लखनऊ में मशहूर शायर बशीर बद्र की याद में भावपूर्ण शोक सभा; साहित्य और राजनीति जगत की हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि
लखनऊ (अदब और संस्कृति डेस्क), 31 मई 2026: राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित प्रतिष्ठित यू.पी. प्रेस क्लब में 'इत्तेहाद ए मिल्लत' के तत्वावधान में देश के प्रख्यात और कालजयी शायर बशीर बद्र की याद में एक अत्यंत भावुक शोक सभा का आयोजन किया गया। इस सभा का कुशल संचालन पी. के. तिवारी ने किया, जबकि इसका संयोजन सिराज मेंहदी, इंसराम अली और सर्वेश अस्थाना द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक शोक सभा नहीं था, बल्कि गंगा-जमुनी तहज़ीब, इंसानियत और उस बेपनाह मोहब्बत के दौर को याद करने का जरिया था, जिसे बशीर बद्र ने अपनी लेखनी से सींचा था। इस श्रद्धांजलि सभा में लखनऊ के नामचीन शायरों, विभिन्न राजनैतिक दलों के नेताओं, वरिष्ठ पत्रकारों, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों और बड़ी संख्या में अदब पसंद नागरिकों ने शिरकत कर दिवंगत शायर को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
मोहब्बत और भाईचारे का वैश्विक पैगाम थे बशीर बद्र
सभा को संबोधित करते हुए आयोजन समिति के मुख्य पदाधिकारियों ने बशीर बद्र के साहित्यिक कद और उनकी शख्सियत को याद किया:
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पूर्व सांसद सिराज मेंहदी ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा: "बशीर बद्र साहब उर्दू अदब का वह बुलंद परचम थे, जिन्होंने अपनी शायरी के जरिए पूरी दुनिया में सिर्फ और सिर्फ मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम फैलाया। उनके लिखे अशआर आज आम और खास, हर शख्स के दिलों की धड़कन हैं। उनका जाना पूरे साहित्यिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।"
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वरिष्ठ नेता इंसराम अली ने कहा: "बशीर साहब का रुखसत होना सिर्फ उर्दू शायरी का नुकसान नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे मुल्क की साझी सांस्कृतिक विरासत का एक बड़ा घाव है। उन्होंने समाज को हमेशा सौहार्द का रास्ता दिखाया। ईश्वर उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए।"
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विख्यात कवि और साहित्यकार सर्वेश अस्थाना ने भावुक शब्दों में कहा: "बशीर बद्र जी शब्दों के ऐसे जादूगर थे जिन्होंने इंसानी संवेदनाओं को नए आयाम दिए। उनकी ग़ज़लों में जीवन का यथार्थ, प्रेम की पाकीजगी और रिश्तों की गर्माहट साफ महसूस होती है। उनके जाने से शायरी का एक स्वर्णिम अध्याय भले ही बंद हो गया हो, लेकिन उनके अल्फाज़ उन्हें हमेशा अमर रखेंगे।"
नम आंखों से शायरों ने पढ़े उनके मशहूर अशआर
शोक सभा के दौरान माहौल उस समय बेहद गमगीन हो गया जब उपस्थित कई शायरों और प्रशंसकों ने बशीर बद्र की याद में उनकी ही लिखी मशहूर ग़ज़लों और अशआर का पाठ किया। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि बशीर बद्र भाषा, मजहब और सरहदों के बंधनों से परे करोड़ों दिलों की आवाज थे।
सभा के समापन पर वहां मौजूद सभी गणमान्य जनों ने दो मिनट का मौन धारण कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और इस बात पर जोर दिया कि उनकी साहित्यिक विरासत आने वाली नस्लों का हमेशा मार्गदर्शन करती रहेगी।
शोक सभा में उपस्थित रहे प्रमुख प्रबुद्ध जन
इस ऐतिहासिक श्रद्धांजलि सभा में उत्तर प्रदेश की राजनीति और साहित्य जगत के कई बड़े चेहरे एक साथ नजर आए, जिनमें मुख्य रूप से: पूर्व मंत्री डॉ. अम्मार रिज़वी, सुरेश बहादुर सिंह, अशोक सिंह, मुईद अहमद, प्रोफेसर रमेश दीक्षित, अमीर हैदर, अनीस अंसारी, प्रोफेसर साबिरा हबीब, डॉ. सुमन दुबे, अमीक जामेई, अज़ीज़ सिद्दीकी, अब्दुल वहीद, हसन काज़मी, शब्बू कुरैशी, मेंहदी हसन, आसिफ जाफरी, नावेद शिकोह, मिथिलेश लखनवी, नदीम अशरफ जायसी, दाऊद अहमद, मोहम्मद नासिर, शम्सी आज़ाद, आसिफ, कमर खान, आफताब अहमद और शहरयार सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

