एक पिता देश के लिए शहीद हुआ, तो बेटी को विदा करने 31 पिता पहुंच गए... BSF जवानों ने निभाया ऐसा रिश्ता, हर आंख हुई नम

When a father was martyred for the nation, 31 fathers stepped forward to see his daughter off... BSF personnel forged such a bond that it brought tears to everyone’s eyes.
 
bhh
देश की रक्षा करते हुए शहीद होने वाले जवानों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। लेकिन उनके परिवार के प्रति साथी जवानों का प्रेम और अपनापन भी किसी मिसाल से कम नहीं होता। ऐसी ही एक भावुक कर देने वाली घटना ने हर किसी का दिल जीत लिया।


साल 2007 में रफीक अहमद श्रीलंका में देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे। उस समय उनकी बेटी बहुत छोटी थी। वक्त बीतता गया और करीब 20 साल बाद वही बेटी दुल्हन बनकर अपने नए जीवन की शुरुआत करने जा रही थी। जिंदगी के इस सबसे खास मौके पर उसके सिर पर पिता का हाथ नहीं था और न ही बेटी को आशीर्वाद देने के लिए उसके पिता मौजूद थे।


लेकिन इस कमी को कुछ हद तक पूरा करने के लिए ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं।


रफीक अहमद की 35वीं बटालियन BSF के 31 साथी जवान उनकी बेटी की शादी में पहुंचे। ये जवान केवल शादी में शामिल होने वाले मेहमान नहीं थे, बल्कि अपने शहीद साथी के परिवार की जिम्मेदारी निभाने आए थे। उन्होंने शादी की हर रस्म में परिवार की तरह साथ दिया और आखिरी मेहमान के विदा होने तक वहां मौजूद रहे।


जब बेटी की विदाई का वक्त आया तो इन जवानों ने उसे प्यार, आशीर्वाद और ढेरों दुआओं के साथ विदा किया। उन्होंने बेटी और उसकी मां को यह एहसास कराया कि रफीक अहमद भले ही आज उनके बीच नहीं हैं, लेकिन उनके साथी आज भी परिवार बनकर उनके साथ खड़े हैं।


यह सिर्फ एक शादी में शामिल होने की कहानी नहीं, बल्कि उन रिश्तों की मिसाल है जो वर्दी, देशभक्ति और भाईचारे से बनते हैं।


एक पिता देश के लिए शहीद हो गया, लेकिन जब उसकी बेटी की विदाई का वक्त आया तो 31 पिता बनकर उसके साथी जवान पहुंच गए। ऐसे जांबाज जवानों को दिल से सलाम।
जय हिंद! 🇮🇳🫡

Tags