पापा आप जीत गए कानपुर कचहरी में युवा वकील ने किया सुसाइड, दो पन्नों के नोट में बयां किया बचपन का दर्द

Papa, you have won. Young lawyer commits suicide in Kanpur court, expresses childhood pain in two-page note.
 
पापा आप जीत गए कानपुर कचहरी में युवा वकील ने किया सुसाइड, दो पन्नों के नोट में बयां किया बचपन का दर्द
कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ कचहरी की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर एक प्रशिक्षु अधिवक्ता (ट्रेनी वकील) प्रियांशु श्रीवास्तव ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। प्रियांशु की मौत से ज्यादा, उसके द्वारा छोड़े गए दो पन्नों के सुसाइड नोट ने व्यवस्था और पारिवारिक रिश्तों के बीच छिपे मानसिक तनाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुसाइड नोट में छलका बरसों का दर्द

प्रियांशु ने अपने सुसाइड नोट में विस्तार से उन कारणों का जिक्र किया है, जिन्होंने उसे इस घातक कदम को उठाने के लिए मजबूर किया। उसने नोट की शुरुआत में ही यह गुजारिश की कि जो भी इसे देखे, वह अंत तक जरूर पढ़े।

  • पिता से दूरी: प्रियांशु ने अपने पिता राजेंद्र कुमार के प्रति गहरा आक्रोश और दुख व्यक्त किया है। उसने लिखा, "ऐसे पिता भगवान किसी को भी न दे।"

  • बचपन की वह कड़वी याद: सुसाइड नोट के मुताबिक, प्रियांशु जब मात्र 6 साल का था, तब फ्रिज से मैंगोशेक पीने जैसी छोटी सी बात पर पिता ने उसे निर्वस्त्र कर घर से बाहर निकाल दिया था। प्रियांशु ने लिखा कि वह शर्मिंदगी उसके मन में ऐसी बैठी कि वह कभी उबर नहीं पाया।

  • मानसिक प्रताड़ना: नोट में आगे लिखा गया कि पढ़ाई का दबाव और पिटाई तो फिर भी सहन करने लायक थी, लेकिन हर पल शक की निगाहों से देखना और एक-एक मिनट का हिसाब मांगना उसके लिए मानसिक टॉर्चर (Mental Torture) बन गया था।

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"मेरी लाश को हाथ न लगाएँ पिता"

सुसाइड नोट का सबसे भावुक हिस्सा वह था जहाँ प्रियांशु ने अपने पिता के लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उसने लिखा: "पापा, तुम जीत गए... तुम्हें तुम्हारी जीत मुबारक हो। मेरी आखिरी इच्छा है कि मेरे पिता मेरे शव को हाथ भी न लगा पाएं।"

प्रियांशु के इन शब्दों से स्पष्ट है कि पिता और पुत्र के रिश्तों में कड़वाहट इस हद तक बढ़ चुकी थी कि उसे मौत, जिंदगी से ज्यादा आसान लगने लगी।

कचहरी परिसर में शोक की लहर

दिनदहाड़े कचहरी जैसी सुरक्षित जगह पर हुई इस घटना से साथी अधिवक्ताओं और वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और सुसाइड नोट के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।

यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों के साथ बचपन में किया गया व्यवहार उनके भविष्य के मानसिक स्वास्थ्य को किस कदर प्रभावित कर सकता है। अनुशासन और डर के बीच की महीन रेखा जब टूटती है, तो परिणाम ऐसे ही दुखद होते हैं।

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