शाही विरासत का नया रूप: लखनऊ में सजी 'मेहरुनिसा' की ज्वेलरी प्रदर्शनी, परंपरा और आधुनिकता का दिखा संगम
विरासत को मिला आधुनिक विस्तार
इस प्रदर्शनी की सबसे बड़ी विशेषता पुराने राजसी डिजाइनों को नए और ताज़ा अंदाज में पेश करना है। पारंपरिक कला को आज की आधुनिक महिलाओं की पसंद के अनुरूप ढालते हुए, क्लासिक लुक को एक समकालीन मोड़ दिया गया है।
तीन दशकों का सफर और बेजोड़ कारीगरी
मेहरुनिसा की संस्थापक और डिजाइनर श्रीमती शमिता शर्मा पिछले 30 वर्षों से भारतीय आभूषण कला को वैश्विक पहचान दिला रही हैं। उनका मुख्य फोकस पारंपरिक पोल्की और जड़ाऊ आभूषणों को पुनर्जीवित करना है।
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विशेषज्ञता: शमिता अपनी कलात्मक ब्राइडल ज्वेलरी और स्टेटमेंट पीसेस के लिए विशेष रूप से जानी जाती हैं।
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अनुभव: भारत और विदेशों में आयोजित होने वाली उनकी प्रदर्शनियाँ शाही शिल्पकला और टाइमलेस क्लासिक डिजाइनों का प्रमाण रही हैं।
डिजाइनर की सोच: "हर गहना एक कहानी है"
प्रदर्शनी के उद्घाटन पर शमिता शर्मा ने अपनी कलात्मक यात्रा को साझा करते हुए कहा:
"मेहरुनिसा में हर गहना सिर्फ एक आभूषण नहीं, बल्कि एक कहानी है जो अतीत को आज से जोड़ती है। मेरा प्रयास है कि हमारी पुरानी विरासत न केवल जीवित रहे, बल्कि आज की महिलाओं के जीवन का भी खास हिस्सा बने।"
प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षण:
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ब्राइडल और एंटीक कलेक्शन: दुल्हनों के लिए खास पोल्की ज्वेलरी, एंटीक गोल्ड और जड़ाऊ संग्रह।
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डायमंड और स्टेटमेंट पीस: हीरों से जड़े कलात्मक आभूषण जो हर अवसर को खास बनाते हैं।
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एवरीडे वियर: रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए हल्के और खूबसूरत गहनों की एक विस्तृत रेंज।
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पर्सनल स्टाइलिंग: यहाँ आने वाले मेहमानों को स्वयं डिजाइनर शमिता शर्मा से बातचीत करने और स्टाइलिंग टिप्स लेने का विशेष अवसर मिल रहा है।
शिल्प कला का संरक्षण और शुद्धता
मेहरुनिसा ब्रांड न केवल गहने बनाता है, बल्कि जड़ाऊ, पोल्की और हाथ की बारीक नक्काशी जैसी लुप्त होती कलाओं को जीवित करने के लिए नए कारीगरों को प्रशिक्षित भी कर रहा है। गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखते हुए, प्रदर्शनी का हर आभूषण हॉलमार्क्ड गोल्ड और प्रमाणित स्टोन्स (Certified Stones) से तैयार किया गया है।
