स्वास्थ्य क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत': संक्रमण नियंत्रण के लिए NRDC और SS Medical Systems के बीच बड़ी साझेदारी
प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में हुआ समझौता
इस रणनीतिक साझेदारी पर एनआरडीसी के प्रबंध निदेशक कमोडोर अमित रस्तोगी (सेवानिवृत्त) और एसएस मेडिकल सिस्टम्स के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. मोनीश भंडारी ने औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर तकनीकी निदेशक नागरूर लक्ष्मीनारायण सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
क्या है यह 'इनोवेटिव' तकनीक?
इस साझेदारी के केंद्र में माइक्रोवेव-आधारित मोबाइल संक्रमण नियंत्रण सिस्टम है। यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल है और हरित चिकित्सा प्रौद्योगिकी (Green Medical Technology) की दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
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तकनीक का स्रोत: यह 'सोसाइटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग एंड रिसर्च' (इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान) से प्राप्त तकनीक पर आधारित है।
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उपयोग: यह अस्पतालों और सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में संक्रामक बायोमेडिकल कचरे के स्टरलाइज़ेशन के लिए एक सुरक्षित समाधान प्रदान करता है।
नेतृत्व के विचार
कमोडोर अमित रस्तोगी (CMD, NRDC):
"हम एसएस मेडिकल के इस पेटेंटेड समाधान को देश के हर अस्पताल और क्लीनिक तक पहुँचाने के लिए अपने अखिल भारतीय नेटवर्क का उपयोग करेंगे। हमारा लक्ष्य भारत के स्वास्थ्य सेवा ढांचे को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाना है।"
डॉ. मोनीश भंडारी (CMD, SS Medical Systems):
"कचरा निपटान के पुराने और असुरक्षित तरीकों को 'मेक इन इंडिया' समाधानों से बदलकर हम सिर्फ कचरा प्रबंधन नहीं कर रहे, बल्कि संक्रमण के बोझ को कम करके सक्रिय रूप से जीवन बचा रहे हैं। यह तकनीक मरीजों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं दोनों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करेगी।"
इस समझौते का महत्व
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संक्रमण नियंत्रण: अस्पतालों से होने वाले संक्रमण (Infections) के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी।
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पर्यावरण अनुकूल: माइक्रोवेव-आधारित होने के कारण यह पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक टिकाऊ और सुरक्षित है।
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स्वदेशी तकनीक: यह पूरी तरह से भारत में विकसित तकनीक है, जो विदेशी आयात पर निर्भरता कम करती है।

