया। अस्पताल के अनुसार, मरीज अब स्वस्थ है और उसकी प्रजनन क्षमता को बनाए रखने का प्रयास सफल रहा है।
शल्य टीम की रही महत्वपूर्ण भूमिका
सर्जरी में शल्य विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद मिश्रा के साथ जूनियर रेजिडेंट डॉ. विनोद कुमार वर्मा और डॉ. सचिन कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. एस.के. सिंह एवं डॉ. मोहम्मद कासिम शामिल रहे। ओटी असिस्टेंट श्रीमती मीनकर और श्री सुदेश कुमार ने भी सहयोग किया।
चिकित्सालय के निदेशक डॉ. जी.पी. गुप्ता ने जटिल सर्जरी की सफलता पर शल्य विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद मिश्रा और उनकी पूरी टीम को बधाई दी।
लगातार दर्द और सूजन को नजरअंदाज न करें
डॉ. आनंद मिश्रा ने कहा कि ऐसे जटिल मामलों में समय पर चिकित्सकीय परामर्श, उचित जांच, सही निदान और विशेषज्ञ शल्य उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द, असामान्य सूजन, गांठ या पेशाब संबंधी परेशानी को नजरअंदाज न करें और समय रहते योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।
निदेशक डॉ. जी.पी. गुप्ता ने कहा कि चिकित्सालय में मरीजों के हित को प्राथमिकता देते हुए उपचार सेवाओं को लगातार बेहतर किया जा रहा है।
सप्ताह में तीन दिन चल रही डिजिटल सुपर स्पेशियलिटी ओपीडी
सिविल चिकित्सालय में डिजिटल सुपर स्पेशियलिटी ओपीडी भी सप्ताह में तीन दिन संचालित की जा रही है। अस्पताल के अनुसार, बृहस्पतिवार को न्यूरोलॉजी, शुक्रवार को कार्डियोलॉजी और शनिवार को नेफ्रोलॉजी की ओपीडी में डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर स्तर के चिकित्सक मरीजों को परामर्श और उपचार प्रदान कर रहे हैं। अस्पताल का कहना है कि इस सुविधा से बड़ी संख्या में मरीज लाभान्वित हो रहे हैं।
सुनील यादव
चीफ फार्मेसिस्ट
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल चिकित्सालय, लखनऊ
